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Rajasthan: नाथद्वारा में रामकथा का समापन, मुरारी बापू बोले- विश्व में महादेव का वास, पूर्व सीएम राजे ने ये कहा
Sun, 06 Nov 2022 11:07 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, राजसमंद
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, राजसमंद
Published by: उदित दीक्षित
Updated Sun, 06 Nov 2022 11:07 PM IST
सार
रविवार को कथा में राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि ये दिन मेरे लिए बहुत ही सुखद और शुभ रहा, क्योंकि मुझे भगवान शिव की उस भव्य प्रतिमा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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नाथद्वारा में रामकथा का समापन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नाथद्वारा में स्थापित विश्व के सबसे ऊंची शिव प्रतिमा के उद्घाटन के साथ रामकथा की शुरुआत भी हुई थी। जहां संत मुरारी बापू द्वारा रामकथा का वाचन किया जा रहा था। रविवार को 9वें दिन भगवान श्री राम की कथा का समापन हो गया। इस दौरान बापू ने कहा कि जिस तरह से भरत को भगवान राम की पादुकाओं का आधार मिला, वैसे ही हमारे पास विश्वास स्वरूपम् का आधार है।
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कथा को जीवन में उतारने का आह्वान करते हुए बापू ने व्यासपीठ से जनमानस, समाज, देश और पृथ्वी के कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रभु स्वयं विश्वास हैं और महादेव का विश्व में वास है। कथा को विराम देते हुए जय सिया राम के उच्चारण के बाद बापू ने कहा कि धर्मक्षेत्र के बाद अब कुरुक्षेत्र में मिलेंगे। बापू की अगली कथा कुरुक्षेत्र में 19 नवंबर से शुरू हो रही है।
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रविवार को कथा में राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने कहा कि ये दिन मेरे लिए बहुत ही सुखद और शुभ रहा, क्योंकि मुझे भगवान शिव की उस भव्य प्रतिमा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसके लिए हमारी सरकार ने अक्टूबर, 2018 में साढ़े 25 बीघा भूमि आवंटित की थी। अब यहां विश्व की सबसे बड़ी 369 फीट ऊंची शिव प्रतिमा विराजमान है।
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उन्होंने कहा कि दो दिन मेरे लिए और भी मंगलप्रद तब हुए जब पूज्य मोरारी बापू के श्रीमुख से रामकथा सुनने का अवसर मिला, क्योंकि राम कथा हमें मानव कल्याण के साथ-साथ त्याग, तपस्या और सत्य की राह पर चलने की सीख देती हैं। इस कथा की सार्थकता तभी है, जब हम इसे अपने व्यवहार में धारण करें। रामकथा में राम और भरत का त्याग देखिए। श्रीराम सिंहासन त्यागकर वन में चले गए तो छोटे भाई भरत ने चरण पादुकाओं को राजा मानकर शासन चलाया।
भगवान राम जब वापस आए तो बड़े उत्साह से उनका राज्याभिषेक कर उन्हें अवध के सिंहासन पर बिठाया, लेकिन आज के समय में ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। अब तो सिंहासन के लिए संघर्ष हो रहा है। उस वक्त अवध में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने भी ऐसा शासन दिया कि आज भी सुशासन के लिए 'राम राज्य' का उदाहरण दिया जाता है, जिसके लिए हम कृत संकल्पित है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी राम राज्य के पक्षधर हैं, तभी तो वह सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास आधारित नीति पर चलते हैं। हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का मंदिर अयोध्या में बन रहा है।