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Rajasthan: कहीं यहां भी न हो जाएं कांग्रेस के लिए पंजाब जैसे हालात! पार्टी फूंक-फूंक कर उठा रही सियासी कदम

Mon, 23 Jan 2023 03:11 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 23 Jan 2023 03:11 PM IST
सार

Rajasthan: पंजाब का जिक्र करते हुए कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि विरोध वहां पर भी हुआ था। नतीजा यह हुआ कि पंजाब से कांग्रेस की विदाई हो गई। वह कहते हैं कि राजस्थान में भी अभी कमोबेश स्थिति कुछ ऐसी ही दिख रही है...

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Situation like Punjab should not happen in rajasthan for Congress
Rajasthan: अशोक गहलोत और सचिन पायलट - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

जैसे-जैसे राजस्थान में विधानसभा के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे वैसे राजस्थान में दो बड़े नेताओं के बीच का मामला सियासत की लड़ाई में फंसता जा रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी इस पूरे विवाद को खत्म करने में तो लगी है, लेकिन मामला खत्म होने की बजाय सिर्फ पार्टी में ही नहीं बल्कि जमीन पर भी बढ़ता जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर वक्त पर राजस्थान में चल रहे कांग्रेस के नेताओं के बीच का विवाद नहीं सुझाया गया, तो विवाद के चलते यहां भी हालात पंजाब जैसे ही हो सकते हैं। कांग्रेस के नेता भी दबी जुबान इस बात को स्वीकार करते हैं कि कांग्रेस की स्थिति राजस्थान में पंजाब की तरह ही हो रही है।

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सचिन का युवाओं पर फोकस

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच में चल रही राजनैतिक अदावत किसी से छुपी नहीं है। सियासी जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ दिनों से जिस तरीके से सचिन पायलट राज्य के अलग-अलग जिलों में जाकर जनता से रूबरू हो रहे हैं, वह आने वाले दिनों में राजस्थान के बड़े सियासी करवट बदलने का इशारा कर रही है। राजनीतिक विश्लेषण हरिओम तंवर कहते हैं कि सचिन पायलट अपनी जितनी सभाओं में जा रहे हैं, वहां पर न सिर्फ युवाओं की बात कर रहे हैं, बल्कि युवाओं के नारे भी लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि सचिन पायलट आने वाले विधानसभा चुनावों में युवाओं के दम पर और युवाओं की बात करके चुनावों की दशो-दिशा बदलने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच में सियासत तनातनी तो चल ही रही है और अब तो विधानसभा के चुनाव भी आने वाले हैं। ऐसे में सचिन पायलट जब राजस्थान के अलग-अलग जिलों में होने वाले सियासी सम्मेलन में पहुंच रहे हैं, तो वह कहीं न कहीं खुद को एक बड़ी ताकत के रूप में स्थापित भी करने की कोशिश कर रहे हैं।

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राजनीतिक विश्लेषक तंवर कहते हैं कि राजस्थान के कांग्रेसी नेता चाहते हैं कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच में चल रहे विवाद का निपटारा किया जाए। ताकि आने वाले विधानसभा के चुनावों में पार्टी एक बड़ी ताकत के साथ मैदान में उतरे और चुनाव जीते। लेकिन पार्टी की ओर से इस पूरे मामले में अभी तक स्पष्ट रूप से मामले का निपटारा करने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि पार्टी के लिए जितने महत्वपूर्ण सचिन पायलट हैं, उतने ही महत्वपूर्ण अशोक गहलोत हैं। अब आने वाले विधानसभा के चुनाव में किस तरीके की रणनीति होगी यह तो आलाकमान ही तय करेगा। लेकिन यह बात बिल्कुल तय है कि अगले कुछ दिनों के भीतर सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच में चल रहे विवाद का पटाक्षेप हो जाएगा। उनका तर्क है कि पार्टी ऐसा किसी भी तरीके का रिस्क नहीं उठाना चाहती है जो पंजाब में हुआ है।

किसी को नाराज नहीं करना चाहती पार्टी

पंजाब का जिक्र करते हुए कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि विरोध वहां पर भी हुआ था। कांग्रेस पार्टी के बड़े कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पार्टी ने इसी विवाद के बीच में जब पल्ला झाड़ा तो माहौल बदल गया। नतीजा यह हुआ कि पंजाब से कांग्रेस की विदाई हो गई। वह कहते हैं कि राजस्थान में भी अभी कमोबेश स्थिति कुछ ऐसी ही दिख रही है। उनका मानना है कि पार्टी ऐसा कोई भी फैसला नहीं लेगी, जिससे हालात पंजाब जैसे राजस्थान में बनें। वह कहते हैं कि फिलहाल राजस्थान के दोनों बड़े नेता जनता के बीच में तो हैं ही। वह लोगों से मुखातिब हो रहे हैं और कांग्रेस की नीतियों के बारे में और राज्य सरकार के किए गए काम को जनता के बीच में पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी इस पूरे मामले में बहुत करीब से नजर बनाए हुए हैं। जल्द ही इस पूरे मामले का बड़े नेताओं के साथ बैठकर हल भी निकाल दिया जाएगा।

सियासी जानकारों का कहना है कि राजस्थान में अगर किसी भी एक बड़े नेता को नाराज किया जाता है, तो उसका पार्टी को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार एसएन नागर कहते हैं कि पार्टी के लिए जहां अशोक गहलोत वरिष्ठ और अनुभवी नेता होने के साथ एक बड़े जनाधार वाले नेता हैं। वहीं सचिन पायलट युवा होने के साथ सरकार में पूर्व उपमुख्यमंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद संभाल चुके हैं। वह कहते हैं कि पायलट की राजस्थान में अपनी एक फैन फॉलोइंग है। नागर कहते हैं कि दोनों बड़े नेता जातिगत समीकरणों के लिहाज से भी मजबूत शख्सियत हैं। वह कहते हैं कि यही वजह है कांग्रेस पार्टी किसी भी नेता को नाराज नहीं करना चाहती है और बीच का रास्ता निकाल कर पूरे मामले का पटाक्षेप करने में लगी है।

रायपुर बैठक से निकल सकते हैं रास्ते

उनका मानना है कि अगर राजस्थान में भी कांग्रेस ने पंजाब जैसी कोई बीच की सियासी व्यवस्था बनाई, तो हालात बिगड़ते देर नहीं लगेगी। वह कहते हैं कि पार्टी ने पंजाब में मुख्यमंत्री बदलकर जब चन्नी के तौर पर दलित चेहरे को सीएम बनाया और अगला चुनाव उसके चेहरे पर लड़ा। इसी दौरान पंजाब में कांग्रेस का सियासी नेटवर्क गड़बड़ हुआ और चुनाव के नतीजे सबके सामने हैं। वे कहते हैं कि कांग्रेस के नेताओं को इस बात का अंदाजा है। यही वजह है कि वह राजस्थान में पंजाब का एपिसोड नहीं दोहराना चाहते हैं और फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि रायपुर में होने वाली कांग्रेस की बैठक से पहले सचिन पायलट और अशोक गहलोत का मामला सुलझाया जा सकता है।

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