जेल में बंद पिता और बेटे के संघर्ष की दास्तां, नम हो जाएंगी आंखें
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आईआईटी का रिजल्ट आने के बाद छात्रों की कामयाबी की एक से बढ़कर एक कहानियां आपने सुनी होंगी लेकिन उन कहानियों में असली किरदार वो छात्र ही रहते हैं जो अपनी मेहनत और समर्पण के बूते विषम परिस्थितियों में भी आईआईटी की राह तय करते हैं। लेकिन इस कहानी में असली किरदार वो पिता है जो जेल में रहकर भी अपने बेटे को आईआईटी में पहुंचाने के लिए जी तोड़ मेहनत करता रहा।
यहां तक की बेटे को जेल में अपने साथ रखा ताकि उसकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए, बाप बेटे की यह मेहनत सफल आई और बेटे ने आईआईटी का किला पहली बार में ही भेद डाला। खैर सुनने में यह कहानी थोड़ी अटपटी बेशक लग रही हो लेकिन मामला कुछ इस तरह का ही है।
बात शुरू होती है कोटा की एक जेल और उसकी 8*8 की कोठरी से, जहां फूलचंद मीणा हत्या के एक मामले में 14 साल की सजा काट रहे हैं। 12 साल की सजा पूरी हुई हो तो जेल प्रशासन ने उनके अच्छे आचरण को देखते हुए उन्हें ओपन जेल में शिफ्ट कर दिया। ओपन जेल के बारे में आपको बता दें कि ये वो जेल होती हैं जहां रहकर भी कैदी बाहर आ जाकर कुछ काम धंधा कर सकता है।
कैदी पिता ने बेटे को अपने साथ ओपन जेल में रखकर पढ़ाया
इसी जेल में रहते हुए फूलचंद बाहर आकर दिनभर एक दूकान पर मजदूरी करते हैं। उससे जो कमाई होती है उसे अपने बेटे पीयूष की पढ़ाई और आईआईटी की कोचिंग पर खर्च करते हैं। क्योंकि बेटे की हॉस्टल फीस वो दे नहीं सकते इसलिए जेल प्रशासन की अनुमति से बेटे को भी जेल की कोठरी में अपने साथ रखना शुरू कर दिया। बता दें कि फूलचंद मीणा कभी सरकारी शिक्षक रहे हैं लेकिन हत्या के एक मामले में नाम आने के कारण उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
बाप बेटे की मेहनत को देख जेल के अधिकारियों ने भी उनका पूरा समर्थन किया। फूलचंद बताते हैं कि रात को जब 11 बजे सारी कोठरियों की लाइट बुझा दी जाती थी तो पीयूष की पढ़ाई को देखते हुए उनकी कोठरी में उजाला कर दिया जाता था, जिससे वह देर रात तक पढ़ सके।
सुबह पिता जेल से फिर काम पर निकलते तो बेटे ऑटो पकड़कर आईआईटी की कोचिंग करने चला जाता। रिजल्ट आया तो उसकी 453वीं रैंक ने आईआईटी में उसका एडमिशन पक्का कर दिया। हालांकि फूलचंद के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह उसकी पढ़ाई और हॉस्टल का खर्च उठा सकें लेकिन उन्हें उम्मीद है कि रिश्तेदारों की मदद से वह यह काम कर पाएंगे।
बोला बेटा- अब दुनिया को बताऊंगा पिता ने उनके लिए क्या किया
वहीं पीयूष की सफलता से जेल प्रशासन भी उत्साहित है, कोटा जेल के सुपरिटेंडेंट शंकर सिंह ने कहा जेल प्रशासन अपने आप को गौरान्वित महसूस कर रहा है। हम कोशिश करेंगे दूसरे लोगों को भी इससे प्रेरणा मिल सके। वहीं दो साल बाद फूलचंद की सजा भी पूरी हो जाएगी, जिसके बाद वह बाहर आ सकेंगे।