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जेन-जी आंदोलन फोटो विवाद: रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी हटाने पर डोटासरा ने सरकार को घेरा, दे दी ये नसीहत
Thu, 22 Oct 2026 05:28 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Thu, 22 Oct 2026 05:28 PM IST
सार
दिल्ली के बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की जेन जी आंदोलन से जुड़ी फोटो प्रदर्शनी से 70 से अधिक तस्वीरें हटाने के विवाद पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई नेताओं ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। रेहान ने कहा कि उन्होंने संस्थान की पॉलिसी पढ़कर तस्वीरों का चयन किया था।
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फोटो प्रदर्शनी को लेकर विवाद गहराया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की दिल्ली के बीकानेर हाउस में प्रस्तावित सोलो फोटो प्रदर्शनी को लेकर विवाद गहरा गया है। 70 से ज्यादा तस्वीरें हटाने के निर्देश पर रेहान ने आपत्ति जताई। अब राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सरकार की आलोचना की है। गहलोत ने कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रदर्शनी में शामिल तस्वीरों को लेकर सवाल उठाए हैं।
'पॉलिसी पढ़कर चुनी थीं तस्वीरें'
रेहान वाड्रा ने कहा कि उन्होंने बीकानेर हाउस की राजनीतिक सामग्री से जुड़ी पॉलिसी पढ़ने के बाद ही तस्वीरों का चयन किया था। उनके मुताबिक, प्रदर्शनी में राजनीतिक नारे नहीं थे और नेताओं की तस्वीरें भी बहुत कम थीं।
रेहान ने कहा कि जब उनसे तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया, तो उन्होंने सहयोग करने की बात कही थी। उन्होंने कुछ तस्वीरें हटाने पर भी सहमति जताई थी, लेकिन इसके लिए कारण बताने को कहा था। उनके अनुसार, इसके बजाय उन्हें 70 से ज्यादा तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया।
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पहले समझिए मामला क्या है...
यह पूरा विवाद दिल्ली के बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज फाइनल’ को लेकर खड़ा हुआ है। रेहान के मुताबिक, इन तस्वीरों में दिल्ली में हुए युवा आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को दिखाया गया था, जिन्हें प्रबंधन ने आपत्तिजनक माना। रेहान ने बुधवार को इंस्टाग्राम पोस्ट में आरोप लगाया कि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उन्हें प्रदर्शनी में लगी ज्यादातर तस्वीरें हटाने के लिए मजबूर किया।
अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस मामले को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार की संपत्ति है और वहां एक युवा कलाकार की कला को दबाया जाना निंदनीय है।
गहलोत के मुताबिक, प्रदर्शनी में दिल्ली के युवा आंदोलनों से जुड़ी कई तस्वीरें थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को जनता के सामने आने वाले सच से डर लगता है और सरकार आंदोलनों के दौरान उठाए गए कदमों को छिपाना चाहती है। ये गहलोत के आरोप हैं; इस संबंध में बीकानेर हाउस प्रबंधन का पक्ष अलग से सामने आना बाकी है।
तिरंगे की तस्वीरें हटाने से इनकार करने का दावा
अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में दावा किया कि रेहान वाड्रा से तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने के लिए भी कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। गहलोत ने रेहान के इस रुख की सराहना करते हुए कहा कि तिरंगे के सम्मान पर कोई समझौता नहीं हो सकता। गहलोत ने कलाकारों की आवाज दबाने को लोकतंत्र पर हमला और सेंसरशिप का उदाहरण बताया। उन्होंने भाजपा सरकार से सवाल किया कि सच्चाई बयां करने वाली तस्वीरें क्यों हटाई गईं।
क्या बोले गोविंद सिंह डोटासरा?
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि जब भी असहमति असुविधाजनक लगती है, तो भाजपा का जवाब उसे दबा देना होता है। दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से 74 कलाकृतियां हटा दी गईं। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दर्शाने वाली कलाकृतियों को 'बहुत अधिक राजनीतिक' बताकर हटा दिया गया। बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार की संपत्ति है, और यह तानाशाही भरा फैसला भाजपा सरकार के निर्देश पर लिया गया है। भाजपा सच से डरती है और सत्ता से सवाल पूछने वाली आवाज़ों से असहज हो जाती है। कला को दबाने से असहमति नहीं दबेगी।
रेहान ने पॉलिसी में स्पष्टता की मांग की
रेहान वाड्रा ने बीकानेर हाउस की राजनीतिक सामग्री संबंधी पॉलिसी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पॉलिसी में स्पष्ट होना चाहिए कि राजनीतिक सामग्री किसे माना जाएगा और इसका फैसला कौन करेगा।
रेहान ने बताया कि उनकी ज्यादातर तस्वीरों में आम लोग दिखाई देते हैं। कुछ तस्वीरें विरोध प्रदर्शनों से संबंधित हैं, लेकिन उनमें भी आम जनता ही नजर आती है। उन्होंने यह भी कहा कि एक सार्वजनिक संस्थान की जिम्मेदारी कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना है।
जो सही समझते हो, वही करो
रेहान ने बताया कि तस्वीरें हटाने के विवाद पर उन्होंने अपनी मां प्रियंका गांधी वाड्रा से भी बात की थी। उनके मुताबिक, प्रियंका गांधी ने उनसे कहा, 'तुम जो सही समझते हो वही करो।' इस मामले पर बीकानेर हाउस सोसायटी ने एक बयान में कहा कि यह एक सार्वजनिक सांस्कृतिक संस्थान है। इसका मकसद कला और संस्कृति को बढ़ावा देना है। यहां होने वाली प्रदर्शनियों और उनसे जुड़ी गतिविधियों को बीकानेर हाउस प्रबंधन सोसाइटी की नीति का पालन करना होता है।
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'पॉलिसी पढ़कर चुनी थीं तस्वीरें'
रेहान वाड्रा ने कहा कि उन्होंने बीकानेर हाउस की राजनीतिक सामग्री से जुड़ी पॉलिसी पढ़ने के बाद ही तस्वीरों का चयन किया था। उनके मुताबिक, प्रदर्शनी में राजनीतिक नारे नहीं थे और नेताओं की तस्वीरें भी बहुत कम थीं।
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रेहान ने कहा कि जब उनसे तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया, तो उन्होंने सहयोग करने की बात कही थी। उन्होंने कुछ तस्वीरें हटाने पर भी सहमति जताई थी, लेकिन इसके लिए कारण बताने को कहा था। उनके अनुसार, इसके बजाय उन्हें 70 से ज्यादा तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया।
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पहले समझिए मामला क्या है...
यह पूरा विवाद दिल्ली के बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज फाइनल’ को लेकर खड़ा हुआ है। रेहान के मुताबिक, इन तस्वीरों में दिल्ली में हुए युवा आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को दिखाया गया था, जिन्हें प्रबंधन ने आपत्तिजनक माना। रेहान ने बुधवार को इंस्टाग्राम पोस्ट में आरोप लगाया कि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उन्हें प्रदर्शनी में लगी ज्यादातर तस्वीरें हटाने के लिए मजबूर किया।
अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस मामले को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार की संपत्ति है और वहां एक युवा कलाकार की कला को दबाया जाना निंदनीय है।
गहलोत के मुताबिक, प्रदर्शनी में दिल्ली के युवा आंदोलनों से जुड़ी कई तस्वीरें थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को जनता के सामने आने वाले सच से डर लगता है और सरकार आंदोलनों के दौरान उठाए गए कदमों को छिपाना चाहती है। ये गहलोत के आरोप हैं; इस संबंध में बीकानेर हाउस प्रबंधन का पक्ष अलग से सामने आना बाकी है।
तिरंगे की तस्वीरें हटाने से इनकार करने का दावा
अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में दावा किया कि रेहान वाड्रा से तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने के लिए भी कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। गहलोत ने रेहान के इस रुख की सराहना करते हुए कहा कि तिरंगे के सम्मान पर कोई समझौता नहीं हो सकता। गहलोत ने कलाकारों की आवाज दबाने को लोकतंत्र पर हमला और सेंसरशिप का उदाहरण बताया। उन्होंने भाजपा सरकार से सवाल किया कि सच्चाई बयां करने वाली तस्वीरें क्यों हटाई गईं।
क्या बोले गोविंद सिंह डोटासरा?
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि जब भी असहमति असुविधाजनक लगती है, तो भाजपा का जवाब उसे दबा देना होता है। दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से 74 कलाकृतियां हटा दी गईं। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दर्शाने वाली कलाकृतियों को 'बहुत अधिक राजनीतिक' बताकर हटा दिया गया। बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार की संपत्ति है, और यह तानाशाही भरा फैसला भाजपा सरकार के निर्देश पर लिया गया है। भाजपा सच से डरती है और सत्ता से सवाल पूछने वाली आवाज़ों से असहज हो जाती है। कला को दबाने से असहमति नहीं दबेगी।
रेहान ने पॉलिसी में स्पष्टता की मांग की
रेहान वाड्रा ने बीकानेर हाउस की राजनीतिक सामग्री संबंधी पॉलिसी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पॉलिसी में स्पष्ट होना चाहिए कि राजनीतिक सामग्री किसे माना जाएगा और इसका फैसला कौन करेगा।
रेहान ने बताया कि उनकी ज्यादातर तस्वीरों में आम लोग दिखाई देते हैं। कुछ तस्वीरें विरोध प्रदर्शनों से संबंधित हैं, लेकिन उनमें भी आम जनता ही नजर आती है। उन्होंने यह भी कहा कि एक सार्वजनिक संस्थान की जिम्मेदारी कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना है।
जो सही समझते हो, वही करो
रेहान ने बताया कि तस्वीरें हटाने के विवाद पर उन्होंने अपनी मां प्रियंका गांधी वाड्रा से भी बात की थी। उनके मुताबिक, प्रियंका गांधी ने उनसे कहा, 'तुम जो सही समझते हो वही करो।' इस मामले पर बीकानेर हाउस सोसायटी ने एक बयान में कहा कि यह एक सार्वजनिक सांस्कृतिक संस्थान है। इसका मकसद कला और संस्कृति को बढ़ावा देना है। यहां होने वाली प्रदर्शनियों और उनसे जुड़ी गतिविधियों को बीकानेर हाउस प्रबंधन सोसाइटी की नीति का पालन करना होता है।