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Jaipur: मूकाभिनय कलाकार विलास जानवे को मिला संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
Fri, 24 Feb 2023 09:19 AM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Fri, 24 Feb 2023 09:19 AM IST
सार
राजस्थान के वरिष्ठ रंगकर्मी विलास जानवे को गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में वर्ष 2021 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया।
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विलास जानवे
- फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजस्थान के वरिष्ठ रंगकर्मी विलास जानवे को गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में वर्ष 2021 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार के रूप में विलास जानवे को ताम्रपत्र, एक लाख रुपये एवं अंगवस्त्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर देश के 128 कलाकारों को अकादमी पुरस्कार के लिए नवाजा गया।
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68 वर्षीय जानवे पिछले पांच दशकों से मूकाभिनय से जुड़े हैं। मूकाभिनय में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने वाले वे देश के पांचवें कलाकार हैं। इससे पूर्व यह पुरस्कार पं. बंगाल के गुरु योगेश दत्ता, पद्मश्री निरंजन गोस्वामी, असम के मोइनुल हक और त्रिपुरा के सपन नंदी को मिल चुका है। जानवे को संस्कृति मंत्रालय से मूकाभिनय के क्षेत्र में 2001 में सीनियर फेलोशिप मिल चुकी है।
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मूकाभिनय की कार्यशालाएं भी की निर्देशित
विलास जानवे ने 1998 से शुरू राष्ट्रीय मूकाभिनय उत्सवों में पत्नी किरण जानवे के साथ अपनी कला का प्रदर्शन करने के साथ ही गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान की कला अकादमियों और शैक्षणिक संस्थाओं के लिए मूकाभिनय की कार्यशालाएं निर्देशित की हैं। अपने गुरु पद्मश्री निरंजन गोस्वामी को मूकाभिनय की कार्यशालाओं में सहायता करने के साथ ही उन्होंने एतिहासिक एवं सामाजिक विषयों पर कई मूकाभिनयों की संरचना की है। देश के कई मंचों पर भी वे अपनी इस कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।
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मूकाभिनय का प्रशिक्षण दिया
उदयपुर के पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में 28 वर्ष तक कार्यक्रम अधिकारी रहे जानवे ने सी.सी.आर.टी क्षेत्रीय केंद्र उदयपुर में परामर्शक के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने सेंट्रल जेल, उदयपुर में मूकाभिनय का प्रशिक्षण दिया है। श्री जानवे ने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की नोबेल पुरस्कार रचना गीतांजलि की कविताओं पर मूकाभिनय कर नवाचार किया है।