चुनावी मैदान जीतने के लिए अजहर ने फिर थामा बल्ला
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जिस बल्ले ने मोहम्मद अजहरूद्दीन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी, वही लोकसभा चुनाव में उनके प्रचार का सहारा भी बन रहा है। फर्क इतना है कि प्रचार के दौरान हर गली उनकी पिच बनी हुई है और बच्चे बॉलर व फील्डर।
कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के अलावा उनके समर्थक बच्चे उन्हें घेरे रहते हैं और ऑटोग्राफ लेना नहीं चूकते। अजहर भी दिल खोलकर हर बच्चे को ऑटोग्राफ दे रहे हैं। उनका प्रचार इस लोकसभा सीट पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
अजहर सुबह 8 बजे नाश्ता करने के बाद टी-शर्ट और जींस में निकलकर प्रचार पर जुट जाते हैं। हां, एक खास बात यह है कि जैसे मैदान में उनके कॉलर ऊपर रहते थे, प्रचार के दौरान भी वे अपनी टी-शर्ट का कॉलर ऊपर रखना नहीं भूलते।
घर-घर जाकर करते हैं जनसंपर्क
जिस भी गली से गुजरते हैं, बच्चों की फौज उन्हें घेर लेती है, जो लकड़ी का देसी बल्ला उनके हाथों में थमाकर बैटिंग करने का आग्रह करती है। वे विनम्रता से उनकी बात मानते हैं और बल्लेबाजी करते हैं।
बच्चों को खुश करने के लिए वे हवा में शॉट खेलते हैं और बच्चे उनको कैच आउट करके खुशी से झुम उठते हैं। फिर ऑटोग्राफ लेने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
वे लोगों के पास खुद जाकर जनसम्पर्क कर रहे हैं, बजाय मोहल्लों में भीड़ को भाषण सुनाने के। स्वभाव के चलते परम्परागत नेताओं की तरह वे भाषण नहीं दे पाते।
प्रचार के दौरान उनकी गाड़ी में उनका टिफिन साथ चलता है, जिसे वे दोपहर बाद जब भी वक्त मिलता है गाड़ी में ही खोल लेते हैं। शाम को भी वे प्रचार की इसी स्टाइट को अपनाते हैं। वे राजनेताओं की तरह लम्बी-लम्बी-चिकनी-चुपड़ी बातें तो नहीं कर पाते, लेकिन उनके सरल स्वभाव से बच्चों से लेकर बड़ों का दिल जीत रहे हैं।