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जल जीवन मिशन घोटाला: महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, एसीबी के मामले में मिली राहत

Fri, 16 Oct 2026 02:38 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 16 Oct 2026 02:38 PM IST
सार

जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले में राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है। राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया था। एसीबी मामले में जमानत के बावजूद आरोपों की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

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Supreme Court Grants Bail to Former Rajasthan Minister Mahesh Joshi in Jal Jeevan Mission Case
महेश जोशी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजस्थान के पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने राजस्थान एसीबी की ओर से दर्ज मामले में उनकी नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली है। इस मामले में एक अन्य आरोपी को भी जमानत दी गई है।

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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने महेश जोशी की स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने करीब तीन दिन पहले फैसला सुरक्षित रख लिया था। राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद जोशी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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पहले फैसला सुरक्षित रखा, अब मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। इसके बाद पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने उनकी याचिका मंजूर करते हुए नियमित जमानत दे दी है। हालांकि, जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें आरोपों से बरी कर दिया गया है। मामले की जांच और कानूनी कार्यवाही आगे जारी रहेगी।

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ईडी मामले में भी मिल चुकी है जमानत

महेश जोशी इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जेल गए थे। करीब सात महीने हिरासत में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिसंबर 2025 को उन्हें नियमित जमानत दी थी। इसके कुछ महीने बाद, 7 मई 2026 को राजस्थान एसीबी ने उन्हें जयपुर स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई जल जीवन मिशन में कथित टेंडर आवंटन घोटाले और रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में की गई थी।


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क्या है जल जीवन मिशन मामला?

जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक नल से पेयजल पहुंचाना है। राजस्थान में इस योजना के तहत टेंडर आवंटन और कामकाज में कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है। आरोप हैं कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठेके हासिल किए गए और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुईं। जांच एजेंसियों ने इस मामले में रिश्वतखोरी और कमीशन के लेन-देन के आरोपों की भी पड़ताल की है।

प्रवर्तन निदेशालय और राजस्थान एसीबी इस मामले में अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रहे हैं। महेश जोशी को एसीबी के मामले में जमानत मिलने से उन्हें कानूनी राहत मिली है, लेकिन मामले में लगे आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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