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Rajasthan: ‘RTH’ को लेकर राज्य सरकार-डॉक्टर्स में सहमति, गहलोत बोले-चिकित्सकों की जनहितैषी कानून पर सहमति सुखद

Tue, 04 Apr 2023 04:03 PM IST
नीरज शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: नीरज शर्मा Updated Tue, 04 Apr 2023 04:03 PM IST
सार

सीएम अशोक गहलोत ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में कष्ट नहीं पाए, इस सोच से सरकार RTH लेकर आई है। यह खुशी की बात है कि राज्य सरकार द्वारा राइट टू हेल्थ बिल के संबंध में चिकित्सकों के समक्ष रखे गए प्रस्ताव पर सहमति बनी है।

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Rajasthan: Gehlot government-doctors Mou on RTH bill, CM Appraised
RTH पर राज्य सरकार-डॉक्टर्स में सहमति, गहलोत बोले-चिकित्सकों का जनहितैषी कानून पर सहमत होना सुखद - फोटो : फाइल फोटो।

विस्तार

सीएम गहलोत ने कहा कि इससे राजस्थान ‘राइट टू हैल्थ’ लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा। सभी प्रदेशवासियों ने RTH बिल के पक्ष में राज्य सरकार का सहयोग किया और आगे बढ़कर इस जनहितैषी बिल का स्वागत किया है। अब चिकित्सकों की भी इस महत्वपूर्ण बिल पर सहमति बनना सुखद संकेत है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि सभी चिकित्सक तुरंत प्रभाव से काम पर वापस लौटेंगे और स्वास्थ्य का अधिकार, मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना और आरजीएचएस जैसी योजनाओं को सरकारी- निजी अस्पताल मिलकर सफल बनाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निजी और सरकारी अस्पतालों ने जिस तरह कोविड का बेहतरीन प्रबंधन कर मिसाल कायम की, उसी तरह इन योजनाओं को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू कर ‘‘राजस्थान मॉडल ऑफ पब्लिक हेल्थ‘‘ पेश करेंगे।
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मुख्य सचिव निवास पर बनी सहमति

इससे पहले मंगलवार को राज्य सरकार और चिकित्सकों के बीच ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ बिल को लेकर सहमति बनी। मुख्य सचिव निवास पर प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा शिक्षा  टी. रविकांत और आईएमए, उपचार और पीएचएनएस के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई, जिसमें विभिन्न बिंदुओं पर दोनों पक्षों की ओर से सहमति व्यक्त की गई। समझौतेे के अनुसार ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ लागू करने के प्रथम चरण में 50 बेड से कम के निजी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। जिन निजी अस्पतालों ने सरकार से कोई रियायत नहीं ली है या अस्पताल के भू-आंवटन में कोई छूट नहीं ली है, उन पर भी इस कानून की बाध्यता नहीं होगी। समझौते के मुताबिक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल्स, पीपीपी मोड पर संचालित अस्पताल, निःशुल्क या अनुदानित दरों पर भू-आवंटन वाले अस्पताल, ट्रस्ट के संचालित वे अस्पताल जिन्हें रियायती या अनुदानित दरों पर भूखण्ड प्राप्त हुए हैं, इन सभी अस्पतालों पर यह कानून लागू होगा। समझौते में इस बिंदु पर भी सहमति व्यक्त की गई कि प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर चल रहे अस्पतालों का ‘‘कोटा मॉडल‘‘ की तर्ज पर नियमितीकरण करने पर विचार किया जाएगा। कोटा मॉडल के तहत उन अस्पतालों के भवनों को नियमों में शिथिलता प्रदान कर नियमित करने पर विचार किया जाएगा, जो आवासीय परिसर में चल रहे हैं।
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आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस और अन्य केस वापस लिए जाएंगे

समझौते के अनुसार आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस और अन्य केस वापस लिए जाएंगे। निजी अस्पतालों को लाइसेंस और अन्य स्वीकृतियां जारी करने के लिए सिंगल विण्डो सिस्टम लाए जाने पर विचार किया जाएगा। निजी अस्पतालों को फायर एनओसी प्रत्येक पांच साल में देने के बिंदु पर विचार किया जाएगा। साथ ही यह भी सहमति व्यक्त की गई कि भविष्य में स्वास्थ्य के अधिकार कानून से संबंधित नियमों में बदलाव आईएमए के प्रतिनिधियों से चर्चा कर किया जाएगा।
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