राजस्थान: एसआई भर्ती-2016 की मेरिट सूची फिर बनेगी, हाईकोर्ट का संशोधन का आदेश; 50% आरक्षण सीमा का पालन जरूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती-2016 की संशोधित मेरिट सूची नए सिरे से जारी करने का आदेश दिया है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने राज्य सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग को पदों की श्रेणीवार दोबारा गणना कर 180 दिनों के भीतर नई मेरिट सूची जारी करने के निर्देश दिए हैं।
विस्तार
राजस्थान में सब इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2016 को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) को पदों की श्रेणीवार दोबारा गणना कर संशोधित मेरिट सूची जारी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि भर्ती में आरक्षण लागू करते समय 50 प्रतिशत की सीमा और अनुसूचित जाति (एससी) व अनुसूचित जनजाति (एसटी) के बैकलॉग नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। पूरी प्रक्रिया 180 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि संशोधित मेरिट सूची जारी होने के बाद पहले से नियुक्त किसी भी अभ्यर्थी को नौकरी से नहीं हटाया जाएगा।
सामान्य वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की होगी रक्षा
जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने श्याम सिंह और अन्य की याचिकाओं का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने राज्य सरकार को संशोधित मेरिट सूची में सामान्य और अनारक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त पद सृजित करने की छूट भी दी है।
सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने भर्ती प्रक्रिया में हुई विभिन्न खामियों को अदालत के सामने रखा। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पदों की श्रेणीवार पुनर्गणना कर नई मेरिट सूची जारी करने का निर्देश दिया।
भर्ती में आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप
अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बताया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 5 अक्टूबर 2016 को एसआई भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसमें बाद में 5 दिसंबर 2018 और 23 अगस्त 2019 को संशोधन किए गए। भर्ती में गैर-अनुसूचित क्षेत्र के कुल 456 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए केवल 142 पद रखे गए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इससे सामान्य श्रेणी के पदों का अनुपात 50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से काफी कम रह गया। इसके अलावा भर्ती विज्ञापनों में बैकलॉग रिक्तियों का स्पष्ट आधार नहीं दिया गया था। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की रिक्तियों को भी उचित कानूनी प्रावधान के बिना आगे बढ़ाने का आरोप लगाया गया।
सरकार और आयोग के जवाब को कोर्ट ने माना अपर्याप्त
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और आयोग ने वर्षवार रिक्तियों का ब्योरा और अतिरिक्त शपथपत्र पेश कर पदों के निर्धारण को सही ठहराने का प्रयास किया। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को अपर्याप्त माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सेवाओं में आरक्षण की सामान्य सीमा 50 प्रतिशत है और इसका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। साथ ही एससी और एसटी वर्ग की बैकलॉग रिक्तियों से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना होगा।
2019 में हुई थी परीक्षा, 2020 में जारी हुआ था परिणाम
एसआई भर्ती-2016 के लिए वर्ष 2019 में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इसका परिणाम 1 सितंबर 2020 को जारी किया गया था। इसके बाद दिसंबर 2020 में हाईकोर्ट ने नियुक्तियों पर रोक लगा दी थी। हालांकि, जुलाई 2021 में यह रोक हटा ली गई थी। इसके तुरंत बाद आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दे दी थीं।
180 दिन में जारी करनी होगी संशोधित मेरिट सूची
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग को पदों की श्रेणीवार दोबारा गणना करनी होगी। इसमें 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा और एससी-एसटी बैकलॉग के नियमों का पालन करते हुए नई मेरिट सूची जारी करनी होगी। सामान्य और अनारक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पद भी सृजित कर सकेगी। अदालत ने पूरी प्रक्रिया 180 दिनों में पूरी करने का निर्देश दिया है। साथ ही पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी सुरक्षित रखने की बात भी स्पष्ट कर दी है।