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राजस्थान: सैनिक की विधवा को 30 साल पहले आवंटित हुई थी जमीन, पर सरकार ने देने से मना किया, अब हाईकोर्ट ने कही यह बात

Wed, 19 Jan 2022 04:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 19 Jan 2022 04:58 PM IST
सार

याचिकाकर्ता ने अपने वकील देवकी नंदन व्यास के जरिए कोर्ट को बताया कि उनके पति ने 1965 और 1971-72 के युद्ध में भी हिस्सा लिया था और उन्हें रक्षक मेडल से लेकर समर सेवा स्टार और संग्राम मेडल जैसे सम्मान मिले थे।

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Rajasthan High Court asks Government to give possession of land allotted 30 years ago to soldiers widow in two weeks news and updates
राजस्थान हाईकोर्ट

विस्तार

राजस्थान में सरकार के ढीले रवैये की एक और मिसाल देखने को मिली है। दरअसल, यहां 30 साल पहले सड़क हादसे में मारे गए एक सैनिक की विधवा को जमीन आवंटित हुई थी। हालांकि, सरकार ने अब तक महिला को जमीन पर कब्जा नहीं दिया। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और महिला को दो हफ्ते के अंदर जमीन सौंपने का आदेश दिया है। 
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राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस दिनेश मेहता की बेंच ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई की। जज ने सरकार को निर्देश दिए कि अगर महिला को पहले आवंटित की गई जमीन नहीं दी जा सकती, तो उसे किसी और सही जमीन पर कब्जा दिया जाए। 
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बेंच ने पाली के जिलाधिकारी और बाली संभाग के एसडीएम को यह निर्देश दिवंगत सैनिक हरी सिंह की विधवा लाहर कंवर की याचिका पर दिए। लाहर ने अपने वकील देवकी नंदन व्यास के जरिए कोर्ट को बताया कि उनके पति ने 1965 और 1971-72 के युद्ध में भी हिस्सा लिया था और उन्हें रक्षक मेडल से लेकर समर सेवा स्टार और संग्राम मेडल जैसे सम्मान मिले थे।
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कंवर ने बताया कि उनके पति की 1983 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। ऐसे में सरकार ने 1991 में युद्ध के नायक रहे सैनिक की विधवा को बाली सब-डिविजन के संदेराव में दो हेक्टेयर जमीन आवंटित की थी। कोर्ट को बताया गया कि सैनिक की विधवा को इस जमीन पर कब्जा कभी नहीं मिला और वे कब्जे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। 
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