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राजस्थान निकाय चुनाव में बड़े उलटफेर: शुरुआती बढ़त के बाद कांग्रेस की वापसी, दिग्गजों के गढ़ में भाजपा को झटका
Mon, 14 Sep 2026 11:19 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:19 PM IST
सार
राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों में कई शहरों में भाजपा की शुरुआती बढ़त के बाद कांग्रेस ने वापसी की। अजमेर, पाली, बीकानेर और झालावाड़ में कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत रहा, जबकि उदयपुर और भीलवाड़ा में भाजपा ने बहुमत हासिल किया। जयपुर और जोधपुर समेत कई जगह निर्दलीयों ने भी चुनावी समीकरण बदले।
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राजस्थान निकाय चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान के 10 नगर निगमों की मतगणना के बीच सामने आ रहे नतीजों ने शहरी राजनीति की तस्वीर बदल दी है। शुरुआती रुझानों में बढ़त बनाती दिख रही भाजपा को बाद के रुझानों में कांग्रेस ने कई जगह कड़ी चुनौती दी। अजमेर, पाली और बीकानेर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। वहीं भाजपा ने उदयपुर और भीलवाड़ा में बहुमत हासिल कर लिया है। अलवर, कोटा और जयपुर में भाजपा सबसे आगे है, जबकि जोधपुर में दोनों प्रमुख दलों के बीच कांटे का मुकाबला चल रहा है। भरतपुर में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बढ़त बना रखी है।
कई शहरों में बदला चुनावी गणित
इन नतीजों का सबसे बड़ा संकेत यह है कि इस बार कई शहरों में चुनाव सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रहा। स्थानीय चेहरे, बागी उम्मीदवार और निर्दलीयों ने कई वार्डों में पूरा चुनावी गणित बदल दिया। यही वजह है कि कई जगह किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर नहीं आया।
राव राजेंद्र सिंह के प्रभाव वाले इलाके में भाजपा को झटका
जयपुर के नतीजों में भाजपा के लिए एक बड़ा झटका जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेंद्र सिंह के प्रभाव वाले वार्ड में सामने आया है। यहां भाजपा प्रत्याशी को हार मिली है। चुनाव से पहले इस क्षेत्र के परिसीमन को लेकर भी चर्चा रही थी। ऐसे में सांसद के प्रभाव वाले इलाके में भाजपा की हार ने स्थानीय राजनीति में सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जोधपुर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष हारे
जोधपुर में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के शहर जिलाध्यक्ष को भाजपा के मेघराज लोहिया ने हरा दिया। लोहिया पूर्व राज्यमंत्री रह चुके हैं। जोधपुर में 71.95 फीसदी मतदान हुआ था। इसके बावजूद मुकाबला किसी एक दल के पक्ष में जाता नजर नहीं आ रहा। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर बनी हुई है। ऐसे में बाकी वार्डों के नतीजे बोर्ड गठन के लिए बेहद अहम होंगे।
सुनील कोठारी की जीत से मेयर की रेस तेज
जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी ने वार्ड 112 से जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने 905 वोट के अंतर से चुनाव जीता। कोठारी को मेयर पद के प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा है। भाजपा ने उन्हें निवर्तमान मेयर कुसुम यादव का टिकट काटकर मैदान में उतारा था। वार्ड जीतने के बाद अब मेयर पद की दौड़ में कोठारी की दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है।
गजनफर अली की रिकॉर्ड जीत
जयपुर के वार्ड 113 में कांग्रेस के गजनफर अली ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने 10,014 वोट के अंतर से चुनाव जीता। यहां भाजपा प्रत्याशी फरीद्दुदीन जैकी की जमानत भी जब्त हो गई। यह नतीजा जयपुर में कांग्रेस के कुछ इलाकों में मजबूत पकड़ की ओर इशारा करता है।
पांच वोट से कांता देवी ने जीता वार्ड
जयपुर के वार्ड 124 में मुकाबला बेहद करीबी रहा। कांग्रेस की कांता देवी ने महज पांच वोट से जीत दर्ज की। यानी जहां वार्ड 113 में जीत का अंतर 10 हजार से ज्यादा रहा, वहीं वार्ड 124 में फैसला सिर्फ पांच वोट से हुआ।
21 साल के फैज हसन ने मारी बाजी
वार्ड 71 का नतीजा भी खास रहा। कांग्रेस के 21 वर्षीय फैज हसन ने जीत दर्ज की। इस जीत के साथ जयपुर नगर निगम में युवा चेहरे की एंट्री हुई है। यहां निर्दलीय प्रत्याशी दूसरे और भाजपा उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा। यह नतीजा भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा के सामने कई वार्डों में कांग्रेस के अलावा निर्दलीयों ने भी मजबूत चुनौती पेश की है।
निर्दलीयों ने बिगाड़ा समीकरण
जयपुर में निर्दलीयों का प्रदर्शन भी भाजपा और कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बना है। वार्ड 35 में निर्दलीय अमरचंद कुमार ने भाजपा प्रत्याशी को 1,461 वोट से हराया। वहीं वार्ड 61 में निर्दलीय मुकेश कुमार मीणा ने भाजपा उम्मीदवार को 606 वोट से शिकस्त दी। इन नतीजों से साफ है कि कई वार्डों में मुकाबला पार्टी के चुनाव चिह्न से ज्यादा स्थानीय समीकरणों पर टिका रहा।
उदयपुर में भाजपा का बहुमत
उदयपुर में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। हालांकि कांग्रेस ने भी कुछ वार्डों में अपनी पकड़ बनाए रखी। वार्ड 17 से कांग्रेस शहर अध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ की पत्नी पूनम कंवर ने जीत दर्ज की। वहीं वार्ड 5 से पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के दामाद के भाई आकाश वागरेचा चुनाव जीत गए हैं।
अजमेर में कांग्रेस का बड़ा उलटफेर
अजमेर का नतीजा कांग्रेस के लिए सबसे अहम माना जा रहा है। शुरुआती रुझानों में भाजपा के आगे रहने के बाद कांग्रेस ने वापसी की और अब वह सबसे बड़ी पार्टी की स्थिति में है। अजमेर को भाजपा के मजबूत शहरी क्षेत्रों में माना जाता रहा है। ऐसे में कांग्रेस का यहां सबसे बड़ी पार्टी बनना स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 36 साल बाद कांग्रेस के बहुमत में आने का दावा भी किया जा रहा है, हालांकि अंतिम बोर्ड गठन की तस्वीर सभी परिणाम आने के बाद ही साफ होगी।
पाली में पहली बार निगम चुनाव
पाली में नगर निगम बनने के बाद पहली बार निगम चुनाव हुए हैं। यहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। भाजपा बहुमत से दूर है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण हो सकती है।
भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा
भरतपुर में इस चुनाव ने भाजपा-कांग्रेस दोनों को पीछे छोड़ते हुए अलग तस्वीर पेश की है। यहां निर्दलीय प्रत्याशी सबसे आगे चल रहे हैं। अगर अंतिम नतीजों में भी यही स्थिति बनी रहती है तो बोर्ड बनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों को निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ सकता है। भरतपुर में 73.68 फीसदी मतदान हुआ था, जो 10 नगर निगमों में सबसे अधिक रहा।
झालावाड़ में भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की सेंध
झालावाड़ नगर परिषद का नतीजा कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त माना जा रहा है। कुल 45 वार्डों में कांग्रेस ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा को 13 सीटें मिलीं, जबकि दो वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए। एक वार्ड में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद समर्थकों ने जश्न शुरू कर दिया। झालावाड़ का नतीजा इसलिए भी अहम है क्योंकि इसे भाजपा के मजबूत प्रभाव वाले इलाके के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में कांग्रेस की 29 सीटों की जीत स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर मानी जा रही है।
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कई शहरों में बदला चुनावी गणित
इन नतीजों का सबसे बड़ा संकेत यह है कि इस बार कई शहरों में चुनाव सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रहा। स्थानीय चेहरे, बागी उम्मीदवार और निर्दलीयों ने कई वार्डों में पूरा चुनावी गणित बदल दिया। यही वजह है कि कई जगह किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर नहीं आया।
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राव राजेंद्र सिंह के प्रभाव वाले इलाके में भाजपा को झटका
जयपुर के नतीजों में भाजपा के लिए एक बड़ा झटका जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेंद्र सिंह के प्रभाव वाले वार्ड में सामने आया है। यहां भाजपा प्रत्याशी को हार मिली है। चुनाव से पहले इस क्षेत्र के परिसीमन को लेकर भी चर्चा रही थी। ऐसे में सांसद के प्रभाव वाले इलाके में भाजपा की हार ने स्थानीय राजनीति में सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जोधपुर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष हारे
जोधपुर में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के शहर जिलाध्यक्ष को भाजपा के मेघराज लोहिया ने हरा दिया। लोहिया पूर्व राज्यमंत्री रह चुके हैं। जोधपुर में 71.95 फीसदी मतदान हुआ था। इसके बावजूद मुकाबला किसी एक दल के पक्ष में जाता नजर नहीं आ रहा। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर बनी हुई है। ऐसे में बाकी वार्डों के नतीजे बोर्ड गठन के लिए बेहद अहम होंगे।
सुनील कोठारी की जीत से मेयर की रेस तेज
जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी ने वार्ड 112 से जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने 905 वोट के अंतर से चुनाव जीता। कोठारी को मेयर पद के प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा है। भाजपा ने उन्हें निवर्तमान मेयर कुसुम यादव का टिकट काटकर मैदान में उतारा था। वार्ड जीतने के बाद अब मेयर पद की दौड़ में कोठारी की दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है।
गजनफर अली की रिकॉर्ड जीत
जयपुर के वार्ड 113 में कांग्रेस के गजनफर अली ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने 10,014 वोट के अंतर से चुनाव जीता। यहां भाजपा प्रत्याशी फरीद्दुदीन जैकी की जमानत भी जब्त हो गई। यह नतीजा जयपुर में कांग्रेस के कुछ इलाकों में मजबूत पकड़ की ओर इशारा करता है।
पांच वोट से कांता देवी ने जीता वार्ड
जयपुर के वार्ड 124 में मुकाबला बेहद करीबी रहा। कांग्रेस की कांता देवी ने महज पांच वोट से जीत दर्ज की। यानी जहां वार्ड 113 में जीत का अंतर 10 हजार से ज्यादा रहा, वहीं वार्ड 124 में फैसला सिर्फ पांच वोट से हुआ।
21 साल के फैज हसन ने मारी बाजी
वार्ड 71 का नतीजा भी खास रहा। कांग्रेस के 21 वर्षीय फैज हसन ने जीत दर्ज की। इस जीत के साथ जयपुर नगर निगम में युवा चेहरे की एंट्री हुई है। यहां निर्दलीय प्रत्याशी दूसरे और भाजपा उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा। यह नतीजा भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा के सामने कई वार्डों में कांग्रेस के अलावा निर्दलीयों ने भी मजबूत चुनौती पेश की है।
निर्दलीयों ने बिगाड़ा समीकरण
जयपुर में निर्दलीयों का प्रदर्शन भी भाजपा और कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बना है। वार्ड 35 में निर्दलीय अमरचंद कुमार ने भाजपा प्रत्याशी को 1,461 वोट से हराया। वहीं वार्ड 61 में निर्दलीय मुकेश कुमार मीणा ने भाजपा उम्मीदवार को 606 वोट से शिकस्त दी। इन नतीजों से साफ है कि कई वार्डों में मुकाबला पार्टी के चुनाव चिह्न से ज्यादा स्थानीय समीकरणों पर टिका रहा।
उदयपुर में भाजपा का बहुमत
उदयपुर में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। हालांकि कांग्रेस ने भी कुछ वार्डों में अपनी पकड़ बनाए रखी। वार्ड 17 से कांग्रेस शहर अध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ की पत्नी पूनम कंवर ने जीत दर्ज की। वहीं वार्ड 5 से पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के दामाद के भाई आकाश वागरेचा चुनाव जीत गए हैं।
अजमेर में कांग्रेस का बड़ा उलटफेर
अजमेर का नतीजा कांग्रेस के लिए सबसे अहम माना जा रहा है। शुरुआती रुझानों में भाजपा के आगे रहने के बाद कांग्रेस ने वापसी की और अब वह सबसे बड़ी पार्टी की स्थिति में है। अजमेर को भाजपा के मजबूत शहरी क्षेत्रों में माना जाता रहा है। ऐसे में कांग्रेस का यहां सबसे बड़ी पार्टी बनना स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 36 साल बाद कांग्रेस के बहुमत में आने का दावा भी किया जा रहा है, हालांकि अंतिम बोर्ड गठन की तस्वीर सभी परिणाम आने के बाद ही साफ होगी।
पाली में पहली बार निगम चुनाव
पाली में नगर निगम बनने के बाद पहली बार निगम चुनाव हुए हैं। यहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। भाजपा बहुमत से दूर है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण हो सकती है।
भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा
भरतपुर में इस चुनाव ने भाजपा-कांग्रेस दोनों को पीछे छोड़ते हुए अलग तस्वीर पेश की है। यहां निर्दलीय प्रत्याशी सबसे आगे चल रहे हैं। अगर अंतिम नतीजों में भी यही स्थिति बनी रहती है तो बोर्ड बनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों को निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ सकता है। भरतपुर में 73.68 फीसदी मतदान हुआ था, जो 10 नगर निगमों में सबसे अधिक रहा।
झालावाड़ में भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की सेंध
झालावाड़ नगर परिषद का नतीजा कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त माना जा रहा है। कुल 45 वार्डों में कांग्रेस ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा को 13 सीटें मिलीं, जबकि दो वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए। एक वार्ड में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद समर्थकों ने जश्न शुरू कर दिया। झालावाड़ का नतीजा इसलिए भी अहम है क्योंकि इसे भाजपा के मजबूत प्रभाव वाले इलाके के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में कांग्रेस की 29 सीटों की जीत स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर मानी जा रही है।