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Ajmer: न कंपनी, न करोड़ों का कारोबार...फिर दर्जी के नाम 974 करोड़ का आयकर बकाया, जांच शुरू

Thu, 20 Aug 2026 09:15 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 20 Aug 2026 09:15 PM IST
सार

अजमेर में 62 वर्षीय दर्जी रेखराज ठाडा के नाम 974 करोड़ रुपये का आयकर बकाया सामने आया है। परिवार का दावा है कि पैन कार्ड और दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियां बनाई गईं। आयकर विभाग और पुलिस मामले की जांच कर रहे हैं।

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Income tax notice of ₹974 crore issued to ordinary tailor PAN card misuse alleged
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक साधारण दर्जी के नाम पर बिना किसी कारोबार के 974 करोड़ रुपये का आयकर बकाया निकलने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आयकर विभाग के नोटिस के अनुसार, दर्जी के पैन कार्ड का कथित रूप से दुरुपयोग कर अज्ञात लोगों ने बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन किए। करोड़ों रुपये का कारोबार नहीं होने के बावजूद विभाग की ओर से इतनी बड़ी राशि का कर दायित्व तय किया गया है।

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फर्जी कंपनियों के जरिए बड़ा खेल
गोविंदगढ़ निवासी 62 वर्षीय टेलर रेखराज ठाडा को आयकर विभाग ने नोटिस भेजकर 20 अगस्त तक जवाब मांगा था। परिवार ने परिचित सीए की मदद से रिकॉर्ड की जांच कराई तो सामने आया कि सूरत की जय बाबेरी डायमंड प्राइवेट लिमिटेड में रेखराज का नाम निदेशक के तौर पर दर्ज है। एक अन्य डायमंड कंपनी में भी उन्हें निदेशक बताया गया है। परिवार का दावा है कि रेखराज का इन कंपनियों से कोई संबंध नहीं है। उन्हें इन कंपनियों के बारे में जानकारी तक नहीं है। परिवार के अनुसार, रेखराज कभी गुजरात भी नहीं गए हैं।

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आयकर विभाग के अनुसार, रेखराज के पैन कार्ड का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी व्यावसायिक संस्थाएं बनाई गईं। इन कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन किए गए। विभाग की मूल्यांकन रिपोर्ट में इन लेनदेन के आधार पर 974 करोड़ रुपये का कर दायित्व सामने आया है। परिवार का आरोप है कि रेखराज के पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाते और कंपनियां संचालित की गईं। आशंका है कि अलग-अलग कामों के लिए दिए गए पहचान पत्र और पैन कार्ड की प्रतियों का गलत इस्तेमाल किया गया।

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पुलिस और आयकर विभाग में शिकायत
रेखराज ने स्थानीय पुलिस अधीक्षक और आयकर विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि वह सिलाई का काम करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं और उनका किसी बड़ी कंपनी, फर्म या करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन से कोई संबंध नहीं है। रेखराज ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उनके खिलाफ जारी आयकर नोटिस को रद्द करने की मांग की है।

फर्जीवाड़े की जांच शुरू
आयकर विभाग और पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित कंपनियों के बैंक खातों, लेनदेन और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस दस्तावेजों की कूटरचना और धोखाधड़ी से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि रेखराज के पैन और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किसने किया और इन कंपनियों के जरिए हुए वित्तीय लेनदेन के पीछे कौन लोग शामिल हैं।

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