फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Jaipur Among India’s Noisiest Cities; Pressure Horns Causing Permanent Hearing Loss, Says ENT Expert

Jaipur News: जयपुर में प्रेशर हॉर्न कर रहे लोगों को बहरा, 80 डेसिबल तक डेसीबल तक पहुंचा शोर

Thu, 13 Nov 2025 04:25 PM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Thu, 13 Nov 2025 04:25 PM IST
सार

राजस्थान की राजधानी जयपुर देश का चौथा सबसे शोरगुल वाला शहर बन गया है। SMS अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मोहनीश ग्रोवर के अनुसार, ट्रैफिक में बजने वाले प्रेशर हॉर्न लोगों को धीरे-धीरे बहरा बना रहे हैं। जयपुर में शोर का स्तर 80 डेसीबल तक पहुंच गया है।

विज्ञापन
Jaipur Among India’s Noisiest Cities; Pressure Horns Causing Permanent Hearing Loss, Says ENT Expert
ध्वनि प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 शहरों में बढ़ती आबादी और ट्रैफिक का दबाव लोगों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर असर डाल रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर देश का चौथा सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण वाला शहर बन गया है। सवाई मानसिंह अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मोहनीश ग्रोवर के अनुसार, ट्रैफिक में बजने वाले प्रेशर हॉर्न शहरवासियों को धीरे-धीरे सुनने की क्षमता खोने की ओर धकेल रहे हैं। एसएमएस अस्पताल के ईएनटी विभाग में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी हीयरिंग लॉस (सुनने की क्षमता कम होना) ट्रैफिक शोर की वजह से हो रही है। डॉ. ग्रोवर का कहना है कि जयपुर में ध्वनि प्रदूषण दिल्ली से भी अधिक पाया गया है।

विज्ञापन

तय मानकों से ज्यादा शोर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार दिन में ट्रैफिक शोर 53 डेसीबल और रात में 45 डेसीबल से कम होना चाहिए। लेकिन जयपुर के व्यस्त इलाकों में शोर का स्तर 80 डेसीबल तक पहुंच जाता है, जिससे कानों की आंतरिक झिल्ली को स्थायी नुकसान होता है।

विज्ञापन


यह भी पढें- Rajasthan: जयपुर में हुआ देश का पहला सिक्योरिटी सिनर्जी सेमिनार, भविष्य के युद्धों पर हुई गहन चर्चा

विज्ञापन
विज्ञापन

लगातार शोर से बढ़ते खतरे

  • कानों में हर वक्त सिटी या गूंज की आवाज़ रहना

  • दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा

  • मानसिक तनाव, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ का बढ़ना

  • सुनने की क्षमता में स्थायी कमी

कैसे बचें ध्वनि प्रदूषण से

डॉ. ग्रोवर के अनुसार, थोड़ी सावधानी से इस खतरे से बचा जा सकता है। इसके लिए  अनावश्यक हॉर्न बजाने से बचें, बाइक चलाते समय कान ढकें, कार में शीशे बंद रखें, कानों में रूई लगाकर रखें व सुनने की क्षमता कम लगने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

बढ़ रहे मरीज

डॉ. ग्रोवर ने बताया कि एसएमएस अस्पताल के ईएनटी विभाग में रोज़ाना 8 से 10 प्रतिशत मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिनकी सुनने की क्षमता ध्वनि प्रदूषण के कारण कम हो रही है। लगातार तेज आवाज में रहने से कान की नसों को नुकसान होता है, जो ठीक नहीं हो पाता।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed