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BBC Documentary: जमाते इस्लामी हिंद के प्रदेश अध्यक्ष बोले- सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्रों का निलंबन गलत

Sun, 29 Jan 2023 06:02 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Sun, 29 Jan 2023 06:02 PM IST
सार

जमाते इस्लामी हिंद राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद निजामुद्दीन ने राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय, अजमेर के 10 स्टूडेंट्स को बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री फिल्म देखने के आरोप में निलंबित किए जाने की कड़ी निन्दा की है।

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Jamaat Islami Hind Mohammad Nizamuddin says Improper suspension Central University students BBC Documentary
जमाते इस्लामी हिंद राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद निजामुद्दीन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मुहम्मद नाजिमुद्दीन ने कहा- सेंट्रल यूनिवर्सिटी अजमेर प्रशासन ने एक अन्य छात्र संगठन के झूठे आरोपों और उनकी ओर से उपलब्ध कराई गई लिस्ट के आधार पर ही उन छात्रों को निलम्बित कर दिया, जो प्रशासन के पक्षपात पूर्ण रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मिली जानकारी के मुताबिक प्रशासन की रोक के बाद स्टूडेंट्स ने बीबीसी की डॉक्यूमेन्ट्री ”इण्डियाः द मोदी क्वेश्चन“ की स्क्रीनिंग को स्थगित कर दिया था। वे अपने- अपने मोबाइल पर ही उस डॉक्यूमेन्ट्री को देख रहे थे, जो उनकी निजी स्वतंत्रता का मामला है। 

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निलम्बित किए गए स्टूडेंट्स में से ज़्यादातर मुस्लिम
जमाअते इस्लामी हिन्द राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि अभी तक किसी भी आधिकारिक आदेश से उस वीडियो को प्रतिबंधित नहीं किया गया है और केवल विभिन्न इन्टरनेट माध्यमों पर उसे ब्लॉक किया गया है। नाज़िमुद्ददीन ने कहा कि निलम्बित किए गए स्टूडेंट्स में से ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय से हैं, इससे स्पष्ट है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन साम्प्रदायिक मानसिकता से ग्रस्त है। यह भी चिंताजनक है कि इस मामले में उन निलंबित होने वाले स्टूडेंट्स का पक्ष नहीं सुना गया और एकतरफ़ा तौर पर, बिना कोई जाँच किए उन्हें 15 दिन के लिए यूनिवर्सिटी और होस्टल से निकाल दिया गया। 
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दूसरे छात्र संगठन ने यूनिवर्सिटी में जुलूस निकाल कर हंगामा किया
निजामुद्दीन ने आश्चर्य जताया कि एक अन्य छात्र संगठन ने यूनिवर्सिटी में जुलूस निकाल कर हंगामा किया और अराजकता फैलाने की कोशिश की। लेकिन उसके छात्रों के खिलाफ कोई कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यह छात्रों की निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन का मामला है। साथ ही  मांग उठाई कि स्टूडेंट्स का निलंबन आदेश तुरंत निरस्त किया जाए और उन्हें यूनिवर्सिटी और होस्टल में बिना देरी वापस लिया जाए।

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