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Ranthambore National Park: नहीं रही रणथम्भौर की लड़ाका बाघिन एरोहैड, अपने शावकों की जुदाई नहीं कर पाई बर्दाश्त
Thu, 19 Jun 2025 06:40 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Jun 2025 06:40 PM IST
सार
रणथम्भौर के जंगल की लड़ाका बाघिन एरोहैड आज हमेशा-हमेशा के लिए दुनिया से विदा ले गई। शायद वह अपने तीनों शावकों की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाई। इंसानों पर हमले के संदेह में उसके तीनों शावकों को दूसरे अभ्यारण्यों में शिफ्ट कर दिया गया।
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रणथम्भौर की शान बाघिन एरोहैड की मौत।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान के सबसे बड़े बाघ अभ्यारण्य की शान बाघिन एरोहैड आज दुनिया से विदा हो गई। एरोहैड के ट्यूरम था। लेकिन, उसकी मौत की एक बड़ी वजह उसका अपने शावकों से बिछड़ना भी माना जा रहा है। रणथम्भौर में बीते दिनों इंसानों पर जानलेवा हमले के संदेह में एरोहैड के तीनों शावकों को दूसरे अभ्यारण्यों में शिफ्ट कर दिया गया। इनमें दो नर शावक और एक मादा शावक कनकटी थे। कनकटी को आज ही मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया।
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एरोहैड एक बेहद शानदार बाघिन थी। जिसने रंणथम्भौर आने वाले लाखों पर्यटकों के दिलों पर अपनी दहाड़ से छाप छोड़ी थी। तीन दिन पहले एरोहैड ने यहां मगरमच्छ का शिकार भी किया था। मगरमच्छ के शिकार की विरासत एरोहैड को अपनी मांग बाघिन मछली से मिली थी, जिसे क्वीन ऑफ रणथंभौर और क्रोकोडाइल हंटर भी कहा जाता था। मां की तरह ही एरोहेड ने भी पिछले दिनों मगरमच्छ का शिकार किया था। मछली ने कई बार शावकों को जन्म दिया और आज उसी के वंशज रणथंभौर नेशनल पार्क समेत सरिस्का टाइगर रिजर्व व अन्य अभयारण्यों में घूम रहे हैं।
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