असल निशानेबाज की 16 मई को हो जाएगी पहचान!
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राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी कांग्रेस के सीपी जोशी के सामने ओलम्पिक पदक विजेता निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जयपुर ग्रामीण सीट पर निशाना साध रहे हैं।
राजस्थान के कद्दावर नेता जोशी के सामने उनका यह निशाना कितना सटीक बैठता है, इस जवाब को जानने के लिए यह सीट चर्चा का विषय बनी हुई है।
जोशी का कद राजनीति में निश्चित तौर पर राज्यवर्धन राठौड़ से ऊंचा है और अनुभव की कोई कमी नहीं है। राठौड़ को केन्द्र सरकार से जनता की नाराजगी, मोदी लहर और खुद के व्यक्तित्व के सहारे मतदाताओं से सहयोग मिलने की उम्मीद है।
जयपुर ग्रामीण्ा सीट पर दोनों ही नए चेहरे
हालांकि दोनों के बीच टक्कर जबरदस्त हैं और दोनों के नामों व चेहरों से अधिकतर लोग वाकिफ हैं, लेकिन इस सीट के हिसाब से दोनों ही चेहरे नए हैं। जोशी भीलवाड़ा से सांसद हैं, तो राठौड़ का यह पहला चुनाव है।
खास बात यह है कि इस चुनाव प्रचार के दौरान मीडिया हो या कोई भी जिज्ञासू, वह जोशी से यह सवाल जरूर करता है कि आखिर भीलवाड़ा क्यों छोड़ा?
अन्य राजनेताओं से अलग साफगोही छवि रखनेवाले जोशी बिना लाग-लपेट अपनी विफलता गिना देते हैं कि वे अपने वादे के अनुसार 2500 करोड़ रुपए की परियोजना मंजूर करवाने के बावजूद चम्बल नदी का पानी भीलवाड़ा तक नहीं पहुंचा सके, इस कारण वह सीट छोड़ रहे हैं। उनके लिए यह नकारात्मक प्रचार का कारण बन सकता है।
जोशी नहीं लड़ना चाहते थे चुनाव
पहले जोशी का चुनाव लड़ने का मन ही नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दो साल पहले ही चुनाव नहीं लड़ने का मन बना चुके थे। वे चुनावी मैदान में न उतरकर संगठन के लिए कार्य करना चाहते थे।
लेकिन विधानसभा चुनाव में मिले कांग्रेस को बड़े झटके के कारण और पार्टी के बार-बार कहने के कारण उन्होंने अपना मन बदला और एक बार फिर चुनावी मैदान में उतर गए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वे चुनाव नहीं लड़ते, तो माना जाता कि वे चुनाव से डर गए हैं।
जयपुर ग्रामीण से कांग्रेस के वर्तमान सांसद लालचंद कटारिया का टिकट कटा है, लेकिन जोशी खेमे के ही होने के कारण कटारिया उन्हें जिताने के लिए प्रयासरत हैं।
एकजुटता व लहर का राठौड़ को भरोसा
जोशी की उम्मीदवारी के कारण इस सीट पर कांग्रेस कार्यकताओं में जोश जरूर दिख रहा है।
जोशी के कारण ही कांग्रेस के बागी होकर पार्टी के खिलाफ ही विधानसभा चुनाव लड़नेवाले हरीश यादव, चौथमल सैनी तथा रामस्वरूप कसाना सहित कई नेता वापस कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं।
इधर, राठौड़ को इस समय विधानसभा चुनाव नतीजों से उत्साहित भाजपा कार्यकताओं का पूरा साथ मिल रहा है। युवा नेता होने के नाते युवा पीढ़ी में भी उनको पसंद किया जा रहा है।
यहां जातियों के दम पर जीत संभव नहीं
राजस्थान की 16 लाख से अधिक मतदाता संख्या वाली इस सीट पर कोई एक ऐसी बड़ी जाति नहीं है, जो किसी को चुनाव जितवा सके। कांग्रेस का ब्राह्मण उम्मीदवार है, तो भाजपा का राजपूत।
लेकिन इस सीट पर एक लाख राजपूत और ब्राह्मण मतदाता 90 हजार हैं, जो थोड़ा-बहुत फायदा भले ही दे सकते हैं, लेकिन अकेले अपने दम पर चुनाव जितवाने की ताकत नहीं रखते। जाट मतदाता सबसे अधिक करीब 2.70 लाख है।
इस सीट पर जाट समाज से आनेवाले वर्तमान सांसद कटारिया का जोशी के साथ होने से कांग्रेस को जाट मतदाताओं से थोड़ा फायदा जरूर मिल सकता है। कहा जा सकता है कि यह चुनाव जातियां नहीं लहर जिता सकती है।
ये रहा पिछले चुनावों का ब्यौरा
पिछले लोकसभा चुनाव से पहले 2008 के हुए विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र की आठ में से पांच सीटें भाजपा के खाते में थी। कांग्रेस के पास दो सीट थी।
लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लालचंद कटारिया ने सात सीटों पर बढ़त बनाकर भाजपा के राव राजेन्द्र सिंह को पटखनी दी थी। पिछले लोकसभा चुनाव और इस लोकसभा चुनाव में यदि अंतर है तो यह है कि पहले कांग्रेस की राज्य में सरकार थी, लेकिन इस बार भाजपा की सरकार है।
वर्तमान में इस संसदीय क्षेत्र की 8 में से 5 सीट भाजपा के खाते में और 2 पर कांग्रेस उम्मीदवार जीते हैं। एक सीट पर अन्य दल के उम्मीदवार ने बाजी मारी है।