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Rajasthan: जयपुर पहुंचे जमाल सिद्दीकी, संत कमलेश जी महाराज से की मुलाकात; बोले- मैं सनातनी मुसलमान हूं

Mon, 24 Aug 2026 05:06 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Mon, 24 Aug 2026 05:06 PM IST
सार

जयपुर पहुंचे भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने संत कमलेश जी महाराज से मुलाकात की। उन्होंने खुद को ‘सनातनी मुसलमान’ बताया। वंदे मातरम विवाद पर कांग्रेस को घेरा और मुस्लिम समाज से विकसित भारत में भागीदारी की अपील की।

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BJP Minority Morcha Former Chief Jamal Siddiqui Visits Sanatan Guru, Says I Am a Sanatani Muslim
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी सोमवार को जयपुर पहुंचे। उन्होंने गायत्री भवन आश्रम में संत कमलेश जी महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। सिद्दीकी ने कहा कि आश्रम पहुंचने से पहले वह थके और निराश थे, लेकिन संत से मुलाकात के बाद उन्हें नई ऊर्जा का अनुभव हुआ। उन्होंने संत द्वारा उनकी धार्मिक मर्यादाओं का सम्मान किए जाने की भी सराहना की।

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संत के दरबार में पहुंचने और सनातन परंपरा से जुड़े सवालों के बीच जब सिद्दीकी से उनकी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने खुद को ‘सनातनी मुसलमान’ बताया। उन्होंने कहा कि वे इस्लाम की पूजा पद्धति को मानते हैं, लेकिन भारत की संस्कृति, परंपराओं और सनातन मूल्यों का सम्मान करते हैं। सिद्दीकी ने कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमान इसी देश की परंपरा और संस्कृति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि संत कमलेश जी महाराज ने उनकी धार्मिक पहचान और मर्यादा को समझते हुए जिस तरह सम्मान दिया, वह सामाजिक समरसता का उदाहरण है।

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अल्पसंख्यक मोर्चे की भूमिका पर बोले सिद्दीकी
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर सिद्दीकी ने कहा कि पार्टी में सम्मान धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर नहीं, बल्कि काम और जिम्मेदारी के आधार पर मिलता है। उन्होंने कहा कि करीब 24 वर्षों के राजनीतिक जीवन में उन्होंने भाजपा के भीतर इस व्यवस्था को देखा है।

उन्होंने कहा कि पार्टी में पद सीमित होते हैं और किसी समय किसी समुदाय की पदों में भागीदारी कम या ज्यादा हो सकती है, लेकिन मान-सम्मान और सरकारी योजनाओं का लाभ इससे अलग विषय हैं। सिद्दीकी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में मुस्लिम समाज सहित अल्पसंख्यक वर्ग को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को आगे बढ़ाना भाजपा की विचारधारा का हिस्सा है। उनके अनुसार ‘अंतिम व्यक्ति’ की कोई धार्मिक पहचान तय नहीं की गई थी, इसलिए विकास और कल्याण की योजनाओं का लाभ सभी समुदायों तक पहुंचना चाहिए।

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वंदे मातरम विवाद पर कांग्रेस पर निशाना
वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर भी सिद्दीकी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों को राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। सिद्दीकी ने कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमानों को देश की राष्ट्रीय भावना का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को वंदे मातरम से आपत्ति है तो उसे यह विचार करना चाहिए कि वह भारत की साझा राष्ट्रीय और सांस्कृतिक विरासत को किस नजरिए से देखता है।

विभाजन का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले लोगों ने इस देश को अपना घर माना है। ऐसे में अब देश की मजबूती और विकास में योगदान देना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वह विवादों में उलझने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में भागीदार बने।

उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और सभ्यता उसकी बड़ी ताकत है। देश को विश्वगुरु बनाने के लिए सभी समुदायों को साथ लेकर चलना जरूरी है। राष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें देश की एकता और विकास के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए। संत कमलेश जी महाराज से मुलाकात, खुद को ‘सनातनी मुसलमान’ बताए जाने और वंदे मातरम विवाद पर दिए बयान के बाद जमाल सिद्दीकी का जयपुर दौरा राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से चर्चा में रहा।

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