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राजस्थान चुनाव : कभी एक वोट से हारे दिग्गज नेता डॉ. सीपी जोशी इस बार एक एक वोट बटोरने में जुटे
विनोद अग्निहोत्री, नाथद्वारा
Updated Tue, 04 Dec 2018 10:10 AM IST
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डॉ. सी पी जोशी
- फोटो : Twitter @drcpjoshi
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दस साल पहले महज एक वोट से चुनाव हारकर मुख्यमंत्री बनने से चूक गए दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी एक बार फिर श्रीनाथ जी (भगवान श्रीकृष्ण) की नगरी नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र से मैदान में हैं और कभी कांग्रेस में अपने सिपहसालार रहे महेश प्रताप सिंह से ही जूझ रहे हैं, जो भाजपा के टिकट पर अपने गुरु को चुनौती दे रहे हैं। हालाकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पूरी उम्मीद है कि इस बार भगवान श्रीनाथ जी का आशीर्वाद नाथद्वारा के इस बेटे को जरूर मिलेगा और श्रीनाथ जी कृपा से सीपी जोशी राजस्थान में सबसे ज्यादा मतों के अंतर से जीतेंगे।
जोशी के पक्ष में 2008 में उनका एक मत से हार जाने को लेकर उपजी सहानुभूति और अगर सूबे में कांग्रेस सरकार बनी और जोशी के भाग्य से अशोक गहलौत सचिन पायलट के झगड़े का छींका अगर टूट गया तो मुख्यमंत्री की कुर्सी भी नाथद्वारा के प्रतिनिधि के हिस्से आ सकती है, की उम्मीद उनकी ताकत है, लेकिन क्या इससे जोशी की नैया पार लग सकेगी, इसका जवाब मतगणना से ही मिलेगा। इसीलिए कभी एक वोट से हारे जोशी अब एक एक वोट बटोरने के लिए नाथद्वारा की गलियों में घूम रहे हैं।
तीर्थनगरी नाथद्वारा में लोगों से बात करने पर यह बात सामने आती है कि यहां के ज्यादातर लोगों को लगता है कि 2008 में जो गलती हो गई, उसे इस बार नहीं दोहराना है। श्रीनाथ जी के मंदिर के बाहर निकलते ही रमेश कुमार मिलते हैं। पूछने पर कहते हैं कि सीपी जोशी अगर राजस्थान में सबसे ज्यादा वोटों से जीते और अशोक गहलौत मारवाड़ से उतने विधायक नहीं जिता सके जितने कि सीपी जोशी मेवाड़ से जिता लाएंगे और सचिन पायलट की जीत का अंतर जोशी और गहलौत से कम रह गया तो कांग्रेस हाईकमान को भी गहलौत और पायलट की जगह जोशी को मुख्यमंत्री बनाने के बारे में सोचना पड़ सकता है। जोशी को लेकर लगभग यही उम्मीद नाथद्वारा शहर और उसके बाहर के गावों में भी दिखाई दे रही है।
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नाथद्वारा से उदयपुर के रास्ते पर बिलोता गांव में बीमा का काम करने वाले लक्षमण दास मिलते हैं। चुनाव के बारे में पूछने पर पहले तो जोशी और महेश प्रताप सिंह के बीच कांटे का मुकाबला बताते हैं। फिर थोड़ा खुलते हैं और कहते हैं कि जोशी का पलड़ा भारी है। कुछ और कुरेदने पर और ज्यादा खुलते हैं और बताते हैं कि वह खुद तो भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता हैं, लेकिन इस बार जोशी को वोट देंगे क्योंकि शायद उनके एक वोट से जोशी के लिए जयपुर में मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता आसान हो जाए।
रमेश के साथ ही खड़े पूछने पर भी अपना नाम न बताने वाले युवक का कहना था कि जोशी बड़े नेता हैं और उनके पास विकास की एक दृष्टि है। फिर उन्होंने अपने पुराने कार्यकाल में नाथद्वारा के लिए काफी काम किया है। लेकिन 2008 के चुनाव के बाद जोशी यहां से रूठ गए और क्षेत्र पिछड़ गया। अब वह फिर आए हैं तो हम उन्हें निराश नहीं करेंगे।
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जोशी के पक्ष में 2008 में उनका एक मत से हार जाने को लेकर उपजी सहानुभूति और अगर सूबे में कांग्रेस सरकार बनी और जोशी के भाग्य से अशोक गहलौत सचिन पायलट के झगड़े का छींका अगर टूट गया तो मुख्यमंत्री की कुर्सी भी नाथद्वारा के प्रतिनिधि के हिस्से आ सकती है, की उम्मीद उनकी ताकत है, लेकिन क्या इससे जोशी की नैया पार लग सकेगी, इसका जवाब मतगणना से ही मिलेगा। इसीलिए कभी एक वोट से हारे जोशी अब एक एक वोट बटोरने के लिए नाथद्वारा की गलियों में घूम रहे हैं।
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तीर्थनगरी नाथद्वारा में लोगों से बात करने पर यह बात सामने आती है कि यहां के ज्यादातर लोगों को लगता है कि 2008 में जो गलती हो गई, उसे इस बार नहीं दोहराना है। श्रीनाथ जी के मंदिर के बाहर निकलते ही रमेश कुमार मिलते हैं। पूछने पर कहते हैं कि सीपी जोशी अगर राजस्थान में सबसे ज्यादा वोटों से जीते और अशोक गहलौत मारवाड़ से उतने विधायक नहीं जिता सके जितने कि सीपी जोशी मेवाड़ से जिता लाएंगे और सचिन पायलट की जीत का अंतर जोशी और गहलौत से कम रह गया तो कांग्रेस हाईकमान को भी गहलौत और पायलट की जगह जोशी को मुख्यमंत्री बनाने के बारे में सोचना पड़ सकता है। जोशी को लेकर लगभग यही उम्मीद नाथद्वारा शहर और उसके बाहर के गावों में भी दिखाई दे रही है।
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नाथद्वारा से उदयपुर के रास्ते पर बिलोता गांव में बीमा का काम करने वाले लक्षमण दास मिलते हैं। चुनाव के बारे में पूछने पर पहले तो जोशी और महेश प्रताप सिंह के बीच कांटे का मुकाबला बताते हैं। फिर थोड़ा खुलते हैं और कहते हैं कि जोशी का पलड़ा भारी है। कुछ और कुरेदने पर और ज्यादा खुलते हैं और बताते हैं कि वह खुद तो भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता हैं, लेकिन इस बार जोशी को वोट देंगे क्योंकि शायद उनके एक वोट से जोशी के लिए जयपुर में मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता आसान हो जाए।
रमेश के साथ ही खड़े पूछने पर भी अपना नाम न बताने वाले युवक का कहना था कि जोशी बड़े नेता हैं और उनके पास विकास की एक दृष्टि है। फिर उन्होंने अपने पुराने कार्यकाल में नाथद्वारा के लिए काफी काम किया है। लेकिन 2008 के चुनाव के बाद जोशी यहां से रूठ गए और क्षेत्र पिछड़ गया। अब वह फिर आए हैं तो हम उन्हें निराश नहीं करेंगे।
नाथद्वारा मुख्यमंत्री के दावेदार को चुनाव जिताएगा या सिर्फ एक विधायक चुनेगा
डॉ सीपी जोशी
पूर्व पत्रकार और अब जोशी के चुनाव प्रचार में लगे भगवती श्रीमाली कहते हैं कि महेश प्रताप सिंह सीपी जोशी के पुराने भरोसेमंद रहे हैं। जब जोशी की जगह कांग्रेस किसी और को लड़ा रही थी, तब नाराज होकर वह भाजपा में चले गए और उनको टिकट मिल गया। बाद में कांग्रेस ने जोशी को मैदान में उतार दिया। अब मजबूरी में महेश को अपने पुराने वरिष्ठ नेता के खिलाफ चुनाव लड़ना पड़ रहा है।
हालांकि खुद सीपी जोशी इसे महज संयोग मानते हैं। बीच चुनाव प्रचार में अमर उजाला से बात करते हुए वह कहते हैं कि महेश प्रताप सिंह कांग्रेस में आने से पहले भी भाजपा में ही थे। अब फिर अपनी मूल पार्टी में लौट गए हैं। श्रीनाथ मंदिर के पुजारी पंडित मनीष त्रिपाठी और वोरा मुस्लिम समाज कमेटी के पूर्व सचिव जुल्फिकार की राय है कि यह नाथद्वारा के लोगों को तय करना होगा कि वह मुख्यमंत्री के दावेदार को चुनाव में जिताते हैं या सिर्फ एक विधायक चुनते हैं।
नाथद्वारा शहर की एक तंग गली में खड़े कुछ युवकों को इस बात का मलाल है कि सीपी जोशी जैसे नेता को भी वोटों के लिए गली गली घूमना पड़ रहा है। जबकि उन्हें तो मेवाड़ और राजस्थान के दूसरे हिस्सों में पार्टी के उम्मीदवारों को जिताने के लिए घूमना चाहिए था। इनमें से एक शकील का कहना था कि शायद 2008 में एक वोट की हार के दूध से जले जोशी इस बार चुनावी छाछ को गलियों में घूम-घूम कर फूंक-फूंक कर पी रहे हैं।
हालांकि खुद सीपी जोशी इसे महज संयोग मानते हैं। बीच चुनाव प्रचार में अमर उजाला से बात करते हुए वह कहते हैं कि महेश प्रताप सिंह कांग्रेस में आने से पहले भी भाजपा में ही थे। अब फिर अपनी मूल पार्टी में लौट गए हैं। श्रीनाथ मंदिर के पुजारी पंडित मनीष त्रिपाठी और वोरा मुस्लिम समाज कमेटी के पूर्व सचिव जुल्फिकार की राय है कि यह नाथद्वारा के लोगों को तय करना होगा कि वह मुख्यमंत्री के दावेदार को चुनाव में जिताते हैं या सिर्फ एक विधायक चुनते हैं।
नाथद्वारा शहर की एक तंग गली में खड़े कुछ युवकों को इस बात का मलाल है कि सीपी जोशी जैसे नेता को भी वोटों के लिए गली गली घूमना पड़ रहा है। जबकि उन्हें तो मेवाड़ और राजस्थान के दूसरे हिस्सों में पार्टी के उम्मीदवारों को जिताने के लिए घूमना चाहिए था। इनमें से एक शकील का कहना था कि शायद 2008 में एक वोट की हार के दूध से जले जोशी इस बार चुनावी छाछ को गलियों में घूम-घूम कर फूंक-फूंक कर पी रहे हैं।