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‘गांधी का आजादी में योगदान नहीं था': जयपुर डायलॉग्स के संस्थापक का बड़ा दावा, गंगा-जमुनी तहजीब पर क्या बोले?

Sat, 24 Oct 2026 12:04 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Sat, 24 Oct 2026 12:04 PM IST
सार

जयपुर डायलॉग्स के संस्थापक संजय दीक्षित ने कहा कि देश की आजादी में महात्मा गांधी का योगदान नहीं था। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने आजादी के पीछे आजाद हिंद फौज और सुभाष चंद्र बोस को प्रमुख कारण बताया था।

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Mahatma Gandhi Had No Role in India’s Independence, Says Jaipur Dialogues Founder Sanjay Dixit
जयपुर डायलॉग के संस्थापक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी संजय दीक्षित - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जयपुर डायलॉग्स अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर जयपुर में आयोजित होने जा रहा है। इस बार कार्यक्रम की थीम ‘बैटल फॉर इंडिया’ रखी गई है। आयोजन में देश-विदेश के कई प्रमुख वक्ताओं के शामिल होने की संभावना है। जयपुर डायलॉग्स के संस्थापक और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी संजय दीक्षित ने अमर उजाला से खास बातचीत में मंच की स्थापना, उसके उद्देश्यों और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

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दीक्षित ने बताया कि जयपुर डायलॉग्स की शुरुआत एक अन्य संवाद कार्यक्रम के अनुभव के बाद हुई। उनके मुताबिक, वहां उन्हें लगा कि एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों को ही मंच पर प्रमुखता दी जाती है, जबकि दूसरी विचारधारा के लोगों के प्रति उपेक्षा का रवैया अपनाया जाता है। इसी अनुभव के बाद उन्होंने ऐसा मंच बनाने का विचार किया, जहां अलग-अलग विचार रखने वाले लोगों को अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अवसर मिल सके।

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‘डायलॉग्स नहीं, मोनोलॉग’ के आरोपों पर क्या बोले दीक्षित?
जयपुर डायलॉग्स पर एक ही विचारधारा को बढ़ावा देने के आरोपों और इसे संवाद के बजाय एकतरफा बातचीत यानी ‘मोनोलॉग’ कहे जाने के सवाल पर दीक्षित ने कहा कि मंच ने दूसरी विचारधारा के लोगों को भी आमंत्रित करने के प्रयास किए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग सभी लोगों को निमंत्रण भेजा गया। उनके मुताबिक, खुले मंच से भी लोगों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया, लेकिन वे नहीं आए।

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दीक्षित ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर का उदाहरण देते हुए कहा कि उनसे लगातार बातचीत होती रही थी। उनके अनुसार, थरूर ने अंतिम समय में पार्टी के काम से बेंगलुरु जाने की बात कहकर जयपुर आने में असमर्थता जताई थी। दीक्षित ने दावा किया कि उसी शाम थरूर बेंगलुरु लिटरेचर फेस्टिवल में भाषण देते नजर आए। उन्होंने कहा कि जयपुर डायलॉग्स के मंच से दूरी बनाए रखने की वजह संबंधित लोग ही बेहतर बता सकते हैं।


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‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की अवधारणा पर उठाए सवाल
गंगा-जमुनी तहजीब के सवाल पर दीक्षित ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गंगा और यमुना का मुगलों से संबंध नहीं है और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ शब्द का इस्तेमाल मुगलों को खुश करने के लिए किया गया। उन्होंने इस अवधारणा के उद्भव पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को इस तरह के शब्दों से परिभाषित करने की जरूरत नहीं है। राजनीतिक विचारधारा पर बात करते हुए दीक्षित ने कहा कि मूल मुद्दा व्यक्ति नहीं, बल्कि उस पर थोपी गई विचारधारा है। अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच मैच हो तो वह पाकिस्तान के बजाय अमेरिका के साथ खड़े होंगे।

महात्मा गांधी के योगदान पर दीक्षित का बड़ा दावा
महात्मा गांधी के योगदान को लेकर भी दीक्षित ने विवादित दावा किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में गांधी का योगदान नहीं था। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने 1956 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली के कलकत्ता दौरे से जुड़ा चर्चित प्रसंग सुनाया। दीक्षित के अनुसार, जब एटली से भारत को निर्धारित समय से पहले आजादी मिलने का कारण पूछा गया तो उन्होंने आजाद हिंद फौज और सुभाष चंद्र बोस को इसकी प्रमुख वजह बताया। गांधी के योगदान के बारे में पूछे जाने पर एटली के कथित जवाब को दीक्षित ने ‘मिनिमल’ बताया।

‘राष्ट्रवाद का महाकुंभ है जयपुर डायलॉग्स’
दीक्षित ने कहा कि वह तथ्यों और सबूतों के आधार पर बात करना पसंद करते हैं और इसी वजह से कई बार लोग उनसे दूरी बना लेते हैं। उन्होंने जयपुर डायलॉग्स को साहित्य का महाकुंभ नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रवाद का महाकुंभ’ बताया। उनके मुताबिक, साहित्य के मंच के लिए विचार पर्याप्त हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रवाद के मंच से जुड़ने के लिए मन, कर्म और विचार, तीनों की आवश्यकता होती है।

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