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Jagdeep Dhankhar: अब देश के दोनों सदनों की बागडोर राजस्थान के नेताओं के हाथ में, धनखड़ और बिरला का यह है नाता
Sat, 06 Aug 2022 08:05 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Sat, 06 Aug 2022 08:05 PM IST
सार
जगदीप धनखड़ की जीत के बाद देश के दोनों संसदों में राजस्थान का कद और बढ़ गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी प्रदेश के रहने वाले हैं। इसके अलावा मोदी कैबिनेट में भी राजस्थान के चार नेता शामिल हैं।
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जयदीप धनखड़ और ओम बिरला।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
एनडीए के उम्मीदवार और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ देश के उपराष्ट्रपति बन गए हैं। शनिवार को उपराष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की। विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, यह पहले से तय था कि अल्वा धनखड़ को हरा नहीं पाएंगी। जगदीप धनखड़ की जीत के बाद देश के दोनों सदनों के प्रमुख राजस्थान के नेता बन गए हैं। बता दें कि जगदीप धनखड़ को 528 और मार्गरेट अल्वा को 182 वोट मिले हैं। आंकड़ों के लिहाज से विपक्ष की उम्मीदवार को करारी हार का सामना करना पड़ा है।
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दरअसल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी राजस्थान के कोटा के रहने वाले हैं। अब जगदीप धनखड़ राज्यसभा के प्रमुख होंगे। ऐसे में देश की दो सबसे बड़ी पंचायतों में राजस्थान मूल के नेता प्रमुख बन गए हैं। जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति बनने के बाद भाजपा को 2023 के विधानसभा चुनाव में राजस्थान में सियासी फायदा भी होगा। उनकी जीत से संसद में राजस्थान का कद और बढ़ गया है। बता दें कि वर्तमान में मोदी कैबिनेट में राजस्थान के चार नेता शामिल हैं। इनमें गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, कैलाश चौधरी और भूपेंद्र यादव के नाम शामिल हैं।
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देश के नए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का राजस्थान से पुराना नाता है। उनका जन्म झुंझुनू जिले के किथाना में गांव 18 मई 1951 को हुआ था। वह सुप्रीम कोर्ट के कामयाब वकील भी रह चुके हैं। इसके अलावा 1989 में वह झुंझनू लोकसभा सीट से सांसद बने थे। 1993 में किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से वह विधायक भी चुने गए थे। धनकड़ जाट समाज से आते हैं। वह जाट महासभा की आरक्षण समिति के प्रवक्ता भी रह चुके हैं। उन्होंने राजस्थान में जाटों के आरक्षण और ओबीसी का दर्जा दिलाने के लिए काफी मेहनत की थी।
भैरोंसिंह शेखावत भी रह चुके हैं उपराष्ट्रपति
राजस्थान के सीकर जिले के गांव खाचरियावास के एक गरीब राजपूत परिवार में 23 अक्टूबर 1923 को जन्मे भैरोंसिंह शेखावत भी उपराष्ट्रपति रह चुके हैं। 1952 में देश में पहली बार हुए आम चुनाव में शेखावत ने सीकर जिले के दांतारामगढ विधानसभा क्षेत्र से भाग्य आजमाया और विधायक बने। इसके बाद उनक राजनीतिक सफर लगातार परवान चढ़ता रहा। 2002 से 2007 तक शेखावत देश के उपराष्ट्रपति रहे। 15 मई 2010 को इनका निधन हो गया था।