जयपुर के शनि मंदिर की पुजारिन सुगनी देवी बनी मिसाल
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शनि शिंगणापुर, सबरीमाला और हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बीच जयपुर में एक ऐसा शनि मंदिर मिशाल पेश कर रहा है, जहां पिछले कई सालों से महिला पुजारिन ही पूजा-अर्चना करवा रही हैं।
देश की आजादी के समय के इस शनि मंदिर में फिलहाल सुगनी देवी तीसरी पुजारिन हैं। इससे पहले इनकी नानी और सास भी इस मंदिर की पुजारिन थीं।
शनि शिंगणापुर, सबरीमाला और हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध पर छिड़े विवाद पर सुगनी ने सवाल उठाया कि नारी जननी है, तो उसे पूजा से क्यों रोका जाए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यहां तक कह दिया कि यह सब पुजारियों का खड़ा किया गया विवाद है।
सुगनी देवी को विरासत में मिला यह काम
जयपुर के इमलीवाला फाटक पर स्थित यह शनि मंदिर करीब 70 साल पुराना है। सुगनी देवी पुजारिन बनकर इस मंदिर की विरासत को संभाल रही हैं। हालांकि वह पढ़ी लिखी नहीं है, लेकिन उन्हें यह काम विरासत में मिला है।
इसी के सहारे वह लोगों को शनिदेव को प्रसन्न करने के विधि-विधान सिखा रही हैं। सुगनी देवी का कहना है कि जब इस देश में उच्च पदों को महिलाएं संभाल चुकी हैं, तो वह मंदिर की पुजारी का काम क्यों नहीं कर सकती हैं। सुगनी ने बताया कि जब उनके पति जीवित थे, तब भी वह पुजारिन के रूप में इस मंदिर की सेवा करती थीं।
उनके पति भी पुजारी का काम करते थे। उनकी पीढ़ियां भी इसी मंदिर से जुड़ी हुई रहीं। सुगनी ने बताया कि वह अपने पति के समय से मंदिर में पूजा-पाठ से लेकर अभिषेक तक का जिम्मा उठाती आ रही हैं।