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Jaipur: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 23.56 लाख की ठगी, अंतर्राज्यीय गिरोह का सरगना बंगलुरु से गिरफ्तार
Wed, 09 Jul 2025 07:21 AM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Wed, 09 Jul 2025 07:21 AM IST
सार
Rajasthan: साइबर क्राइम एसपी शांतनु कुमार के अनुसार, यह घटना 23 मई 2025 की है। पीड़ित बुजुर्ग को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी ‘संजय कुमार’ बताया और कहा कि उनके नाम से खरीदे गए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अश्लील संदेश भेजने में हुआ है। पढ़ें खबर
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आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
साइबर अपराधियों के एक अंतर्राज्यीय गिरोह द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर जयपुर के 75 वर्षीय बुजुर्ग से 23.56 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। जयपुर साइबर क्राइम पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल केस में पहले ही मुख्य खाताधारक और तीन अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया था। अब गिरोह के सरगना को भी कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु से गिरफ्तार कर लिया गया है।
ऐसे दिया गया 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा
साइबर क्राइम एसपी शांतनु कुमार के अनुसार, यह घटना 23 मई 2025 की है। पीड़ित बुजुर्ग को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी ‘संजय कुमार’ बताया और कहा कि उनके नाम से खरीदे गए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अश्लील संदेश भेजने में हुआ है। साथ ही दावा किया गया कि उनके खिलाफ 2.80 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद पीड़ित को कथित "सीबीआई अधिकारी" रोहित कुमार गुप्ता से भी बात करवाई गई और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर एक फर्जी अदालत का दृश्य दिखाया गया जिसमें "न्यायाधीश" उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दे रहे थे। भयभीत होकर पीड़ित ने 26 मई को ठगों द्वारा बताए गए बैंक खाते में अपनी जीवन भर की कमाई में से 23.56 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
तेजी से हुई पुलिस कार्रवाई
शिकायत मिलने पर साइबर थाना जयपुर में मामला दर्ज किया गया। एसपी शांतनु कुमार और डिप्टी एसपी नीरज कुमार मेवानी के निर्देशन में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। पता चला कि जिस खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए थे, उसमें 26 मई को एक ही दिन में करीब 3 करोड़ रुपये विभिन्न खातों से आए और तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। पुलिस ने मुख्य खाताधारक सुरेश कुमार जाट उर्फ सुरेंद्र (निवासी झुंझुनूं, हाल दिल्ली) को 30 मई को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। आगे की जांच में उसके तीन अन्य साथियों ओमप्रकाश उर्फ नितेश (श्रीगंगानगर), वंशुल उर्फ आर्यन उर्फ प्रवीण (चूरू) और भूपेश फगेड़िया (झुंझुनूं) को सोनीपत जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया।
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मुख्य सरगना बंगलुरु से गिरफ्तार
चारों आरोपियों से पूछताछ में गिरोह के सरगना का नाम सनी कुमार सामने आया। पुलिस टीम जिसमें उप निरीक्षक दामोदर और कांस्टेबल मनोज, सुरेश व किशन शामिल थे, ने तकनीकी मदद से बेंगलुरु में दबिश दी। वहां से सनी कुमार शर्मा (उम्र 26), निवासी हवेली खरगपुर, मुंगेर (बिहार) को गिरफ्तार किया गया, जो बेंगलुरु में किराए पर रह रहा था।
देशभर में फैला ठगों का नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह चंडीगढ़, सोनीपत, रोहिणी (दिल्ली), पटना (बिहार) और बेंगलुरु (कर्नाटक) समेत कई शहरों में इसी तरह की 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी को अंजाम दे चुका है। इन शहरों में गिरोह के खिलाफ अन्य शिकायतें व प्रकरण भी दर्ज हैं। पुलिस अब मुख्य सरगना सनी कुमार से विस्तृत पूछताछ कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके और ऐसे संगठित साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
पढ़ें: IAS अफसरों को मजबूत डोर में बांध रहा प्रदेश, डेढ़ साल में 7 IAS ने शादी के बाद कैडर ट्रांसफर करवाया
एटीएम पर धोखे से कार्ड बदलकर ठगी: साइबर अपराधियों से बचने के लिए राजस्थान पुलिस की सख्त चेतावनी
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एटीएम पर हो रही नई तरह की धोखाधड़ी को लेकर आमजन के लिए अलर्ट जारी किया है। इस ठगी में साइबर अपराधी एटीएम से नकदी निकालने आए लोगों को मदद के बहाने फंसा कर उनका डेबिट कार्ड बदल लेते हैं और फिर खाते से बड़ी रकम उड़ा देते हैं। साइबर क्राइम एसपी शांतनु कुमार ने बताया कि इन अपराधियों की गैंग अलग-अलग शहरों में घूमती रहती है और एटीएम बूथों को अपना निशाना बनाती है।
जैसे ही कोई व्यक्ति एटीएम से नकदी निकालने में असमर्थ दिखता है, ये शातिर तुरंत मदद करने के बहाने पहुंचते हैं। ग्राहक के पिन पर नजर रखने के बाद मौका पाकर उसका एटीएम कार्ड हूबहू दिखने वाले नकली कार्ड से बदल देते हैं। ठग इतनी सफाई से काम करते हैं कि पहले एक बार ग्राहक को नकदी निकलवा भी देते हैं, जिससे उसे संदेह न हो। बाद में असली कार्ड से वे खाते से लाखों रुपये निकालकर फरार हो जाते हैं। जब तक पीड़ित को मोबाइल पर लेन-देन का अलर्ट मिलता है, तब तक अपराधी एटीएम से दूर निकल चुके होते हैं।
पुलिस की चेतावनी: इन 5 बातों का रखें विशेष ध्यान
राजस्थान पुलिस ने लोगों को जागरूक करते हुए एटीएम फ्रॉड से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतने की अपील की है:
एटीएम में एकांत सुनिश्चित करें, कैश निकालते समय यह सुनिश्चित करें कि बूथ में आप अकेले हों।
परिवारजनों की मदद लें, यदि एटीएम चलाना नहीं आता है तो किसी अजनबी की बजाय परिचित या परिजन से सहायता लें।
अजनबी की मदद न लें, कोई अनजान व्यक्ति मदद करने की पेशकश करे तो तुरंत मना करें।
बैंक से संपर्क करें, अगर एटीएम में कोई समस्या हो रही है तो सीधे बैंक की हेल्पलाइन से संपर्क करें।
तुरंत शिकायत करें , अगर आपके साथ धोखाधड़ी होती है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में भी सूचना दी जा सकती है।
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ऐसे दिया गया 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा
साइबर क्राइम एसपी शांतनु कुमार के अनुसार, यह घटना 23 मई 2025 की है। पीड़ित बुजुर्ग को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी ‘संजय कुमार’ बताया और कहा कि उनके नाम से खरीदे गए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अश्लील संदेश भेजने में हुआ है। साथ ही दावा किया गया कि उनके खिलाफ 2.80 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद पीड़ित को कथित "सीबीआई अधिकारी" रोहित कुमार गुप्ता से भी बात करवाई गई और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर एक फर्जी अदालत का दृश्य दिखाया गया जिसमें "न्यायाधीश" उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दे रहे थे। भयभीत होकर पीड़ित ने 26 मई को ठगों द्वारा बताए गए बैंक खाते में अपनी जीवन भर की कमाई में से 23.56 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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तेजी से हुई पुलिस कार्रवाई
शिकायत मिलने पर साइबर थाना जयपुर में मामला दर्ज किया गया। एसपी शांतनु कुमार और डिप्टी एसपी नीरज कुमार मेवानी के निर्देशन में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। पता चला कि जिस खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए थे, उसमें 26 मई को एक ही दिन में करीब 3 करोड़ रुपये विभिन्न खातों से आए और तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। पुलिस ने मुख्य खाताधारक सुरेश कुमार जाट उर्फ सुरेंद्र (निवासी झुंझुनूं, हाल दिल्ली) को 30 मई को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। आगे की जांच में उसके तीन अन्य साथियों ओमप्रकाश उर्फ नितेश (श्रीगंगानगर), वंशुल उर्फ आर्यन उर्फ प्रवीण (चूरू) और भूपेश फगेड़िया (झुंझुनूं) को सोनीपत जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया।
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मुख्य सरगना बंगलुरु से गिरफ्तार
चारों आरोपियों से पूछताछ में गिरोह के सरगना का नाम सनी कुमार सामने आया। पुलिस टीम जिसमें उप निरीक्षक दामोदर और कांस्टेबल मनोज, सुरेश व किशन शामिल थे, ने तकनीकी मदद से बेंगलुरु में दबिश दी। वहां से सनी कुमार शर्मा (उम्र 26), निवासी हवेली खरगपुर, मुंगेर (बिहार) को गिरफ्तार किया गया, जो बेंगलुरु में किराए पर रह रहा था।
देशभर में फैला ठगों का नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह चंडीगढ़, सोनीपत, रोहिणी (दिल्ली), पटना (बिहार) और बेंगलुरु (कर्नाटक) समेत कई शहरों में इसी तरह की 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी को अंजाम दे चुका है। इन शहरों में गिरोह के खिलाफ अन्य शिकायतें व प्रकरण भी दर्ज हैं। पुलिस अब मुख्य सरगना सनी कुमार से विस्तृत पूछताछ कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके और ऐसे संगठित साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
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एटीएम पर धोखे से कार्ड बदलकर ठगी: साइबर अपराधियों से बचने के लिए राजस्थान पुलिस की सख्त चेतावनी
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एटीएम पर हो रही नई तरह की धोखाधड़ी को लेकर आमजन के लिए अलर्ट जारी किया है। इस ठगी में साइबर अपराधी एटीएम से नकदी निकालने आए लोगों को मदद के बहाने फंसा कर उनका डेबिट कार्ड बदल लेते हैं और फिर खाते से बड़ी रकम उड़ा देते हैं। साइबर क्राइम एसपी शांतनु कुमार ने बताया कि इन अपराधियों की गैंग अलग-अलग शहरों में घूमती रहती है और एटीएम बूथों को अपना निशाना बनाती है।
जैसे ही कोई व्यक्ति एटीएम से नकदी निकालने में असमर्थ दिखता है, ये शातिर तुरंत मदद करने के बहाने पहुंचते हैं। ग्राहक के पिन पर नजर रखने के बाद मौका पाकर उसका एटीएम कार्ड हूबहू दिखने वाले नकली कार्ड से बदल देते हैं। ठग इतनी सफाई से काम करते हैं कि पहले एक बार ग्राहक को नकदी निकलवा भी देते हैं, जिससे उसे संदेह न हो। बाद में असली कार्ड से वे खाते से लाखों रुपये निकालकर फरार हो जाते हैं। जब तक पीड़ित को मोबाइल पर लेन-देन का अलर्ट मिलता है, तब तक अपराधी एटीएम से दूर निकल चुके होते हैं।
पुलिस की चेतावनी: इन 5 बातों का रखें विशेष ध्यान
राजस्थान पुलिस ने लोगों को जागरूक करते हुए एटीएम फ्रॉड से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतने की अपील की है:
एटीएम में एकांत सुनिश्चित करें, कैश निकालते समय यह सुनिश्चित करें कि बूथ में आप अकेले हों।
परिवारजनों की मदद लें, यदि एटीएम चलाना नहीं आता है तो किसी अजनबी की बजाय परिचित या परिजन से सहायता लें।
अजनबी की मदद न लें, कोई अनजान व्यक्ति मदद करने की पेशकश करे तो तुरंत मना करें।
बैंक से संपर्क करें, अगर एटीएम में कोई समस्या हो रही है तो सीधे बैंक की हेल्पलाइन से संपर्क करें।
तुरंत शिकायत करें , अगर आपके साथ धोखाधड़ी होती है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में भी सूचना दी जा सकती है।