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Panchana Dam: पांचना पर कब्जे की जंग, पानी के लिए आमने-सामने 74 गांव; संघर्ष की आहट तेज

Sat, 20 Jun 2026 04:12 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/ करौली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/ करौली Published by: Sourabh Bhatt Updated Sat, 20 Jun 2026 04:12 PM IST
सार

पांचना बांध जल विवाद पर प्रशासन की दो दौर की वार्ता बेनतीजा रही। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पानी नहीं छोड़े जाने पर आंदोलनकारी 28 जून के बाद रेल रोको की चेतावनी दे रहे हैं।

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Panchana Dam Water Dispute Remains Unresolved: Talks Fail, Protesters Warn of Rail Blockade After June 28
पांचना बांध को लेकर गुर्जर समाज के लोग धरने पर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करौली जिले के पांचना बांध के पानी को लेकर गुर्जर और मीणा समुदाय के बीच चल रहा विवाद अभी सुलझता नजर नहीं आ रहा है। प्रशासन की ओर से दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ की गई दो दौर की वार्ता बेनतीजा रही है। अब 28 जून के बाद आंदोलन तेज होने और रेल-रोको जैसे कार्यक्रमों की चेतावनी दी गई है।

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भरतपुर संभागीय आयुक्त नलिनी कठौतिया ने बताया कि प्रशासन लगातार दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक सहमति नहीं बन पाई है। करौली और सवाई माधोपुर के जिला कलेक्टरों को भी स्थानीय लोगों से संवाद कर समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को एक ओर राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करनी है, वहीं दूसरी ओर शांति और कानून व्यवस्था भी बनाए रखनी है।

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पांचना बांध विवाद को लेकर गुरुवार और शुक्रवार को भरतपुर संभागीय आयुक्त कार्यालय में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। दूसरी तरफ सवाई माधोपुर के खंडीप गांव में धरने का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस विधायक रामकेश मीणा ने आरोप लगाया कि बांध पर कुछ लोगों ने कब्जा जैसा माहौल बना रखा है और वे नहरों में पानी छोड़ने से रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि बांध सरकारी संपत्ति है, ऐसे में किसी को पानी रोकने का अधिकार नहीं है।

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विधायक बोले- 20 साल से सिंचाई के पानी का इंतजार
रामकेश मीणा का कहना है कि कमांड एरिया के 35 गांव करीब 20 साल से सिंचाई के पानी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि हाईकोर्ट भी पानी छोड़ने का आदेश दे चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 28 जून तक मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा। इसके तहत रेलवे ट्रैक जाम, हाईवे जाम या जयपुर में मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

74 गांवों की लड़ाई- पांचना का पानी पहले किसे मिले
विवाद की जड़ पांचना बांध के पानी के वितरण को लेकर है। करौली जिले के बांध के आसपास बसे 39 गांव चाहते हैं कि पहले उन्हें सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाए। वहीं सवाई माधोपुर जिले के कमांड एरिया के 35 गांवों की मांग है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार तुरंत नहरों में पानी छोड़ा जाए।

प्रदर्शनकारियों का दावा- करीब 10 हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पानी नहीं मिलने से करीब 9,985 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हो रही है और किसानों को पिछले दो दशकों में लगभग 200 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।

नेताओं के बयान
सचिन पायलट:  कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा है कि सरकार को दोनों पक्षों से संवाद कर सहमति के आधार पर समाधान निकालना चाहिए और न्यायालय के आदेशों का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए।

विजय बैंसला: वहीं गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक विजय बैंसला ने आरोप लगाया कि कुछ नेता इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को निशाना बनाने वाली बयानबाजी से बचना चाहिए और सरकार को सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान निकालना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की पत्नी और पूर्व विधायक गोलमा देवी भी नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर चल रहे धरने में शामिल हो चुकी हैं। इससे यह विवाद अब केवल जल बंटवारे का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय राजनीति और आगामी पंचायत-निकाय चुनावों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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