फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaisalmer News ›   ramdevra great indian bustard godawan rewilding rajasthan state bird rehabilitation aviary soft release centre

राजस्थान: थार के राज्य पक्षी की घर वापसी! सरिस्का की तर्ज पर रामदेवरा में गोडावणों की री-वाइल्डिंग शुरू

Sun, 04 Oct 2026 08:49 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला,जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,जयपुर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sun, 04 Oct 2026 08:49 AM IST
सार

रामदेवरा में गंभीर रूप से संकटग्रस्त राज्य पक्षी गोडावण को उसके प्राकृतिक आवास में दोबारा बसाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने गोडावण एवियरी और सॉफ्ट रिलीज सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन किया।

विज्ञापन
ramdevra great indian bustard godawan rewilding rajasthan state bird rehabilitation aviary soft release centre
गोडावण को रामदेवरा और सुदासरी में रिलीज की तैयारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

थार के राज्य पक्षी और गंभीर रूप से संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण को अब उनके प्राकृतिक आवास में दोबारा बसाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजस्थान के रामदेवरा में तैयार किए गए गोडावण एवियरी और सॉफ्ट रिलीज सेंटर का केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जोधपुर से वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने कृत्रिम संवर्धन और प्रजनन तकनीक से तैयार किए गए गोडावणों की री-वाइल्डिंग यानी उन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ कर दिया।

विज्ञापन

आठ साल में पूरा हुआ गोडावण संरक्षण का मिशन

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि गोडावण संरक्षण की यह परियोजना दुनिया में सबसे कम समय में इस स्तर तक पहुंचने वाली परियोजनाओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि अफ्रीका, यूरोप और गुजरात में इस तरह के संरक्षण कार्यक्रमों को पूरा करने में 20 से 25 साल तक का समय लगा, जबकि राजस्थान में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और वन अधिकारियों ने करीब आठ साल में यह उपलब्धि हासिल की। परियोजना को वर्ष 2018 में उस समय गति मिली, जब भारतीय वन्यजीव संस्थान और अंतरराष्ट्रीय हुबारा संरक्षण केंद्र के बीच समझौता हुआ। इसके बाद गोडावण के कृत्रिम संवर्धन और प्रजनन के साथ संरक्षण से जुड़ा काम तेजी से आगे बढ़ा।

विज्ञापन


मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 2021 में जब वे बीकानेर से रामदेवरा पहुंचे थे, तब परियोजना की स्थिति गंभीर थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प, वैज्ञानिकों की मेहनत और अधिकारियों के आपसी समन्वय से यह काम आगे बढ़ सका। वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि गोडावणों को प्राकृतिक आवास में दोबारा बसाने की पहल से राजस्थान के राज्य पक्षी को उसका खोया गौरव और सम्मान वापस मिला है।

विज्ञापन
विज्ञापन

3,600 वर्ग किलोमीटर का इलाका बना संरक्षित क्षेत्र

गोडावण के अंडों और चूजों को सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग ने 3,600 वर्ग किलोमीटर के मरुस्थलीय क्षेत्र को एकीकृत रिजर्व जोन के रूप में विकसित किया है। पूरे क्षेत्र को डॉग-फ्री जोन बनाया गया है, ताकि गोडावण के अंडों और चूजों पर कुत्तों से होने वाले खतरे को कम किया जा सके। वैज्ञानिकों ने यहां घास के मैदानों और जल स्रोतों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया है। इसका उद्देश्य भूमि के क्षरण को रोकने के साथ गोडावण के लिए बेहतर प्राकृतिक वातावरण तैयार करना है। विभाग के मुताबिक, संरक्षित क्षेत्र विकसित किए जाने के बाद यहां चिंकारा की संख्या भी दस गुना बढ़ी है। भूपेंद्र यादव ने गोडावण को थार की जैव विविधता के लिए अंब्रेला प्रजाति बताया। इसका मतलब है कि गोडावण के संरक्षण से उसके साथ रहने वाली दूसरी वन्यजीव प्रजातियों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को भी फायदा पहुंचता है।

केवलादेव की तर्ज पर ईको टूरिज्म की संभावना

रामदेवरा का यह क्षेत्र मध्य एशियाई पक्षी प्रवास मार्ग पर स्थित है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री ने इसे भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की तर्ज पर बड़े ईको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावना भी जताई। गोडावण संरक्षण के साथ इस क्षेत्र में प्राकृतिक घास के मैदान, जल स्रोत और दूसरे वन्यजीव भी संरक्षित होंगे। इससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलने के साथ क्षेत्र में प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

सरिस्का की तर्ज पर गोडावणों को फिर बसाने की पहल

राजस्थान वन्यजीव पुनर्वास के क्षेत्र में पहले भी देश के लिए एक मॉडल बन चुका है। वर्ष 2008 में सरिस्का में बाघों को दोबारा बसाने की शुरुआत की गई थी। अब वहां बाघों की संख्या बढ़कर 56 तक पहुंच चुकी है। इसके बाद पन्ना और बक्सा राष्ट्रीय उद्यानों ने भी राजस्थान के इस मॉडल को अपनाया।


अब रामदेवरा में कृत्रिम संवर्धन और प्रजनन तकनीक से तैयार किए गए गोडावणों की री-वाइल्डिंग शुरू की गई है। इसके जरिए थार के इस संकटग्रस्त पक्षी को उसके प्राकृतिक आवास में दोबारा स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। यह पहल राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक नई मिसाल के रूप में देखी जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed