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मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के छापे में बड़ा खुलासा: नमक के अपशिष्ट से बन रही थी पोटाश; किसानों से ठगी का आरोप

Sun, 21 Jun 2026 10:30 AM IST
हिमांशु सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: हिमांशु सिंह Updated Sun, 21 Jun 2026 10:30 AM IST
सार

जयपुर में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की छापेमारी में बड़ा खुलासा हुआ। जांच में नमक के अपशिष्ट से पोटाश बनाने, बिना अनुमति बायो स्टिमुलेंट बेचने और उर्वरक मानकों के उल्लंघन के मामले सामने आए। सरकार ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

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Rajasthan Minister Kirori Lal Meena Exposes Fake Fertilizer Nexus Using Salt Waste to Cheat Farmers
मंत्री किरोड़ीलाल मीणा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान में किसानों के नाम पर चल रहे कथित नकली उर्वरक कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शुक्रवार को जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (वीकेआई) में स्थित कई फर्टिलाइजर इकाइयों पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान एक इकाई में नमक के अपशिष्ट से म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) तैयार कर किसानों को बेचे जाने का मामला सामने आया।
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निरीक्षण के दौरान कृषि मंत्री ने कृषि विभाग की ओर से सील की गई नंदी फर्टिलाइजर्स इकाई का भी जायजा लिया। जांच में सामने आया कि यहां नमक के अपशिष्ट का उपयोग कर पोटाश तैयार किया जा रहा था। मंत्री ने इसे किसानों के साथ गंभीर धोखाधड़ी बताते हुए कहा कि अन्नदाताओं के हितों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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तीन स्थानों पर मिली अनियमितताएं
छापेमारी के दौरान तीन अलग-अलग स्थानों पर बिना अनुमति बायो स्टिमुलेंट, बायो फर्टिलाइजर और कथित नकली पोटाश के निर्माण व भंडारण का मामला सामने आया। जांच टीम को कई उत्पादों पर निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि (एक्सपायरी डेट) और उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ)-1985 के तहत आवश्यक मानकों का उल्लेख नहीं मिला। इसके बावजूद इन उत्पादों को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचे जाने की जानकारी सामने आई।
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बिना अनुमति चल रहा था कारोबार
रोड नंबर-7 स्थित समृद्धि सर्विसेज के सीएंडएफ गोदाम पर भी कार्रवाई की गई। जांच में पाया गया कि यहां बिना अनुमति बायो स्टिमुलेंट की आपूर्ति की जा रही थी, जबकि राजस्थान में इसके विक्रय पर रोक लागू है। वहीं चित्तारी एग्री केयर में भी बिना अनुमति विभिन्न कृषि उत्पादों का भंडारण और वितरण किए जाने के संकेत मिले हैं।

सब्सिडी में गड़बड़ी की भी आशंका
एक अन्य गोदाम में ऐसे तरल और किण्वित ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर मिले, जो लाइसेंस में दर्ज नहीं थे। अधिकारियों को आशंका है कि इन उत्पादों पर केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली प्रति टन 1500 रुपये की सब्सिडी भी अनियमित तरीके से प्राप्त की जा रही थी। मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

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दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध इकाइयों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए, उत्पादों के नमूनों की जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।उन्होंने पूरे प्रदेश में नकली और अवैध कृषि उत्पादों के कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं।

किसानों के हितों से समझौता नहीं
डॉ. मीणा ने कहा कि नकली और घटिया कृषि उत्पाद किसानों की मेहनत, आय और फसल उत्पादन को प्रभावित करते हैं। इससे भूमि की उर्वरता और खाद्यान्न की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
 
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