राजस्थान: जन्माष्टमी पर नाथद्वारा में आस्था का महासैलाब, आधी रात 21 तोपों की सलामी से गूंजेगा श्रीनाथजी धाम
श्रीनाथजी मंदिर नाथद्वारा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। भीड़ को देखते हुए 4 और 5 सितंबर को सभी तरह के दर्शन और प्रोटोकॉल पास बंद रहेंगे। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं, जबकि निकासी मोतीमहल से होगी।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर नाथद्वारा स्थित वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में आस्था और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीनाथजी के दर्शन के लिए नाथद्वारा पहुंच रहे हैं। शुक्रवार सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास का इलाका श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज रहा है। जन्माष्टमी पर रात 12 बजे रिसाला चौक में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन, प्रवेश और वाहनों की पार्किंग के लिए विशेष व्यवस्था की है।
जन्माष्टमी पर दर्शन का यह रहेगा समय
जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार सुबह करीब 4.45 बजे मंगला (पंचामृत) दर्शन खुले। इसके बाद सुबह 8 बजे श्रृंगार दर्शन होंगे, जो करीब एक घंटे तक चलेंगे। दोपहर करीब 12.30 बजे से राजभोग दर्शन होंगे और यह करीब एक घंटे तक चलेंगे। शाम 7.30 बजे से भोग-आरती के दर्शन होंगे, जबकि रात 9.30 बजे से जागरण दर्शन शुरू होंगे।
शाम को रिसाला चौक से शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। इसके बाद रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर रिसाला चौक में ‘नर’ और ‘मादा’ नाम की दो तोपों से 21 गोले दागे जाएंगे। तोपों की गूंज आसपास के गांवों तक सुनाई देगी और श्रद्धालु कान्हा के जन्म की खुशियां मनाएंगे।
5 सितंबर को मनाया जाएगा नन्दोत्सव
जन्माष्टमी के अगले दिन 5 सितंबर को श्रीनाथजी मंदिर में नन्दोत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान सुबह 7.30 बजे से 11 बजे तक केसरयुक्त दही और छाछ के छिड़काव के दर्शन होंगे। इसके बाद दोपहर 2.15 बजे से करीब एक घंटे तक राजभोग दर्शन, शाम 7 बजे से करीब आधे घंटे तक उत्थापन दर्शन और रात 9 बजे से करीब एक घंटे तक भोग-आरती के दर्शन प्रस्तावित हैं। हालांकि, सेवा-पूजा की परंपरा और विधि-विधान के चलते दर्शन के समय में बदलाव संभव है।
4 और 5 सितंबर को नहीं मिलेंगे दर्शन पास
जन्माष्टमी और नन्दोत्सव पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासनिक समिति ने 4 और 5 सितंबर को किसी भी प्रकार के दर्शन पास जारी नहीं करने का फैसला किया है। इन दो दिनों में सभी मनोरथियों के लिए दिनभर के मनोरथ, राजभोग, मंगल-भोग, शयन-भोग, सामग्री, जिन्स भेंट और किसी भी मनोरथ से जुड़े दर्शन पास नहीं दिए जाएंगे। इसके साथ ही इस अवधि में किसी भी तरह के प्रोटोकॉल दर्शन पास भी जारी नहीं होंगे। पास के क्यूआर कोड की मशीन भी बंद रहेगी।
महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जन्माष्टमी और नन्दोत्सव के दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं। महिला श्रद्धालुओं का प्रवेश चौपाटी मंदिर मार्ग से होते हुए श्रीनाथजी मंदिर के प्रतापमाली गेट से होगा। वहीं पुरुष श्रद्धालु चौपाटी मंदिर मार्ग से नक्कारखाना गेट के जरिए मंदिर में प्रवेश करेंगे। मंदिर से सभी श्रद्धालुओं की निकासी मोतीमहल की ओर से होगी।
इन जगहों पर होगी वाहनों की पार्किंग
श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए प्रशासन ने शहर में अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए हैं। इनमें 120 फीट रोड, मोतीमहल परिसर, हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर और मॉडर्न स्कूल परिसर शामिल हैं। इसके अलावा दोपहिया वाहनों के लिए बालासीनोर भूखंड पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। टैक्सी स्टैंड के पास खतल गली स्कूल भूखंड, इमली बाजार संस्कृत कॉलेज और वैण्ड लाइन में भी वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था रहेगी।
श्रद्धालुओं से व्यवस्था में सहयोग की अपील
जन्माष्टमी और नन्दोत्सव के दौरान श्रीनाथजी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए मंदिर प्रबंधन और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित प्रवेश मार्गों का ही इस्तेमाल करने और अपने वाहनों को तय पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करने की अपील की है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भीड़ को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है, ताकि सभी भक्तों को सुचारु तरीके से श्रीनाथजी के दर्शन हो सकें और जन्माष्टमी का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से मनाया जा सके।