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Kekri News: नर्सिंगकर्मियों के भरोसे बघेरा का सामुदायिक अस्पताल, न डॉक्टर, न जांच मशीनें, कैसे होगा इलाज?

Sat, 21 Sep 2024 12:01 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी Published by: प्रिया वर्मा Updated Sat, 21 Sep 2024 12:01 PM IST
सार

जिले का बघेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टर नहीं होने के कारण नर्सिंगकर्मियों के भरोसे चल रहा है। यहां लगाई गई जांच की मशीनें भी खराब पड़ी हैं। मौसमी बीमारियों के चलते मरीजों की संख्या बढ़ रही है लेकिन उनकी सुध लेने के लिए यहां डॉक्टर का कोई अता-पता नहीं है।

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Kekri News: Baghera's community hospital is in charge of nursing workers, patients are in distress
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केकड़ी जिले में बघेरा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों चिकित्सा सेवाओं की बदहाली के चलते सुर्खियों में है। स्वास्थ्य केंद्र पर तीन डॉक्टर पदस्थ हैं, इनमें से एक डॉक्टर केकड़ी में बीसीएमओ के पद पर प्रतिनियुक्ति पर है, जबकि एक डॉक्टर पिछले तीन-चार महीनों से गायब बताया गया है। नतीजतन मरीजों को देखने और दवाइयां लिखने का काम नर्सिंगकर्मियों पर छोड़ दिया गया है।
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इस केंद्र पर डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी का असर सीधा-सीधा मरीजों पर पड़ रहा है। मौसमी बीमारियों के चलते यहां मरीजों की भीड़ बढ़ रही है लेकिन हालात इतने खराब हो चुके हैं कि डॉक्टरों की गैर मौजूदगी में नर्सिंगकर्मियों की अनियमितता और मनमानी से उन्हें समय पर इलाज ही नहीं मिल पा रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन दो पद रिक्त हैं और केवल तीन डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें से भी एक डॉक्टर को प्रतिनियुक्ति पर केकड़ी भेजा गया है और एक डॉक्टर कई महीनों से गायब हैं। ऐसा ही हाल नर्सिंगकर्मियों का है। छह नर्सिंगकर्मियों के पद स्वीकृत हैं लेकिन एक को सरवाड़ अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। 
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जांच की मशीनें भी खराब

मरीजों की मुश्किलें सिर्फ डॉक्टरों की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं हैं। यहां जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी खराब पड़ी हैं, जिसके चलते मरीजों को जांच के लिए केकड़ी जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
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राजनीति का अखाड़ा बना अस्पताल

मरीजों का कहना है कि इस स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और नर्सिंगकर्मियों के बीच तालमेल की कमी के चलते उन्हें इलाज के लिए मारे-मारे फिरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। यहां काम करने वाले चिकित्साकर्मी अपने निजी हितों और राजनीतिक दबावों के चलते सही समय पर अपनी ड्यूटी नहीं निभा रहे हैं। यही कारण है कि ग्रामीणों को यहां इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।


बीसीएमओ ने ये कहा

इस संबंध में जिले के सीएमएचओ से कई बार दूरभाष पर बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया। अलबत्ता बीसीएमओ संजय कुमार शर्मा ने बताया कि उन्हें केकड़ी में बीसीएमओ के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है। एक डॉक्टर पिछले तीन-चार महीनों से गायब है, जबकि एक डॉक्टर ही यहां कार्यरत है। नर्सिंगकर्मी को सरवाड़ अस्पताल में भेजा गया था, लेकिन अब उसकी प्रतिनियुक्ति निरस्त कर दी गई है और उसे वापस बघेरा केंद्र पर ज्वाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा जांच मशीनों में आई तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है और जल्द ही मशीनें ठीक कर दी जाएंगी।
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