फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Caste Census: Who benefits and who loses from caste census in Rajasthan, politics even runs on gotra here

Caste Census: जातिगत जनगणना से राजस्थान में किसे फायदा-किसे नुकसान, यहां गौत्र तक चलती है सियासत

Thu, 01 May 2025 01:29 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Thu, 01 May 2025 01:29 PM IST
सार

जातिगत जनगणना को लेकर अब राजस्थान में सियासी रुझान आने शुरू हो चुके हैं। बीजेपी और कांग्रेस के नेता इस फैसले को लेकर अपने-अपने पक्ष में बयान दे रहे हैं। हालांकि यह मुद्दा पूरे देश को प्रभावित करने वाला है लेकिन राजस्थान के लिए यह सबसे अहम है। क्योंकि यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति को पूरी तरह बदलने की ताकत रखता है। अपने गठन के समय से ही राजस्थान जातियों के वर्चस्व में बंटा हुआ है। यहां लगभग 200 जातियां हैं, जिनमें मुख्य रूप से 16 जातियां सबसे ज्यादा प्रभावशाली हैं।

विज्ञापन
Caste Census: Who benefits and who loses from caste census in Rajasthan, politics even runs on gotra here
राजस्थान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्र की मोदी सरकार ने आखिरकार जातिगत जनगणना का पिटारा खोल दिया।  बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में जातिगत जनगणना करवाने का फैसला ले लिया गया। हालांकि इस प्रक्रिया को शुरू होने में अभी कम से कम अक्टूबर तक का इंतजार करना होगा क्योंकि 30 जून तक सेंसस को लेकर बॉर्डर सील करने का नोटिफिकेशन पहले से जारी हो चुका है। यदि इसमें और संशोधन नहीं होते हैं तो इसके बाद कम से कम 3 महीने जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने में और लगेंगे।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Udaipur News: शादी से लौटते वक्त तेज रफ्तार कार ने असंतुलित होकर तीन बार पलटी मारी, महिला की मौत, 4 गंभीर घायल
विज्ञापन


राजस्थान के लिए जातिगत जनगणना एक बड़ा सियासी मुद्दा है क्योंकि राजस्थान जातियों के वर्चस्व में बंटा राज्य है। जहां लोकसभा, विधानसभा से लेकर पंचायत चुनावों तक पर जातियों का प्रभाव हमेशा रहा है। यह मुद्दा राजस्थान के लिए कितना अहम है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने राजस्थान में जातिगत जनगणना करवाने का वादा किया था। यहां की सियासत में जातिगत समीकरण कितने ज्यादा हावी रहते हैं यह चुनावों में देखा जा सकता है, जहां जाति से भी आगे गौत्र तक की सियासी गोलबंदी की जाती है। जातियों के दबदबे का ही प्रभाव है कि प्रदेश में इसे लेकर कई बड़े आंदोलन हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गुर्जर आंदोलन में गई 72 की जान

जातिगत आरक्षण को लेकर राजस्थान में समय-समय पर कई बड़े आंदोलन भी हुए हैं। इनमें पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के कार्यकाल में हुए गुर्जर आरक्षण आंदोलन में 72 लोगों की पुलिस फायरिंग में जान चली गई थी। गुर्जर आरक्षण आंदोलन 2007 में शुरू हुआ था और 2019 तक इसे लेकर करीब 5 बार बड़े आंदोलन किए गए, जिसमें रेल नेटवर्क तक को जाम किया गया।

भरतपुर में 25 साल पुराना है जाट आरक्षण का इतिहास

भरतपुर संभाग में जाटों को आरक्षण दिए जाने की मांग भी राजस्थान में दो दशक से ज्यादा लंबे असरे से चलती आ रही है। मौजूदा भजनलाल सरकार में भी भरतपुर में जाट आरक्षण आंदोलन ने एक बार फिर आग पकड़ी। राजस्थान में भरतपुर ओर धौलपुर के जाटों को छोड़कर शेष इलाकों में रहने वाले जाटों को ओबीसी कैटेगिरी में आरक्षण मिल रहा है। इसलिए इन दो जिलों के जाट आरक्षण की मांग को लेकर लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। 

ये भी पढ़ें: Rajasthan News: बम-बम भोले के जयघोष से गूंजी छोटी काशी, आज से जयपुर में शुरू होगा पं. प्रदीप मिश्रा का कथावाचन

वागड़ में आरक्षण पर नई जंग शुरू

प्रदेश के वागड़ में भी जातिगत जनगणना की मांग अरसे से की जा रही है। यहां डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर सहित करीब 8 जिलों में 92 लाख की आबादी आदिवासी है, जिन्हें एसटी आरक्षण मिला हुआ है। लगभग 25 विधानसभा सीटें इस दायरे में आती हैं लेकिन यहां की मांग अब एसटी आरक्षण में सब कैटेगराइजेशन को लेकर है। डूंगरपुर-बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत का कहना है कि हम चाहते हैं कि राजस्थान में एसटी आरक्षण को 4 सब कैटेगिरी में विभाजित किया जाए और यह सब कैटेगिरी क्षेत्रीय आधार पर हो ना कि जातीय आधार पर? 

पूर्व में भी यहां एसटी आरक्षण को जातीय आधार पर बांटने का षड्यंत्र किया जा चुका है। जातीय आधार पर भील, मीना, सहरिया, गरासिया, दामोर, दामरिया, धनका, नायक, पटेलिया सहित 12 सब कैटेगिरी हैं। इससे एसटी वर्ग आपस में ही लड़ेगा, वहीं क्षेत्रीय आधार पर इसे सिर्फ 4 श्रेणी में ही विभाजित करना होगा।


राजस्थान में जातिगत वर्गीकरण

जातिगत वर्गीकरण के हिसाब से देखें तो राजस्थान में करीब 200 जातियां हैं। इसमें एसटी में 23, एसटी में 74 व ओबीसी में 56 जातियां हैं, इसके अलावा सामान्य वर्ग में भी लगभग 61 जातियां शामिल हैं।

ये भी पढ़ें: Rajasthan: पांच हजार फीट ऊंचे गांव में पहुंचा पहला ट्रैक्टर, असेंबल भी वहीं हुआ; अब बैलों के सहारे न होगी खेती

एक्सपर्ट कमेंट्स-

वरिष्ठ पत्रकार मनीष गोधा का मानना है कि जातिगत जनगणना के बाद जब आंकड़े सामने आएंगे, तब यहां निश्चित रूप से बहुत सारी चीजें बदलेंगी। कई सीटों के समीकरण बदलेंगे। अभी तक जो भी चल रहा है, अंदाजे पर चल रहा है। बाद में राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति नए सिरे से तय करनी होगी। जिन सीटों पर अरसे से एक जाति का वर्चस्व चलता आ रहा है, हो सकता है जनगणना के बाद वहां स्थितियां पूरी तरह बदल जाएं।

वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश भंडारी का कहना है कि भारत में इतनी डायवर्सिटी है कि उसमें जातिगत जनगणना की विपक्ष की मांग जायज थी। राजस्थान में जितनी भी जातियां हैं, उनमें से अधिकांश का प्रशासन व राजनीति में प्रतिनिधत्व न के बराबर है। मसलन जब जातिगत जनगणना होगी तो मीणा जाति में भी उपजातियां गिनी जाएंगी। इसमें आदिवासी कौन है, कृषक कौन है। इसी तरह ओबीसी में भी वर्गीकरण होगा, जिससे सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed