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राजस्थान: 37 बिल्डरों पर रेरा का शिकंजा, 42 प्रोजेक्ट्स के डिफॉल्टरों के नाम-पते और फोटो किए सार्वजनिक
Wed, 28 Oct 2026 05:30 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 28 Oct 2026 05:30 PM IST
सार
राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने 37 बिल्डर-डेवलपर्स को डिफॉल्टर घोषित करते हुए उनकी सूची आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की है। इनसे जुड़े 42 प्रोजेक्ट्स के मामलों में आदेशों की अवहेलना और खरीदारों की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की गई है।
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रेरा (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने धोखाधड़ी करने, प्रोजेक्ट अटकाने और अदालती आदेशों की अवहेलना करने वाले 37 प्रमुख बिल्डर-डेवलपर्स की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है। प्राधिकरण ने 42 प्रोजेक्ट्स से जुड़े इन डिफॉल्टरों के नाम, फोटो, डिफॉल्टर होने का कारण और अदालत द्वारा सुनाए गए फैसलों की प्रतियां पोर्टल पर अपलोड कर दी हैं। इस बड़े फैसले के बाद जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और भिवाड़ी सहित पूरे राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी और आम खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी।
डिफॉल्टर सूची में प्रमुख नाम
रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी इस सूची में राज्य के कई बड़े रियल एस्टेट समूह शामिल हैं। जिन प्रमुख प्रमोटरों और कंपनियों के नाम तथा फोटो पोर्टल पर सार्वजनिक किए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से एफएस हाउसिंग, मोजिका रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स, विनायक बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, आस्था बिल्डहोम डेवलपर्स और रिको डेवलपर्स शामिल हैं।
इन सभी बिल्डरों के खिलाफ रेरा कोर्ट में खरीदारों की शिकायतों के आधार पर सुनवाई हुई थी। आदेशों का पालन न करने और ग्राहकों के पैसे न लौटाने के कारण प्राधिकरण ने इन्हें औपचारिक रूप से डिफॉल्टर घोषित कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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दर्ज मामलों का विवरण और वर्गीकरण
सार्वजनिक किए गए 42 प्रोजेक्ट्स के मामलों का विस्तृत वर्गीकरण प्राधिकरण ने पोर्टल पर उपलब्ध कराया है। कुल मामलों में से 32 मामले खरीदारों को रेरा द्वारा तय की गई जुर्माने या रिफंड की राशि जमा न कराने से जुड़े हैं। चार मामलों में रेरा अधिनियम की धारा 34(सी) के प्रावधानों के तहत बिल्डर को डिफॉल्टर घोषित किया गया है।
तीन मामले रेरा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर जारी किए गए अंतिम आदेशों और निर्देशों की सरेआम अवहेलना करने से संबंधित हैं। इनके अतिरिक्त एक मामला तय समय-सीमा के भीतर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पूरा न करने और खरीदारों को पजेशन न देने का है, एक मामला संपत्तियों की कुर्की व बैंक खाते फ्रीज करने की कानूनी कार्रवाई का है और एक मामला वित्तीय गड़बड़ियों के चलते बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज करने से जुड़ा है।
खरीदारों के लिए जांच की प्रक्रिया
आमतौर पर मध्यमवर्गीय खरीदार फ्लैट या मकान खरीदते समय केवल प्रोजेक्ट की लोकेशन, आसपास के सड़क नेटवर्क, कीमत, स्विमिंग पूल या क्लब हाउस जैसी सुविधाओं पर ही ध्यान देते थे। बिल्डर का पिछला इतिहास जांचने की व्यवस्था न होने से पजेशन में देरी और कानूनी विवाद उत्पन्न होते थे।
ये भी पढ़ें- राजस्थान पंचायत चुनाव लाइव: दोपहर तीन बजे तक बांसवाड़ा में सबसे ज्यादा मतदान, जयपुर में 49.45 प्रतिशत वोट पड़े
अब नया फ्लैट, विला या व्यावसायिक स्थान बुक करने से पहले ग्राहक रेरा के आधिकारिक पोर्टल rera.rajasthan.gov.in पर जाकर तीन आसान चरणों में पड़ताल कर सकते हैं। इसके लिए पोर्टल के होमपेज पर दिए गए 'प्रमोटर्स/प्रोजेक्ट्स' टैब के तहत 'डिफॉल्टर लिस्ट' या 'ऑर्डर्स एंड जजमेंट्स' सेक्शन में जाकर कंपनी का नाम खोजना होगा। वहां संबंधित अदालती आदेश की प्रति डाउनलोड कर पूरी जानकारी ली जा सकती है। रेरा अधिकारियों के अनुसार यह कदम खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करेगा और ईमानदारी से काम कर रहे प्रमोटरों को बढ़त दिलाएगा।
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डिफॉल्टर सूची में प्रमुख नाम
रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी इस सूची में राज्य के कई बड़े रियल एस्टेट समूह शामिल हैं। जिन प्रमुख प्रमोटरों और कंपनियों के नाम तथा फोटो पोर्टल पर सार्वजनिक किए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से एफएस हाउसिंग, मोजिका रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स, विनायक बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, आस्था बिल्डहोम डेवलपर्स और रिको डेवलपर्स शामिल हैं।
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इन सभी बिल्डरों के खिलाफ रेरा कोर्ट में खरीदारों की शिकायतों के आधार पर सुनवाई हुई थी। आदेशों का पालन न करने और ग्राहकों के पैसे न लौटाने के कारण प्राधिकरण ने इन्हें औपचारिक रूप से डिफॉल्टर घोषित कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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दर्ज मामलों का विवरण और वर्गीकरण
सार्वजनिक किए गए 42 प्रोजेक्ट्स के मामलों का विस्तृत वर्गीकरण प्राधिकरण ने पोर्टल पर उपलब्ध कराया है। कुल मामलों में से 32 मामले खरीदारों को रेरा द्वारा तय की गई जुर्माने या रिफंड की राशि जमा न कराने से जुड़े हैं। चार मामलों में रेरा अधिनियम की धारा 34(सी) के प्रावधानों के तहत बिल्डर को डिफॉल्टर घोषित किया गया है।
तीन मामले रेरा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर जारी किए गए अंतिम आदेशों और निर्देशों की सरेआम अवहेलना करने से संबंधित हैं। इनके अतिरिक्त एक मामला तय समय-सीमा के भीतर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पूरा न करने और खरीदारों को पजेशन न देने का है, एक मामला संपत्तियों की कुर्की व बैंक खाते फ्रीज करने की कानूनी कार्रवाई का है और एक मामला वित्तीय गड़बड़ियों के चलते बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज करने से जुड़ा है।
खरीदारों के लिए जांच की प्रक्रिया
आमतौर पर मध्यमवर्गीय खरीदार फ्लैट या मकान खरीदते समय केवल प्रोजेक्ट की लोकेशन, आसपास के सड़क नेटवर्क, कीमत, स्विमिंग पूल या क्लब हाउस जैसी सुविधाओं पर ही ध्यान देते थे। बिल्डर का पिछला इतिहास जांचने की व्यवस्था न होने से पजेशन में देरी और कानूनी विवाद उत्पन्न होते थे।
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अब नया फ्लैट, विला या व्यावसायिक स्थान बुक करने से पहले ग्राहक रेरा के आधिकारिक पोर्टल rera.rajasthan.gov.in पर जाकर तीन आसान चरणों में पड़ताल कर सकते हैं। इसके लिए पोर्टल के होमपेज पर दिए गए 'प्रमोटर्स/प्रोजेक्ट्स' टैब के तहत 'डिफॉल्टर लिस्ट' या 'ऑर्डर्स एंड जजमेंट्स' सेक्शन में जाकर कंपनी का नाम खोजना होगा। वहां संबंधित अदालती आदेश की प्रति डाउनलोड कर पूरी जानकारी ली जा सकती है। रेरा अधिकारियों के अनुसार यह कदम खरीदारों के अधिकारों की रक्षा करेगा और ईमानदारी से काम कर रहे प्रमोटरों को बढ़त दिलाएगा।