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वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल हो सकता है गेयटी थियेटर
Shimla
Updated Thu, 17 Jan 2013 05:31 AM IST
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शिमला। शिमला के मालरोड पर स्थित सवा सौ साल पुराना ऐतिहासिक गेयटी थियेटर वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल हो सकता है। गेयटी थियेटर को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल करने के लिए यूनेस्को को प्रस्ताव भेजा गया है। मनाली के हिडिंबा मंदिर, स्पीति के ताबो मठ, कांगड़ा के किला, बैजनाथ के मसरूर मंदिर और शिमला के एडवांस स्टडी के बाद गेयटी थियेटर को वर्ल्ड हेरिटेज की वैकल्पिक सूची में सम्मिलित करने की कवायद शुरू की गई है। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक राकेश कंवर ने इसकी पुष्टि की है।
2010 में आर्केलाजिकल सर्वे आफ इंडिया के महानिदेशक के शिमला दौरे के बाद शुरू हुई मुहिम अब मूर्त रूप लेने वाली है। विश्व धरोहर को लेकर जारी होने वाली वैकल्पिक सूची में गेयटी थियेटर शामिल हो सकता है। आर्केलाजिकल सर्वे आफ इंडिया के महानिदेशक ने गेयटी थियेटर को देखने के बाद इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने के प्रयास करने का सुझाव दिया था। इसके बाद भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिया था। गेयटी थियेटर की ऐतिहासिक इमारत के यूनेस्को के मापदंडों पर खरे उतरने के बाद यदि इसे विश्व धरोहर का दर्जा मिल जाता है तो शिमला में विदेशी पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
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ऐतिहासिक इमारत के साथ लिविंग थियेटर
विक्टोरियन गोथिक शैली में बना गेयटी थियेटर ऐतिहासिक इमारत के साथ लिविंग थियेटर भी है। यहां साल भर नाटकों का मंचन होता है। 1890 में अंग्रेजों द्वारा लकड़ी, रस्सी व रेत जैसी सुलभ वस्तुओं से संचालित थियेटर के पर्दे अभी भी इसी प्रणाली पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। गेयटी में ध्वनि प्रतिक्रिया जैसी अनोखी निर्माण शैली का इस्तेमाल किया गया है।
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पंद्रह करोड़ से हुआ है आधुनिकीकरण
गेयटी थियेटर के आधुनिकीकरण पर अब तक करीब पंद्रह करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। केमिकल एनेलेसिस के बाद गेयटी की दीवारों पर प्राचीन पत्थरों को पुन: लगाया गया है। कार्बन व ग्लास फाइबर की मदद से इमारत के स्तंभों का मजबूत किया गया है। इस समय गेयटी प्रबंधन के पास तेरह लाख की स्टेज प्रापर्टी 484 नाटकों का स्क्रिप्ट बैंक तैयार किया गया है।
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यूनेस्को को भेजा प्रपोजल : कंवर
‘गेयटी थियेटर को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल करने के लिए यूनेस्को को प्रपोजल भेजा है। हेरिटेज साइट की वैकल्पिक सूची में गेयटी थियेटर का नाम आने की उम्मीद है। इसे लेकर फरवरी अंत तक स्वीकृति मिल सकती है।’
- राकेश कंवर, निदेशक
भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग
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2010 में आर्केलाजिकल सर्वे आफ इंडिया के महानिदेशक के शिमला दौरे के बाद शुरू हुई मुहिम अब मूर्त रूप लेने वाली है। विश्व धरोहर को लेकर जारी होने वाली वैकल्पिक सूची में गेयटी थियेटर शामिल हो सकता है। आर्केलाजिकल सर्वे आफ इंडिया के महानिदेशक ने गेयटी थियेटर को देखने के बाद इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने के प्रयास करने का सुझाव दिया था। इसके बाद भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिया था। गेयटी थियेटर की ऐतिहासिक इमारत के यूनेस्को के मापदंडों पर खरे उतरने के बाद यदि इसे विश्व धरोहर का दर्जा मिल जाता है तो शिमला में विदेशी पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
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ऐतिहासिक इमारत के साथ लिविंग थियेटर
विक्टोरियन गोथिक शैली में बना गेयटी थियेटर ऐतिहासिक इमारत के साथ लिविंग थियेटर भी है। यहां साल भर नाटकों का मंचन होता है। 1890 में अंग्रेजों द्वारा लकड़ी, रस्सी व रेत जैसी सुलभ वस्तुओं से संचालित थियेटर के पर्दे अभी भी इसी प्रणाली पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। गेयटी में ध्वनि प्रतिक्रिया जैसी अनोखी निर्माण शैली का इस्तेमाल किया गया है।
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पंद्रह करोड़ से हुआ है आधुनिकीकरण
गेयटी थियेटर के आधुनिकीकरण पर अब तक करीब पंद्रह करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। केमिकल एनेलेसिस के बाद गेयटी की दीवारों पर प्राचीन पत्थरों को पुन: लगाया गया है। कार्बन व ग्लास फाइबर की मदद से इमारत के स्तंभों का मजबूत किया गया है। इस समय गेयटी प्रबंधन के पास तेरह लाख की स्टेज प्रापर्टी 484 नाटकों का स्क्रिप्ट बैंक तैयार किया गया है।
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यूनेस्को को भेजा प्रपोजल : कंवर
‘गेयटी थियेटर को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल करने के लिए यूनेस्को को प्रपोजल भेजा है। हेरिटेज साइट की वैकल्पिक सूची में गेयटी थियेटर का नाम आने की उम्मीद है। इसे लेकर फरवरी अंत तक स्वीकृति मिल सकती है।’
- राकेश कंवर, निदेशक
भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग