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राजस्थान में तीसरे मोर्चे की आहट: रविंद्र सिंह भाटी के साथ नरेश मीणा और यूनुस खान के जुड़ने की चर्चाएं तेज

Tue, 13 Oct 2026 11:43 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Tue, 13 Oct 2026 11:43 AM IST
सार

राजस्थान की राजनीति में निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सक्रियता और नरेश मीणा के आंदोलन में उनकी भागीदारी के बाद तीसरे राजनीतिक विकल्प की चर्चा तेज हुई है। ईडब्ल्यूएस सरलीकरण अभियान और अलग-अलग नेताओं से मुलाकातों को संभावित नए समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, किसी साझा राजनीतिक मंच या गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
 

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Rajasthan Politics: Is Ravindra Singh Bhati Preparing to Lead a Third Front?
रविंद्र सिंह भाटी और नरेश मीणा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस से अलग तीसरे राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की नरेश मीणा के आंदोलन में भूमिका, ईडब्ल्यूएस सरलीकरण को लेकर उनकी सक्रियता और दूसरे नेताओं से मुलाकातों की चर्चाओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या ये गतिविधियां किसी नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत हैं या फिलहाल अलग-अलग मुद्दों पर नेताओं की सक्रियता तक सीमित हैं?
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नरेश मीणा के अनशन में भाटी की भूमिका चर्चा में
नरेश मीणा के 11 दिन के अनशन के दौरान रविंद्र सिंह भाटी का पहुंचना और उनका अनशन तुड़वाना राजनीतिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बना। इस घटनाक्रम को दोनों नेताओं के बीच संवाद और नजदीकी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इससे किसी राजनीतिक गठबंधन की पुष्टि नहीं होती।
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इसी बीच हनुमान बेनीवाल के साथ भाटी की मुलाकातों और संवाद को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। इन घटनाक्रमों के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय ये नेता भविष्य में किसी साझा मंच पर आ सकते हैं।
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भाजपा या कांग्रेस के बजाय स्वतंत्र राह की चर्चा
रविंद्र सिंह भाटी को लेकर पहले भी भाजपा के प्रति नरम रुख की चर्चाएं सामने आती रही हैं। लेकिन उपलब्ध घटनाक्रमों के आधार पर उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। भाजपा या कांग्रेस में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनने की संभावना भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा है। फिलहाल भाटी की ओर से किसी नए राजनीतिक दल या तीसरे मोर्चे के गठन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में उनके भविष्य के राजनीतिक फैसले पर नजर बनी हुई है।

ईडब्ल्यूएस सरलीकरण अभियान कितना अहम?
पश्चिमी राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस से जुड़े नियमों के सरलीकरण को लेकर चलाए गए अभियान ने भी भाटी की सक्रियता को चर्चा में रखा है। इस मुद्दे का संबंध पात्र युवाओं और ईडब्ल्यूएस वर्ग से जुड़ी मांगों से है।

राजनीतिक दृष्टि से यह मुद्दा कितना व्यापक समर्थन हासिल करता है, यह अभियान की पहुंच, सरकार की प्रतिक्रिया और आगे होने वाली गतिविधियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इसे किसी संभावित राजनीतिक गठबंधन का निर्णायक आधार मानना जल्दबाजी होगी।

यूनुस खान से जुड़ी चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल
यूनुस खान के साथ रविंद्र सिंह भाटी की मुलाकात को लेकर सामने आई चर्चाओं ने नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलों को और हवा दी है। यदि भविष्य में नरेश मीणा, यूनुस खान और भाटी किसी साझा मंच पर आते हैं, तो उनके अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा स्वाभाविक है। हालांकि, तीनों नेताओं के बीच किसी संयुक्त राजनीतिक कार्यक्रम या गठबंधन की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित समीकरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

तीसरे मोर्चे के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
राजस्थान में किसी तीसरे राजनीतिक विकल्प के लिए केवल चर्चित चेहरों का साथ आना पर्याप्त नहीं होगा। उसे अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन खड़ा करने, मजबूत उम्मीदवारों की पहचान करने, स्थानीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख रखने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने जैसी चुनौतियों से गुजरना होगा। राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच कोई नया मंच बनता है या नहीं, यह नेताओं के आपसी तालमेल और उनके अगले कदमों से स्पष्ट होगा।


फिलहाल राजस्थान में तीसरे मोर्चे को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। रविंद्र सिंह भाटी की सक्रियता और विभिन्न नेताओं से जुड़ी चर्चाओं ने इस संभावना को राजनीतिक विमर्श में जरूर ला दिया है, लेकिन इसे किसी तय गठबंधन या चुनावी रणनीति के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।
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