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राजस्थान: जयपुर में गर्भवतियों की जांच के लिए विशेष अभियान, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की होगी समय पर पहचान
Sat, 24 Oct 2026 03:08 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Sat, 24 Oct 2026 03:08 PM IST
सार
जयपुर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान के लिए विशेष स्क्रीनिंग अभियान चला रहा है। गर्भवतियों की जरूरी जांच, नियमित फॉलोअप, उपचार, जरूरत पर रेफरल और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है।
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सांकेतिक
- फोटो : AI
विस्तार
गर्भवतियों में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष स्क्रीनिंग अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व पोषण दिवस के अवसर पर सरकारी चिकित्सा संस्थानों में आने वाली गर्भवतियों की प्रसव पूर्व स्वास्थ्य जांच की गई तथा जोखिम वाले मामलों को चिह्नित किया गया।
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नियमित जांच और उपचार व्यवस्था
जयपुर प्रथम के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रवि शेखावत ने बताया कि चिकित्सा केंद्रों पर गर्भवतियों के रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन और ब्लड शुगर सहित सभी जरूरी परीक्षण किए जा रहे हैं। जांच के दौरान जिन महिलाओं में उच्च रक्तचाप, गंभीर एनीमिया और मधुमेह जैसे जोखिम सामने आ रहे हैं, उन्हें उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था श्रेणी में शामिल किया जा रहा है। ऐसी महिलाओं के लिए नियमित फॉलोअप और निरंतर उपचार की विशेष व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही आवश्यकता महसूस होने पर इन गर्भवतियों को बेहतर इलाज के लिए उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाएगा।
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जागरूकता और सघन मॉनिटरिंग
अभियान के दौरान गर्भवतियों को पौष्टिक आहार लेने, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, खतरे के लक्षणों को समय रहते पहचानने और सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त नवजात शिशु को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने तथा शुरुआती छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाने की सलाह भी दी जा रही है। इस पूरी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों ने विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में पहुंचकर सत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्वास्थ्यकर्मियों को उच्च जोखिम वाली महिलाओं की शीघ्र पहचान करने और उन्हें गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए।