Rajasthan: नागौर का कंसारा समाज, जिनके बनाए कांसे के किचन सेट बड़ी हस्तियों की पसंद, यह भी जानें
शहर के कंसारा समाज के लोग कई पीढ़ियों से कांसे के बर्तन बनाने का काम करते आ रहे हैं। पहले यह सिर्फ बर्तन बनाते थे, लेकिन धीरे-धीरे डिनर सेट की मांग बढ़ने लगी, तो सेट भी बनाए जाने लगे। अब यहां के बर्तन और डिनर सेट विदेशों में सप्लाई हो रहे हैं।
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कांसे के बर्तन हमनें कई जगह देखे हैं। इन बर्तनों में भोजन करना हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है ही, साथ ही यह एक रॉयल एहसास भी कराता है। कई बड़े-बड़े होटलों में कांसे से बने बर्तन का इस्तेमाल किया जाता है। इसे अलावा राज घराने, बड़े संत-महंतों के आश्रम, उद्योगपति, सियासी और सिनेमा जगत की कई बड़ी-बड़ी हस्तियां भी इस तरह के बर्तनों का इस्तेमाल करती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी मां हीरा बा के साथ कांसे के बर्तनों में भोजन करते समय की तस्वीर आपने जरूर देखी होगी, लेकिन क्या आप जानते कि कांसे के बर्तन राजस्थान के नागौर जिले में बड़ी तादात में बनाए जाते हैं। यहां इस तरह के बर्तन बनाने वाला एक खास समाज भी हैं। यहां के कंसारा समाज के लोग सदियों से कांसे के बर्तन बना रहे हैं। पुराने समय में यह बर्तन हाथ से बनाए जाते थे, लेकिन अब इन्हें मशीन से बनाया जाता है। इन बर्तनों की मांग देश ही नहीं विदेशों तक है। आइए, अब इस रिपोर्ट में इन बर्तनों की खासियत और इनमें भोजन के फायदे भी जान लेते हैं।
राजस्थान के कांसे के बर्तनों के सेट की मांग देश और दुनियां के लंदन और अमेरिका सहित कई देशों में भी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जुलाई 2022 में देशभर में कांसे के बर्तनों का कुल निर्यात 2.14 प्रतिशत बढ़ा है। यह कारोबार 36.27 अरब रुपये के एक्सपोर्ट को छू गया है। अगले साल इसमें और बढ़त भी देखने को मिल सकती है। राजस्थान के लिए यह एक बड़ी सफलता इसलिए भी है क्योंकि जोधपुर और नागौर जिले कांसे के बर्तन बनाने और बेचने के सबसे बड़े केंद्र हैं।
इन देशों में बड़ी मांग
करीब एक साल से अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, लंदन, कनाडा, आस्ट्रेलिया, और दुबई में काफी डिमांड आने लगी है। कांसे के बर्तनों के सेट की मांग में करीब 15 फीसदी तक का उछाल आया है। वहां के बड़े-बड़े होटलों में इन बर्तनों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है। इसी तरह देश के बड़े होटल भी इन बर्तनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे नागौर का कांसा उद्योग को काफी फायदा मिल रहा है।
पहले सिर्फ बर्तन बनते थे और अब बन रहा डिनर सेट
शहर के कंसारा समाज के लोग कई पीढ़ियों से कांसे के बर्तन बनाने का काम करते आ रहे हैं। पहले यह सिर्फ बर्तन बनाते थे, लेकिन धीरे-धीरे कांसे के डिनर सेट की मांग बढ़ने लगी इसके बाद अलग-अलग तरह के सेट बनाए जाने लगे। अब यहां के बर्तन और डिनर सेट देश के कई राज्यों और विदेशों में सप्लाई हो रहे हैं।
प्राचीन काल में भी किए जाते थे इस्तेमाल
कांसे के बर्तन प्राचीन काल से ही उपयोग में लाए जा रहे हैं। ईरान, सुमेर, मिस्र तथा हड़प्पा, मोहन जोदड़ो, लोथल समेत कई प्राचीन सभ्यताओं से इसका उल्लेख मिलता है। उस समय यह बर्तन हाथ से बनाए जाते हैं। नागौर में भी कई साल पहले तक इन्हें हाथ से ही बनाया जाता रहा, लेकिन अब इन्हें मशीन से बनाया जा रहा है।
कांसे के बर्तन उपयोग में लाने के फायदे
चिकित्सकों मानना है कि कांसे के बर्तनों में भोजन करना शरीर के लिए काफी लाभदायक है। कांसा एक मिश्र धातु है, यह तांबा और वांगा को मिलाकर बनाया जाता है। कांसे के बर्तन उपयोग में लाने से रक्त, त्वचा रोगों और कब्ज से बचाव होता है। इससे चर्म रोग, कृमि रोग और नेत्र रोगों में भी फायदेमंद होता है।