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नि:शक्तों को सरकारी नौकरी में आरक्षण की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला, जयपुर
Updated Tue, 21 Oct 2014 07:55 PM IST
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राजस्थान में सरकारी नौकरियों में नि:शक्तों को अब 3 की जगह 5 प्रतिशत आरक्षण देने की तैयारी है। प्रस्तावित नि:शक्तजन अधिकार विधेयक में ये प्रावधान किया गया है।
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विधेयक के प्रारूप पर संसदीय समिति ने आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। समिति जल्द ही अपनी सिफारिशों पर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। प्रस्तावित विधेयक के प्रावधान के तहत शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश पाने के लिए भी नि:शक्तों को 3 से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कोटा आरक्षित रखा जाएगा।
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विधेयक में 5 श्रेणियों में आरक्षण दिया जाएगा, जिसमें पूरी तरह नहीं देख सकने वाले या कम दृष्टि वाले, सुनने व बोलने में परेशानी महसूस करने वाले, चलने में अशक्त, कुष्ट रोगी, सेरेब्रल पॉल्सी वाले, ऑटिज्म, बौद्धिक नि:शक्तता व मानसिक रूग्णता वाले तथा बहुनि:शक्तता वाले शामिल किए गए हैं।
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अपमान किया तो होगी जेल
नि:शक्तों का सार्वजनिक तौर पर अपमान करनेवालों की अब खैर नहीं होगी। प्रस्तावित विधेयक में अपमानित, प्रताड़ित, भेदभाव, यौन उत्पीडऩ या नि:शक्त महिला का जबरन गर्भपात करने पर 6 माह से 5 साल तक सजा का प्रावधान किया गया है।
यही नहीं, नि:शक्त के नाम पर गलत फायदा उठाने पर दो साल की सजा या एक लाख रुपए तक जुर्माना भी भुगतना पड़ सकता है।
ये भी हैं मुख्य प्रावधान...
- विधेयक में नि:शक्तों के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र व राज्य स्तर पर आयोग
- कानून का पालन नहीं होने पर सजा के लिए विशेष कोर्ट, उन्हीं में सुनवाई
- सार्वजनिक भवनों में रैम्प निर्माण प्रावधानों की कड़ाई से पालना
- स्कूलों में खेलकूद के लिए आवश्यक सुविधाएं, भवन में आसानी से प्रवेश, ब्रेल और साइन भाषा में प्रशिक्षित शिक्षक, छात्रवृत्ति
- स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण व अन्य सहयोग
- नि:शक्तों को पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, मुफ्त इलाज तथा नि:शक्त कर्मचारियों के लिए बीमा योजना आदि के लिए अलग से बजट।
पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त खल्लीमल जैन ने बताया कि विधेयक में समय की मांग के अनुसार प्रावधान किए गए हैं। ध्यान रखा है कि नि:शक्त समाज में पिछड़ न जाएं।