सिरोही की खास होली: सुख-समृद्धि की कामना में अग्नि पर कदम, रणोरा, पाबा व जांबूडी की परंपरा; ऐसे खेलते हैं होली
सिरोही जिले के आबूरोड उपखंड के रणोरा, पाबा और जांबूडी गांवों में होलिका दहन के बाद ग्रामीण धधकते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं। सदियों पुरानी इस परंपरा को सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की आस्था से जोड़ा जाता है।
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होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और रंगों के उल्लास का प्रतीक माना जाता है। देशभर में यह त्योहार अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के साथ मनाया जाता है। ऐसी ही एक अनोखी और रोमांचक परंपरा सिरोही जिले के आबूरोड उपखंड के भाखर अंचल में देखने को मिलती है, जहां होलिका दहन के बाद युवा और ग्रामीण धधकते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं।
आबूरोड उपखंड के रणोरा, पाबा और जांबूडी गांवों में सदियों से यह परंपरा निभाई जा रही है। होलिका दहन की रात ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच ग्रामीण एकत्रित होते हैं और अग्नि शांत होने के बाद बचे अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं। इस आयोजन में हर आयु वर्ग के लोग भाग लेते हैं और उत्साह चरम पर रहता है।
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ग्रामीणों की मान्यता है कि अंगारों पर चलने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है तथा विपत्तियां दूर होती हैं। कई लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर भी श्रद्धा के साथ इस परंपरा का निर्वहन करते हैं।
रणोरा निवासी भाजपा नेता रामलाल राणोरा के अनुसार, मंगलवार को होलिका दहन किया जाएगा। परंपरा के तहत पहले ढोल-नगाड़ों से ग्रामीणों को एकत्रित किया जाता है, फिर विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है। इसके बाद अंगारों पर चलने की रस्म निभाई जाती है। अगले दिन ग्रामीण स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं और दिनभर उपवास रखते हैं।यह परंपरा क्षेत्र की आस्था, साहस और सामुदायिक एकता का प्रतीक मानी जाती है, जिसे देखने के लिए आसपास के इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं।