जयपुर में फैल रहा जीका वायरस, प्रदेश में नहीं है इलाज की सुविधा
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बदलते मौसम और बिमारियों से लोग उबर ही रहे थे कि राजस्थान में चिकित्सीय विभाग की जांच के बाद जीका वायरस के मामलों और स्क्रब टायफस से हो रही मौतों से प्रदेश में भय का माहौल पैदा हो गया है। हाल ही में एक लेबोरेटरी में दिए गए टेस्ट सैंपल से सामने आया है कि दो मामले एक ही क्षेत्र शास्त्री नगर के हैं जहां दो व्यक्ति जीका वायरस के मरीज निकले। डॉक्टरों के मुताबिक अभी और मामले सामने आने की संभावना है।
चिकित्सा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ये पता लगाने में लगा हुआ है कि जीका वायरस कहा से प्रदेश में आया और बाकि कितने लोग इससे पीड़ित हैं। हालांकि, मामला सामने आते ही इस सम्बन्ध में एक टीम का गठन कर दिया गया है, जो घरों में जाकर सर्वे करेगी। साथ ही केंद्र से आयी टीम ने भी दौरा किया और जिला स्तरीय अधिकारीयों को सजग कर दिया है।
बीमारियां फैलने के प्रमुख कारण
मलेरिया, डेंगू और जीका वायरस जैसी मच्छर जनित बिमारियां बढ़ने का एक कारण नगर निगम की ओर से समय पर फोगिंग नहीं करवाना है। एंटी लार्वा गतिविधियां भी महज औपचारिकता ही रही हैं।
जीका वायरस का पहला मामला सामने आने के बाद भी नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की ओर से शास्त्री नगर में तो अलर्ट जारी कर फॉगिंग और मच्छरों को खत्म करने के उपाय किए जाने लगे, लेकिन अन्य जिलों में फॉगिंग के लिए टीम ही नहीं पहुंची।
क्या है जीका वायरस
वर्ष 1947 में युगांडा में पहली बार जीका वायरस पकड़ा गया। एडीज एजिप्टाई मच्छर के काटने से फैलता है।
जीका वायरस के फैलने के लक्षण
तेज सर्दी के साथ बुखार, सिरदर्द, आंखें लाल होना, जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द, शरीर पर लाल चकते, खुजली, हाथ-पैर में सूजन प्रमुख लक्षण हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक जयपुर में जीका वायरस की जांच सुविधा नहीं है। इसकी जांच पुणे में संभव है, जांच के लिए मेक एलाइजा, रियल टाइम पॉली मरेज चैन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) तथा नेट टेस्ट उपलब्ध हैं।
सैंपल के लिए व्यक्ति का यूरीन, ब्लड तथा दिमाग से फ्लूड लिया जाता है।