नसबंदी के एक घंटे बाद मौत: मांगों पर सहमति बनने के बाद परिजनों ने खत्म किया धरना, पांचवें दिन महिला का अंतिम संस्कार
राजस्थान के बाड़मेर में चार दिन पहले नसबंदी के बाद विवाहिता की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने लापरवाह डॉक्टरों पर कार्रवाई सहित अन्य मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पांचवें दिन मांगों पर सहमति बनने के बाद परिजन महिला के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हुए।
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बाड़मेर के चौहटन थाना इलाके में नसबंदी से महिला की मौत के बाद चार दिन बाद परिजनों ने शव का दाह संस्कार किया। परिजनों की मांगों को लेकर सहमति बन गई है। प्रशासन ने मृतका के परिजनों को दस लाख रुपए की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने का वादा किया है।
दरअसल, चौहटन थाना इलाके के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 4 दिन पहले नसबंदी शिविर का शिविर लगा था। इसमें नसबंदी करवाने गई 24 वर्षीय महिला की ऑपरेशन के एक घंटे बाद मौत हो गई थी। पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए मोर्चरी में रखवाया दिया था। मृतका के परिजनों ने एएनएम तारा कश्यप पर नसबंदी के प्रेरित करने और एमएल अग्रवाल पर ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए थाने में केस दर्ज कराया।
परिजनों ने लापरवाही बरतने के लगाए थे आरोप
मृतका के परिजनों और समाज के लोगों ने कहा ब्लड की नस कटने से विवाहिता की मौत हुई है, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हो गई है। बावजूद इसके पुलिस लापरवाह चिकित्सकों को गिरफ्तार नहीं कर रही है। परिजनों की मांग थी कि नसबंदी शिविर के लिए अधिकृत संबंधित एनजीओ का एमओयू निरस्त किया जाए और लापरवाह डॉक्टरों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतका के आश्रितों को आर्थिक सहायता भी दी जानी चाहिए।
25 लाख रुपए की मांग की थी
कार्रवाई की मांग को लेकर मृतका के परिजन और समाज के लोग चार दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों न चिकित्सकीय टीम को गिरफ्तार, मृतका के आश्रितों को 25 लाख का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की थी। चार दिन तक प्रशासन परिजनों को मानाने का प्रयास करता रहा, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे।
पांचवें दिन माने परिजन
पांचवें दिन मंगलवार को एक बार फिर प्रशासन और मृतका के परिजनों के बीच मांगों को लेकर वार्ता हुई। इसमें प्रशासन और मृतका के परिजनों के बीच 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता , परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने की बात पर सहमति बन गई। प्रशासन ने परिजनों को जांच के बाद लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया है।