Jaipur: बीजेपी में एकमत नहीं, बलजीत यादव को पूनिया ने दिया समर्थन तो रामलाल शर्मा ने बताया सहानूभूति का हथकंडा
विधायक बलजीत यादव के विरोध को लेकर राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और प्रवक्ता दोनों ने अपने अलग-अलग विचार व्यक्त किए हैं। जिसे देखकर पार्टी में अंतर्कलह होने के बात जाहिर हो रही है।
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निर्दलीय विधायक बलजीत यादव ने अपनी मांग मनाने के लिए जयपुर सेंट्रल पार्क में दौड़ लगाई। विधायक रीट परीक्षा में धांधली के मास्टरमाइंड की स्ट्रांग रूम में ड्यूटी लगाने और गुरुकुल यूनिवर्सिटी का बिल वापस लेने को लेकर अनोखा प्रदर्शन किया। उनसे मिलने सतीश पूनिया भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने विधायक के विरोध को सराहा था और समर्थन की बात भी कही थी लेकिन अब रामलाल शर्मा ने पूनिया के बयान से ठीक उल्टा बयान दिया है। विधायक ने इसे सहानूभूति के लिए अपनाया जाने वाला हथकंडा बताया है।
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक रामलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान के कई विधायक ऐसे हैं, जो सरकार का समर्थन दे रहे हैं। मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए या अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए सरकार का समर्थन देते हैं। समय रहते अगर विधायक मुखर होकर सरकार के सामने बात रखते कि 26 लाख परिवार रीट परीक्षा से प्रभावित हुए हैं तो मेरे ख्याल से सरकार गंभीरता से लेती। उस समय उनकी समस्या का समाधान करती और सीबीआई से जांच भी होती और जो दोषी व्यक्ति है वो सलाखों के पीछे होते, लेकिन कमजोर कानून व्यवस्था की वजह से एसओजी ने अपराधियों को गिरफ्तार भी किया और वो सारे के सारे अपराधी जमानत पर बाहर भी आ चुके हैं।
समय पर मांग करते तो हो सकता है बात गंभीरता से ली जाती
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अब तत्काल समय में समर्थन देने वाला एक विधायक अपनी सहानुभूति बटोरने के लिए किस किस तरीके के हथकंडे अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कुछ समय बाद और भी कई विधायक कहेंगे कि हम तो सरकार के पक्ष में थे ही नहीं लेकिन जब आपका स्वार्थ था, तब सरकार के साथ खड़े थे। उस समय अगर मुखर होकर आवाज बुलंद करते तो आपके पैरों के ऊपर जो सरकार टिकी हुई थी, हो सकता है कि आपकी बात को गंभीरता से लिया जाता।
दोहरा चरित्र राजनीति के अंदर कतई ठीक नहीं
रामलाल शर्मा ने कहा कि आज आप जो मांग कर रहे हो कि परीक्षा में भ्रष्टाचार हुआ या नहीं हुआ। जो बत्ती लाल मीणा अभी भी इस तरीके से गलत कृत्यों के अंदर शामिल है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी। उस समय मेरे ख्याल से सरकार को कार्रवाई करनी पड़ती लेकिन तत्काल समय में आपके स्वार्थो की राजनीति हावी थी और अब देख दिखावा और लोकलुभावना कृत्य कर रहे हो, जो उचित नहीं है। दोहरा चरित्र राजनीति के अंदर कोई भी अपनाएं वह कतई ठीक नहीं है।