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Rajasthan Election: जाति समीकरण में उलझ गया राजस्थान विधानसभा चुनाव, राजपूत, जाट और गुर्जर तय करेंगे सरकार

Thu, 23 Nov 2023 07:01 AM IST
गुलाम अहमद प्रेम प्रताप सिंह, जयपुर
प्रेम प्रताप सिंह, जयपुर Published by: गुलाम अहमद Updated Thu, 23 Nov 2023 07:01 AM IST
सार

राजस्थान में पिछले 25 साल से एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की सरकार बनने का रिवाज रहा है, लेकिन एक चलन यह भी है कि महज डेढ़ फीसदी वोट के अंतर से पूरी बाजी पलट जाती है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच वोटों का अंतर डेढ़ फीसदी से भी कम रहा।  

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Rajput Jat and Gurjar caste equation will decide next government in Rajasthan Election 2023
राजस्थान चुनाव - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

मतदान की तारीख 25 नवंबर करीब आने के साथ राजस्थान विधानसभा चुनाव जाति समीकरण में उलझता जा रहा है। तमाम चुनावी मुद्दे जमीन पर गायब हो गए हैं। गहलोत सरकार की विकास योजनाओं, गारंटी या भाजपा की ओर से पेपर लीक और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों पर बात करने की बजाय वोटर अब प्रत्याशी की जाति पर फोकस हो गया है। राजस्थान में राजपूत, जाट और गुर्जर प्रभावशाली समाज है। जिस पार्टी ने अंतिम दौर में इन जातियों को साध लिया तो समझिए प्रदेश में उसी की सरकार बनने जा रही है। कांग्रेस और भाजपा की ओर से जातियों को साधने के लिए हर बार सियासी कार्ड खेला जाता है। इस बार भी जातिगत समीकरण के मुताबिक, पार्टियों ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। जाट समाज को साधने के लिए दोनों ही पार्टियों ने काफी टिकट दिए हैं। राज्य के उलझे जाित समीकरणों पर प्रेम प्रताप सिंह की रिपोर्ट...

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सबसे अंत में फैसला करते हैं जाट
2018 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार का चुनाव थोड़ा अलग है। भैरोसिंह शेखावत के समय से ही राजपूत वोट बैंक भाजपा का माना जाता है। पिछली बार राजपूत समाज अपराधी आनंदपाल की मुठभेड़ के कारण वसुंधरा सरकार से नाराज था। यह नारा दिया था कि फूल हमारी भूल। इस बार ऐसा नहीं है। गुर्जर समाज का वोट सचिन पायलट को लेकर काफी उत्साहित था। इस बार वो उत्साह नहीं है। वैसे भी गुर्जर भाजपा का परंपरागत वोटर रहा, लेकिन पायलट के कारण पिछली बार भाजपा के सारे गुर्जर प्रत्याशी चुनाव हार गए थे। जबकि जाट समाज हमेशा से बेहद निर्णायक रहा।
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सबसे अंत में अपना फैसला करता है। इसलिए कांग्रेस ने 36 तो भाजपा ने 33 जाट प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। जिन सीटों पर कांग्रेस-भाजपा दोनों के प्रत्याशी जाट हैं, वहां जाट वोटर यह देखता है कि कौन जाट प्रत्याशी जीत रहा है, उसी के पक्ष में खुलकर वोट करता है। जिस सीट पर जाट प्रभावशाली है, उन सीटों पर दूसरी जातियों का एकतरफा वोट भी पड़ता है। यह एक अलग तरह का समीकरण काम करता है। कांग्रेस ने 15 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है, जबकि भाजपा ने एक को भी नहीं। इसके जरिये कांग्रेस ने मुस्लिमों को पूरी तरह साध लिया, जबकि भाजपा ने हिंदुत्व के जरिये राजस्थान में नई लाइन बना दी है।


जातिवार प्रत्याशी
जाति कांग्रेस भाजपा
जाट 36 33
राजपूत 17 25
गुर्जर 11 10
मुस्लिम 15 00

सियासी चलन...
राजस्थान में पिछले 25 साल से एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की सरकार बनने का रिवाज रहा है, लेकिन एक चलन यह भी है कि महज डेढ़ फीसदी वोट के अंतर से पूरी बाजी पलट जाती है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच वोटों का अंतर डेढ़ फीसदी से भी कम रहा। कांग्रेस के पक्ष में 13,935,201 यानी 39.30 फीसदी वोट पड़े थे। उधर, भाजपा को 13,757,502 मत मिले थे, जोकि 38.08 फीसदी थे। कांग्रेस और भाजपा के बीच वोट प्रतिशत का अंतर डेढ़ प्रतिशत से भी कम रहा, लेकिन सीट का अंतर 27 का था। भाजपा को 73 सीटें मिली थी, जबकि कांग्रेस ने 100 के आंकड़े को छू लिया था।

राजस्थान में वायरल हो रहा नारा गहलोत जी...कोनी मिले वोट जी
गहलोत जी..थाने कोनी मिले वोट जी। राजस्थान में चल रहे चुनावी दंगल में यह लाइन खूब चर्चा में है। कांग्रेस-भाजपा के समर्थक भी रचनात्मक तरीकों से चुनाव प्रचार में योगदान दे रहे हैं। एक सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने उन्हें वीडियो भेजे हैं, जिनमें छोटे-छोटे बच्चे भी बोल रहे हैं कि गहलोत जी कोनी मिले वोट जी। राजस्थान भाजपा ने पीएम के इस वीडियो को कुछ बच्चों के वीडियो के साथ पोस्ट करते हुए कहा, यह प्रदेश के बच्चे-बच्चे की आवाज है। वहीं, कांग्रेस का कहना है, ये भाजपा की आईटी सेल के बनवाए स्क्रिप्टेड वीडियो हैं। बहरहाल, यूट्यूब से लेकर जनसभाओं तक गहलोत जी, कोनी मिले वोट जी की चर्चा है। भाजपा को प्रचार के लिए हिट नारा मिल गया है।

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