Rajasthan: पद्मश्री पाने वाले लोढ़ा की कहानी, 14 साल RSS में काम... आदिवासी बाहुल्य डूंगरपुर में की मानवसेवा
मूलचंद लोढ़ा ने अपने साथी हरीश परमार के साथ मिलकर मझोला में छात्रावास शुरू किया। साल 2000 में 5 बच्चे के साथ छात्रावास की शुरूआत की गई थी। इसके बाद से शुरू हुई मानवसेवा आज भी जारी है।
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मूलचंद लोढ़ा ने जन सेवा की बदौलत पद्मश्री पुरस्कार हासिल किया है। डूंगरपुर क्षेत्र और राजस्थान के आदिवासी अंचल वागड़ में लोढ़ा जागरण जन सेवा मंडल से जुड़े हैं। जयपुर के विमल कुमार चौरड़िया, उदयपुर में बद्री चंद राव के साथ मुलाकात कर इन्होंने 6 जून 2000 को मझोला में कार्यक्रम कर इस संस्था को रजिस्टर्ड करवाया था। पूरी तरह मानव सेवा के उद्देश्यों के साथ इनकी संस्था काम कर रही है। मूलचंद लोढ़ा विश्वकर्मा विद्या मंदिर, श्रीगोविंदमुख विद्या निकेतन बोर्डिंग स्कूल और अस्पताल भी डूंगरपुर के वागंदरी में चलाते हैं।
मूलचंद लोढ़ा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व में प्रचारक रहे हैं। 14 साल तक संघ में काम किया। साथ ही आरएसएस के ही संगठन सेवा भारती राजस्थान के संगठन मंत्री भी रहे हैं। इन्होंने पूरे राजस्थान में काफी प्रवास किया। जिसके बाद किसी एक स्थान पर रहकर वहां काम करने की ठानी।
सबसे पहले मूलचंद लोढ़ा और उनके साथी हरीश परमार ने मझोला में छात्रावास शुरू किया। साल 2000 में 5 बच्चे के साथ छात्रावास की शुरूआत की। जहां ये बच्चों के साथ ही रहते, वहीं पढ़ाई कराते और साथ ही खाना खाते। इसके बाद लोगों का सहयोग मिलने लगा।
गांव में सड़क नहीं थी, तो बीजेपी के भूतपूर्व प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मंत्री रहे ललित किशोर चतुर्वेदी ने तब सड़क बनवा दी। वहां मिड स्कूल नहीं प्राइमरी स्कूल था, तो गुलाबचंद कटारिया ने तब शिक्षा मंत्री रहते, वहां मिडिल स्कूल बनवा दिया। बम्बई के शंकर भाई गहलोत ने स्वामी विवेकानंद की मूर्ति स्थापित कर दी। कई कार्यक्रम आयोजित किए। समाज का काफी सहयोग मिला। फिर स्थाई छात्रवास बनाने की सोच के साथ आगे बढ़े। पास ही के गांव के सरपंच ने वागंदरी में जमीन दिलवाने में मदद की। उबड़ खाबड़ जमीन को सुधारा गया।
संरक्षक शंकर सिंह सोलंकी की मदद से काम शुरू किया। जमीन पर विवाद थे, गांव के कुछ लोगों ने समझा कि यह जमीन पर कब्जा कर लेंगे। विरोध भी हुए, लेकिन तत्कालीन मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने काफी मदद की, जिससे निपटारा हुआ। आज मूलचंद लोढ़ा और इनकी संस्था मेडिकल, एजुकेशन और आदिवासी कल्याण के साथ ही मानव सेवा का काम कर रहे हैं।