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सत्ता का सेमीफाइनल: जयपुर में 26 हजार नौकरियों का सवाल और नेताओं के जवाब

Thu, 15 Nov 2018 04:06 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 15 Nov 2018 04:06 PM IST
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Satta ka Semifinal: election issues of Jaipur political leaders answers
सत्ता का सेमीफाइनल में क्या कहती है जयपुर की जनता? - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला आपको बता रहा है राजस्थान के जमीनी हालात और उन विषयों के बारे में जो इस बार चुनावी मुद्दे हैं। इसी के मद्देनजर अमर उजाला का चुनाव रथ पहुंचा है जयपुर। संवाददाता अभिलाषा पाठक ने आम जनता और सियासी दलों से बात करके यहां का मिजाज टटोलने की कोशिश की। 
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टी वैली प्रायोजित अमर उजाला के खास लाइव कार्यक्रम सत्ता के सेमीफाइनल में जानिए कि जयपुर इस बार किन मुद्दों पर वोट करने वाला है। 

इस चर्चा में भाजपा से लक्ष्मीकांत भारद्वाज, कांग्रेस से मनोज मुद्गल, घनश्याम तिवाड़ी के नई नवेले दल भारत वाहिनी पार्टी से दयाराम महेरिया और इलेक्शन वॉच से कमल टांक ने हिस्सा लिया।
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26 हजार नौकरियों का सवाल

चुनाव से ऐन पहले वसुंधरा सरकार के नौकरियों के एलान के बाद मामला आचार संहिता में फंस गया और इस पर रोक लग गई। ये मुद्दा हमारे इस कार्यक्रम मे भी खूब उछला। सरकार पर जब बेरोजगारी दूर न कर पाने के आरोप लगे तो भाजपा प्रतिनिधि ने कहा कि जिन 26 हजार नौकरियों की बात हो रही, उन शिक्षकों को सिर्फ पोस्टिंग दी जानी बाकी थी, बाकी प्रक्रिया निपट गई थी। सचिन पायलट के निर्देश पर 16 अक्तूबर को चुनाव आयोग में कांग्रेस गई और इस पर रोक लगवा दी।
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एक छात्र ने कहा कि सरकार ने जो वैकेंसी निकाली हैं वो जल्द से जल्द भरनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि वसुंधरा सरकार पांच साल सोती रही, युवाओं को रोजगार नहीं दे पाई। एक और छात्र ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों से लोग परेशान हो चुके हैं और तीसरा विकल्प चाहते हैं।

अपनी-अपनी जीत के दावे

भाजपा नेता लक्ष्मीकांत ने कहा कि पार्टी अपनी 2013 की सीट संख्या को आगे बढ़ाएगी। नेता लोगों के बीच जा रहे हैं। कांग्रेस के मनोज मुद्गल ने इस पर हमला बोलते हुए कहा कि इस बार 15 मंत्रियों समेत 30 विधायकों की टिकट काट दी गई है। ये दिखाता है कि भ्रष्टाचार और कुशासन के बोलबाले की वजह से ऐसा हुआ है। कांग्रेस भले पिछली बार 21 पर सिमट गई हो, भाजपा तो मेटाडोर में आएगी। भारत वाहिनी पार्टी की नुमाइंदगी कर रहे दयाराम महेरिया ने वसुंधरा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।

भाजपा नेता ने टिकट काटे जाने वाली बात पर कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से चलती है। पहले भी ऐसा होता रहा है। किसी भी कार्यकर्ता को चुनाव लड़ाया जा सकता है। घनश्याम तिवाड़ी के बारे में भाजपा नेता ने कहा कि उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया इसलिए वो पार्टी छोड़कर चले गए जिसे महेरिया ने गलत ठहराया।

नेताओं का विकल्प कहां हैं?

इलेक्शन वॉच के कमल टांक ने कहा कि होना तो ये चाहिए कि लोगों से जुड़े, साफ छवि वाले उम्मीदवार खड़े हों लेकिन चुनाव में आपराधिक छवि और धनबल का बोलबाला दिखाई देता है। रिपोर्ट कार्ड की बात नहीं होती बल्कि जाति और धर्म की बात होती है। नोटा के सवाल पर कहा कि सच्चे और अच्छे को चुनें। कुछ समझ न आए तो नोटा पर डालें लेकिन वोट डालना बहुत जरूरी है।

रिटायर्ड जेल अधीक्षक रमाकांत सक्सेना ने विकल्प का मुद्दा उठाया, "अच्छे और बुरे का विकल्प नहीं बचा। अब विकल्प खराब और कम खराब का है। महिला सुरक्षा को लेकर कोई काम नहीं हुआ। उनकी स्थिति और खराब हुई है।"


रिटायर्ड आईएएस ने कहा कि जनप्रतिनिधि शब्द में जन और प्रतिनिधि के बीच समय के साथ बहुत दूरी आ गई। जनप्रतिनिधि यानी नेताओं को जनता की बात सुननी-समझनी चाहिए और जनता को भी विवेक का इस्तेमाल करते हुए अपने नुमाइंदे को चुनना चाहिए।

जयपुर शहर और ग्रामीण मिलाकर 19 सीटें हैं जिनमें से 16 पर भाजपा का कब्जा है। राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होना है।
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