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Udaipur: लक्ष्यराज का कार्यक्रम 'गद्दी उत्सव' या 'पगड़ी दस्तूर'? क्षत्रिय महासभा ने उठाए सवाल, जानें क्या कहा

Wed, 02 Apr 2025 08:45 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Wed, 02 Apr 2025 08:45 AM IST
सार

उदयपुर के राजमहल में बुधवार को लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के गद्दी उत्सव का आयोजन किया जाएगा, लेकिन क्षत्रिय महासभा ने इस पर आपत्ति जताई है। महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष अशोक सिंह ने इसे सिर्फ 'पगड़ी दस्तूर' करार देते हुए 'राजतिलक' और 'गद्दी उत्सव' जैसे शब्दों के प्रयोग का विरोध किया है।

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Udaipur News: Kshatriya Mahasabha opposed the Gaddi Utsav of Lakshyaraj Singh
अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद लक्ष्यराज सिंह का गद्दी उत्सव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उदयपुर में बुधवार को राजमहल में लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के गद्दी उत्सव का आयोजन किया जाएगा। हालांकि, क्षत्रिय महासभा ने इस कार्यक्रम का विरोध जताया है। महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष अशोक सिंह ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर इसे 'पगड़ी दस्तूर' करार दिया है। उनका कहना है कि इस निजी आयोजन को 'राजतिलक' और 'गद्दी उत्सव' का नाम देना पारंपरिक मान्यताओं और संस्कृति के साथ खिलवाड़ है।

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महाराणा भगवत सिंह के निधन के बाद महेन्द्र सिंह का राजतिलक

इतिहास पर नजर डालें तो पूर्व महाराणा भगवत सिंह के निधन के बाद उनके बड़े बेटे महेंद्र सिंह मेवाड़ का गद्दी उत्सव आयोजित हुआ था। इसी तरह महेंद्र सिंह के निधन के उपरांत उनके उत्तराधिकारी विश्वराज सिंह मेवाड़ का राजतिलक और गद्दी उत्सव संपन्न हुआ। हालांकि, अरविंद सिंह मेवाड़ के समय ऐसा कोई आयोजन नहीं किया गया था। अब लक्ष्यराज सिंह द्वारा घोषित इस गद्दी उत्सव को लेकर विभिन्न पक्षों में मतभेद देखने को मिल रहे हैं।
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क्या है नियम
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की ओर से जारी कार्यक्रम की सूचना में गद्दी उत्सव के उपरांत एकलिंगजी के दर्शन और फिर 'रंग पलटाई' की रस्म का जिक्र किया गया है। पारंपरिक मान्यताओं के जानकारों के अनुसार, जब तक 16 उमराव और सलूम्बर रावत किसी व्यक्ति को गद्दी पर नहीं बैठाते, तब तक उसे मान्य राजा नहीं माना जाता। परंपरा के अनुसार, गद्दी पर बिठाने और राजतिलक करने का विशेष अधिकार सलूम्बर रावत के पास होता है।

Udaipur News: Kshatriya Mahasabha opposed the Gaddi Utsav of Lakshyaraj Singh
लक्ष्यराज सिंह और विश्वराज सिंह। - फोटो : अमर उजाला
इनकी उपस्थिति है जरूरी
मान्यता के अनुसार बड़ी सादड़ी देलवड़ा और गोगुन्दा के झाला, कोठारिया, बेदला और परसोली के पूर्बीया चौहान, सलूम्बर के कृष्णवत, बेगू के मेघावत, देवगढ़ के सांगावत और आमेट के जगावत, बांसी और भिंडर के शक्तावत और बदनोर, घाणेराव के राठौड़ और कानोड़ के सारंगदेवोत के साथ बिजोलिया के पंवार की उपस्थिति में ही गद्दी उत्सव होता है। अगर ये लोग मौजूद नहीं हों तो कोरम ही पूरा नहीं होता ऐसे में इनकी अनुपस्थिति में किया गया गद्दी उत्सव मान्य नहीं है।

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गद्दी उत्सव या पगड़ी दस्तूर?
अब सवाल यह उठता है कि लक्ष्यराज सिंह के इस गद्दी उत्सव में 16 उमराव और सलूम्बर रावत उपस्थित होते हैं या नहीं। यदि ये पारंपरिक पदाधिकारी इस समारोह में शामिल होते हैं और अपनी स्वीकृति प्रदान करते हैं, तो यह आयोजन गद्दी उत्सव माना जाएगा। परंतु, यदि वे इसमें शामिल नहीं होते तो इसे केवल 'पगड़ी दस्तूर' माना जाएगा, न कि राजतिलक या गद्दी उत्सव।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज
इस पूरे घटनाक्रम पर उदयपुर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्षत्रिय महासभा का यह विरोध बताता है कि राजपरिवार की परंपराओं को लेकर समाज में गहरी संवेदनशीलता है। कुछ लोगों का मानना है कि यह आयोजन पारंपरिक विधियों के अनुसार ही संपन्न होना चाहिए, जबकि अन्य इसे एक निजी आयोजन मान रहे हैं। राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक रस्म से बढ़कर ऐतिहासिक परंपराओं के सम्मान से जुड़ा है। अगर यह आयोजन बिना 16 उमरावों और सलूम्बर रावत की स्वीकृति के संपन्न होता है, तो यह निश्चित रूप से एक नई बहस को जन्म देगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि लक्ष्यराज सिंह का यह गद्दी उत्सव किस रूप में संपन्न होता है और क्या यह वाकई एक ऐतिहासिक परंपरा का पालन करता है या सिर्फ एक निजी आयोजन तक सीमित रह जाता है।
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