कुनो-गांधी सागर चीता कॉरिडोर पर लगा ब्रेक: राजस्थान के साथ एमओयू से मध्यप्रदेश ने क्यों खींचे हाथ; जानिए वजह
राजस्थान में चीता कॉरिडोर बनाने की योजना को झटका लगा है। मध्यप्रदेश ने इसके लिए प्रस्तावित कुनो–गांधी सागर अंतरराज्यीय कॉरिडोर परियोजना को राजस्थान के साथ मिलकर चलाने से साफ मना कर दिया है। इस बजट घोषणा का भविष्य क्या होगा यह देखने वाली बात होगी
विस्तार
राजस्थान में चीतों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए प्रस्तावित कुनो–गांधी सागर अंतरराज्यीय कॉरिडोर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्थान के साथ मिलकर इस परियोजना को आगे बढ़ाने से मौखिक रूप से इनकार कर दिया है। ऐसे में राजस्थान के बजट में घोषित करीब 17 हजार वर्ग किलोमीटर के इस कॉरिडोर का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राजस्थान की ओर से भेजे गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के मसौदे पर मध्यप्रदेश ने फिलहाल आगे बढ़ने से मना किया है। मध्यप्रदेश का तर्क है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय चीता परियोजना संचालन समिति के प्रमुख राजेश गोपाल के मार्गदर्शन में देशभर के लिए चीता लैंडस्केप प्लान तैयार कर रहा है। इस योजना के तहत उन वन क्षेत्रों और अभयारण्यों में आवास प्रबंधन, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा, जहां चीतों की आवाजाही हो रही है।
जंगल से बाहर चीतों की आवाजाही पर बनेगी राष्ट्रीय योजना
राजेश गोपाल के मुताबिक, प्रस्तावित राष्ट्रीय योजना का मुख्य जोर बाड़ों से बाहर निकलकर इंसानी आबादी वाले क्षेत्रों और अलग-अलग राज्यों के वन क्षेत्रों में पहुंचने वाले चीतों के प्रबंधन पर होगा। इसके लिए चीतों की पिछली गतिविधियों का अध्ययन कर बड़े भू-भाग के स्तर पर एक मास्टर प्लान बनाया जाएगा। इसमें संरक्षित क्षेत्र, आरक्षित वन और राजस्व भूमि सहित अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों में चीतों की निगरानी और प्रबंधन की व्यवस्था शामिल होगी।
योजना में मानव-चीता संघर्ष की स्थिति से निपटने के लिए वन और पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारियां भी तय की जाएंगी। इसके लिए अन्य बड़ी बिल्लियों जैसे बाघ और लेपर्ड के प्रबंधन की तर्ज पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का प्रस्ताव है। साथ ही वन्यजीव संरक्षण और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। गोपाल ने चीता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को अहम बताते हुए कहा कि लोगों के साथ ऐसा सहयोग विकसित करना होगा, जिससे दोनों पक्षों को लाभ हो।
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राजस्थान के सात जिलों से गुजरना है कॉरिडोर
प्रस्तावित कॉरिडोर का उद्देश्य मध्यप्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के जरिए जोड़ना है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की कार्ययोजना के अनुसार, भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून की तैयार योजना में मध्यप्रदेश के करीब 10,500 वर्ग किलोमीटर और राजस्थान के 6,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया है।
राजस्थान में इस कॉरिडोर के लिए कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, सवाई माधोपुर, करौली और चित्तौड़गढ़ जिलों की पहचान की गई है। मध्यप्रदेश के आठ जिलों को भी इसमें शामिल करने का प्रस्ताव है। जरूरत के अनुसार इस लैंडस्केप को उत्तर प्रदेश के झांसी और ललितपुर के वन क्षेत्रों तक बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है।
चीतों की राजस्थान में आवाजाही से बढ़ी मांग
कुनो से चीतों के बार-बार राजस्थान पहुंचने के कारण इस कॉरिडोर की जरूरत पर फिर चर्चा तेज हुई है। मार्च 2026 में एनटीसीए ने चीते KP-2 और KP-3 की आवाजाही का हवाला देते हुए प्रस्तावित अंतरराज्यीय कॉरिडोर की अहमियत पर जोर दिया था।
इस परियोजना पर नवंबर 2024 में चीता परियोजना संचालन समिति और दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा हुई थी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति भी बनी थी। इसके बाद राजस्थान सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में चीता कॉरिडोर की घोषणा की थी।
अब मध्यप्रदेश के प्रस्तावित परियोजना से पीछे हटने से दोनों राज्यों के बीच प्रस्तावित योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, केंद्र की राष्ट्रीय लैंडस्केप योजना के जरिए अलग-अलग राज्यों में चीतों की आवाजाही और संरक्षण को लेकर व्यापक व्यवस्था बनाने की तैयारी है।
हाड़ौती में भी उठी राजस्थान को चीता परियोजना में शामिल करने की मांग
इस बीच, राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में वन्यजीव प्रेमियों और ग्रामीणों ने राज्य को औपचारिक रूप से प्रोजेक्ट चीता में शामिल करने की मांग उठाई है। करीब दो सप्ताह पहले उन्होंने वन अधिकारियों को ज्ञापन देकर कहा कि चीते खुद राजस्थान की ओर आ रहे हैं, इसलिए राज्य को उनके संरक्षण की योजना से अलग नहीं रखा जाना चाहिए।
यह मांग मादा चीता वीरा के बारां में लंबे समय तक रहने के बाद तेज हुई। बाद में उसे बेहोश कर वापस कुनो ले जाया गया था। वन्यजीव प्रेमियों का तर्क है कि कुनो से चीतों का राजस्थान पहुंचना संरक्षण के लिए अवसर हो सकता है, इसे केवल प्रबंधन की चुनौती के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत में चीता पुनर्वास परियोजना सितंबर 2022 में शुरू हुई थी। देश में चीते 1952 में विलुप्त घोषित किए गए थे। इसके बाद सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीते और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते भारत लाए गए थे।