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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: सरदारपुरा में कायम रह पाएगी अशोक गहलोत की सरदारी?
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 03 Dec 2018 02:10 PM IST
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अशोक गहलोत
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राजस्थान के मारवाड़ इलाके की सरदारपुरा सीट पर सबकी निगाहें हैं। जोधपुर शहर की यह विधानसभा सीट दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का चुनाव क्षेत्र है। टीवी चैनलों और सोशल मीडिया की भाषा में इसे राजस्थान की हॉट सीटों में से एक माना जाता है। अशोक गहलोत फिर इस बार यहीं से मैदान में हैं, जबकि भाजपा ने इस बार भी उनके मुकाबले उन शंभू सिंह खेतासर को उतारा है, जिन्हें 2013 में गहलौत ने तब शिकस्त दी थी, जब पूरे राज्य में मोदी लहर थी और भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया था।
सरदारपुरा से कुल 17 उम्मीदवार हैं जिनमें दस निर्दलीय भी मैदान में हैं। अपने नामांकन के बाद शुरू में चार दिन तक अपने चुनाव क्षेत्र में प्रचार करने के बाद अशोक गहलोत पूरे सूबे में कांग्रेस के प्रचार के लिए निकल गए, जबकि खेतासर लगातार चुनाव प्रचार में दिनरात एक किए हुए हैं। चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर मं जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यहां रैली करके गहलोत और दूसरे काग्रेसी उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे वहीं प्रचार के आखिरी दौर में दो दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी रावण किला मैदान में आकर चुनावी सभा को संबोधित किया, जहां से पांच साल पहले उन्होंने भाजपा को जिताने और वसुंधरा की सरकार बनाने की अपील जनता से की थी।
हालाकि तब जोधपुर की जनता ने यहां की नौ सीटों पर तो मोदी की बात मानकर भाजपा को जिता दिया था, लेकिन सरदारपुरा का सरदार गहलोत को ही बनाया था। मोदी लहर के बावजूद अशोक गहलोत के हाथों खेत रहे खेतासर का कद बढ़ाते हुए राज्य की भाजपा सरकार ने उन्हें राजस्थान बीज निगम का अध्य़क्ष बनाकर.कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे दिया था और इसी भरोसे फिर उन्हें गहलोत से दो-दो हाथ करने के लिए मैदान में उतारा गया है।
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सरदारपुरा से कुल 17 उम्मीदवार हैं जिनमें दस निर्दलीय भी मैदान में हैं। अपने नामांकन के बाद शुरू में चार दिन तक अपने चुनाव क्षेत्र में प्रचार करने के बाद अशोक गहलोत पूरे सूबे में कांग्रेस के प्रचार के लिए निकल गए, जबकि खेतासर लगातार चुनाव प्रचार में दिनरात एक किए हुए हैं। चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर मं जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यहां रैली करके गहलोत और दूसरे काग्रेसी उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे वहीं प्रचार के आखिरी दौर में दो दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी रावण किला मैदान में आकर चुनावी सभा को संबोधित किया, जहां से पांच साल पहले उन्होंने भाजपा को जिताने और वसुंधरा की सरकार बनाने की अपील जनता से की थी।
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हालाकि तब जोधपुर की जनता ने यहां की नौ सीटों पर तो मोदी की बात मानकर भाजपा को जिता दिया था, लेकिन सरदारपुरा का सरदार गहलोत को ही बनाया था। मोदी लहर के बावजूद अशोक गहलोत के हाथों खेत रहे खेतासर का कद बढ़ाते हुए राज्य की भाजपा सरकार ने उन्हें राजस्थान बीज निगम का अध्य़क्ष बनाकर.कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे दिया था और इसी भरोसे फिर उन्हें गहलोत से दो-दो हाथ करने के लिए मैदान में उतारा गया है।
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अपने लाडले पर भरोसा है जोधपुर की जनता को
लेकिन इस बार जोधपुर का माहौल बदला हुआ है। अशोक गहलोत जोधपुर के लाड़ले हैं और सियासी हलकों में उन्हें मारवाड़ का गौरव भी कहा जाता है। लोग यह भी कहते हैं कि गहलोत साहब की वजह से जोधपुर को नाम भी मिला और यहां काम भी हुए। सरकारी नौकरी करने वाले रावेश कुमार कहते हैं कि अशोक गहलोत ने दो बार मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए जोधपुर में विकास के कई काम कराए। आईआईटी आयुर्वेद विश्विविद्यालय, एम्स, नेशलन लॉ यूनिवर्सिटी और कई अन्य संस्थानों की स्थापना अशोक गहलोत के खाते में दर्ज है। जोधपुर को केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार से बड़ी शिकायत है कि राजस्थान के दूसरे नंबर के शहर जोधपुर को स्मार्ट सिटी की सूची तक में नहीं रखा गया।
इसीलिए 2013 में जब पूरे राजस्थान ने कांग्रेस को खारिज कर दिया था, जोधपुर ने सरदारपुरा से अपने इस लाड़ले की लाज रखी और उसकी सरदारी बरकरार रखी। दुकानदार तिलकचंद का कहना है कि इस बार जब कांग्रेस की सरकार बनने के आसार हैं और ऐसा होने पर अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बन सकते हैं। सरदारपुरा उन्हें पिछली बार से ज्यादा वोटों से जिताकर भेजेगा। वैसे अशोक गहलोत को लेकर कहीं भी कोई नाराजगी नहीं है। व्यापारी, सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, किसान, युवा सब उनकी तारीफ करते हैं। यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ता भी उन्हें शरीफ और बेदाग बताते हैं।
सीएम के करीबी खेतासर
शंभूसिंह खेतासर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खास माने जाते हैं और बाडमेर जिले में पाकिस्तानी सीमा पर सैकड़ों एकड़ वनभूमि को बेचने के एक मामले को लेकर खासे विवादित भी रहे हैं। अशोक गहलोत के खिलाफ कोई आसानी से तड़ने को तैयार नहीं होता इसलिए पार्टी खेतासर को उतार देती है। हालांकि भाजपा समर्थक दिनेश सिंह को उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी की रैली के बाद तस्वीर बदल सकती है। दिनेश कहते हैं कि लोगों को मोदी से बहुत उम्मीदे हैं और लोग उनकी अपील पर वोट देंगे। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं जबकि अशोक गहलोत अभी न मंत्री हैं न मुख्यमंत्री। साथ खड़े रूपराम कहते हैं कि पहले तो कांग्रेस सरकार बनेगी कि नहीं, अगर बनी तो गहलोत मुख्यमंत्री होंगे या कोई और ये सवाल हैं, जबकि मोदी पीएम हैं। इसलिए लोग किसकी सुनेंगे यह आप खुद समझ लीजिए। लेकिन जोधपुर में नौकरी कर रहे नेचू गांव के रहने वाले राहुल मेघवाल का मानना है कि जोधपुर और सरदारपुरा में अशोक गहलोत की ही सरदारी कायम रहेगी। उसे कोई चुनौती नहीं दे सकता।
इसीलिए 2013 में जब पूरे राजस्थान ने कांग्रेस को खारिज कर दिया था, जोधपुर ने सरदारपुरा से अपने इस लाड़ले की लाज रखी और उसकी सरदारी बरकरार रखी। दुकानदार तिलकचंद का कहना है कि इस बार जब कांग्रेस की सरकार बनने के आसार हैं और ऐसा होने पर अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बन सकते हैं। सरदारपुरा उन्हें पिछली बार से ज्यादा वोटों से जिताकर भेजेगा। वैसे अशोक गहलोत को लेकर कहीं भी कोई नाराजगी नहीं है। व्यापारी, सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, किसान, युवा सब उनकी तारीफ करते हैं। यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ता भी उन्हें शरीफ और बेदाग बताते हैं।
सीएम के करीबी खेतासर
शंभूसिंह खेतासर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खास माने जाते हैं और बाडमेर जिले में पाकिस्तानी सीमा पर सैकड़ों एकड़ वनभूमि को बेचने के एक मामले को लेकर खासे विवादित भी रहे हैं। अशोक गहलोत के खिलाफ कोई आसानी से तड़ने को तैयार नहीं होता इसलिए पार्टी खेतासर को उतार देती है। हालांकि भाजपा समर्थक दिनेश सिंह को उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी की रैली के बाद तस्वीर बदल सकती है। दिनेश कहते हैं कि लोगों को मोदी से बहुत उम्मीदे हैं और लोग उनकी अपील पर वोट देंगे। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं जबकि अशोक गहलोत अभी न मंत्री हैं न मुख्यमंत्री। साथ खड़े रूपराम कहते हैं कि पहले तो कांग्रेस सरकार बनेगी कि नहीं, अगर बनी तो गहलोत मुख्यमंत्री होंगे या कोई और ये सवाल हैं, जबकि मोदी पीएम हैं। इसलिए लोग किसकी सुनेंगे यह आप खुद समझ लीजिए। लेकिन जोधपुर में नौकरी कर रहे नेचू गांव के रहने वाले राहुल मेघवाल का मानना है कि जोधपुर और सरदारपुरा में अशोक गहलोत की ही सरदारी कायम रहेगी। उसे कोई चुनौती नहीं दे सकता।