Rajasthan Political Crisis: हाईकोर्ट नहीं रोक पाएगा स्पीकर को, खुद पार्टी छोड़ने पर भी दलबदल विरोधी कानून लागू

अजय सेतिया, जयपुर Updated Fri, 17 Jul 2020 05:38 AM IST
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डॉ सी पी जोशी
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राजस्थान विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी ने सचिन पायलट समेत उनके समर्थक 18 विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत नोटिस जारी कर दिया है , जिसे पायलट कैंप ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी है। आमतौर पर धारणा है कि दलबदल विरोधी कानून सिर्फ सदन में व्हिप का उल्लंघन पर ही लागू होता है। लेकिन यह सही नहीं है।
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अगर कोई विधायक या सांसद खुद अपनी पार्टी छोड़ता है, तब भी उस पर दलबदल विरोधी कानून लागू होता है। कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने इसी प्रावधान के तहत स्पीकर को चिठ्ठी लिखी थी कि इन  विधायकों ने खुद ही पार्टी छोड़ दी है, इसलिए इनकी सदस्यता समाप्त की जाए।
यहां दो सवाल पैदा होते हैं, पहला तो यह कि क्या यह विधायकों पर दबाव बनाने के लिए किया गया है, ताकि वे पायलट को छोड़ वापस उनके कैंप में लौट आएं या अशोक गहलोत जल्दी से जल्दी इन विधायकों की सदस्यता खत्म करना चाहते हैं।
पायलट पक्ष के वकील हरीश साल्वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के वकील हैं, लेकिन याचिका दायर करते समय शायद वह भूल गए कि कानून में अपने आप दल छोड़ने वालों पर भी दलबदल क़ानून लागू होता है। हालांकि अभी किसी भी विधायक ने कांग्रेस नहीं छोड़ी है।

लेकिन उनकी याचिका सदन से बाहर हुए घटनाक्रम पर स्पीकर के अधिकार को लेकर थी। जैसे ही गहलोत सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलबदल कानून के इस प्रावधान का जिक्र किया, साल्वे को एहसास हुआ कि कानून के इस प्रावधान को चुनौती दी जानी चाहिए, क्योंकि आगे जा कर गहलोत खेमा 18 विधायकों के खुद ही पार्टी छोड़ने को साबित करेगा।

स्पीकर को दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की याचिका देने वाले महेश जोशी ने केविएट लगा दी है कि फैसले से पहले उन्हें सुना जाए, अब जोशी कोर्ट में यही साबित करेंगे कि विधायक दल की बैठक में नहीं आने का सार्वजनिक एलान करके पायलट कैंप ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है।

अध्यक्ष के फैसले में कोर्ट को दखल का अधिकार नहीं 

स्पीकर के फैसले मंे कोर्ट को दखल देने का अधिकार नहीं है। उत्तराखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और मणिपुर समेत सभी मामलों में सुप्रीमकोर्ट का यही निर्णय रहा है। कोर्ट स्पीकर के फैसले की समीक्षा भी नहीं कर सकता। लेकिन 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त को समाप्त कर दिया, हालांकि, स्पीकर के आदेश देने तक न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

कर्नाटक मामले से बदली तस्वीर

हाल ही में दो बातें नई हुई हैं। कर्नाटक में स्पीकर ने कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के 17 विधायकों की सदस्यता रद्द कर उन्हें मौजूदा सदन के कार्यकाल तक चुनाव के अयोग्य ठहराया तो सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला बदलते हुए कहा कि स्पीकर विधायकों को सिर्फ अयोग्य ठहरा सकता है, लेकिन विधायकों के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगा सकते। दूसरा बदलाव यह हुआ है कि मणिपुर के मामले में कोर्ट ने स्पीकर को दलबदल पर चार हफ्ते में फैसला करने का निर्देश दिया है, हालांकि इसमें भी स्पीकर को बाध्य नहीं किया गया था।

चटर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का नोटिस तक नहीं लिया...

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