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राजस्थान के पांच सपूत शहीद, दो माह की बच्ची को आंख भरकर देख भी नहीं पाए थे रोहिताश

Sat, 16 Feb 2019 03:03 AM IST
अल्पना शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अल्पना शर्मा Updated Sat, 16 Feb 2019 03:03 AM IST
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Five martyrs of Rajasthan in Pulwama Massacre, Jammu Kashmir Terrorist Attack
pulwama attack - फोटो : अमर उजाला

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा की आतंकी घटना के बाद से पूरे देश के साथ राजस्थान में भी पांच सपूत शहीद हुए हैं, जिससे पूरे प्रदेश में शोक की लहर छाई रही। शहीदों के परिजनों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रदेश में ये खबर सदमे की तरह आई। शहीदों के घरों पर जन सैलाब उमड़ा। शहीदों के परिजनों के विलाप ने सभी की आंखों में पानी भर दिया।

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बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक ने इस शहादत का घातक बदला लेकर आतंकियों को यादगार सबक सिखाने की भावना सामने रखी। राजधानी जयपुर सहित सभी जिलों तथा छोटे कस्बों व गांवों तक में बृहस्पतिवार रात से शुक्रवार आधी रात तक जगह-जगह पाकिस्तान मुर्दाबाद की गूंज सुनाई देती रही। सुबह शासन सचिवालय, पुलिस महकमों सहित सरकारी दफ्तरों में मौन रखकर शहीदों का याद किया गया। आक्रोश से भरे लोगों ने शहर-गांवों में बड़ी संख्या में पाकिस्तान के पुतले जलाए, रैलियां व कैंडल मार्च निकाले एवं शोक सभाएं कीं। यहां तक की सुबह बच्चों ने मुख्य सड़कों पर आतंकवाद के खिलाफ छोटे-छोटे हाथों में पोस्टर बैनर लिए मानव श्रंखलाएं बनाईं। यहां तक की व्यापारियों ने शोक के कारण कई बाजार तक बंद रखे।
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जल्दी लौटूंगा और सभी को घुमाने ले जाऊंगा, अधूरा रह गया वादा

कोटा के सांगोद स्थित विनोद कलां गांव निवासी हेमराज मीणा (44) की शहादत की खबर सुनकर गांव में सन्नाटा पसर गया। वे दो दिन पहले ही परिजनों से मिलकर जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। हेमराज 25 वर्ष की आयु में सीआरपीएफ में शामिल हो गए थे और फिलहाल 61वीं बटालियन में तैनात थे। परिजनों को हिम्मत बंधाने के लिए उनके घर पूरे जिले से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। उनके छह वर्षीय बेटे ऋ षभ को सही मायने में पिता के शहीद होने के बारे में पता नहीं है, लेकिन वह सहसा बोल उठा कि मैं बंदूक से दुश्मनों को मारूंगा। उनकी पत्नी मधुबाला पर ऋ षभ सहित दो बेटे और दो बेटियों की पूरी जिम्मेदारी आ गई है। दो दिन घर से निकलने से पहले परिजनों से वादा किया था कि जल्दी लौटूंगा और सभी को घुमाने ले जाऊंगा, अधूरा रह गया।
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गोद में दो माह की बच्ची लिए बिलख पड़ी शहीद की पत्नी

जयपुर के शाहपुरा स्थित गोविंदपुरा बांसड़ी गांव निवासी रोहिताश लांबा (27) जनवरी में ड्यूटी पर लौटे थे और अपनी दो माह की बच्ची को आंख भरकर देख भी नहीं पाए थे। रोहिताश के शहीद होने की खबर मिलने के बाद परिजन उनकी पत्नी को बताने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाए। लेकिन जब दिल पर पत्थर रखकर बताया, तो उनकी पत्नी बच्ची को सीने से लगाए बिलख पड़ी। जिसने भी ये खबर सुनी सभी शहीद के घर की ओर चल दिए और परिजनों को ढांढस बंधाया। सभी की आंखें नम थीं। रोहिताश का 2011 में सीआरपीएफ में चयन हुआ था। गुस्से से भरे ग्रामीणों ने सरकार से आर-पार की लड़ाई की मांग की और प्रशासन से आए अधिकारियों का विरोध भी किया।

दो मासूम अपने पिता से हमेशा के लिए बिछ़डे

धौलपुर के राजाखेड़ा स्थित जैतपुर गांव निवासी भागीरथ सिंह पूरा एक माह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बिताकर मीठी यादें लिए चार दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। उनकी शादी पांच वर्ष पहले ही हुई थी। उनकी पत्नी को जब से दुखद समाचार मिला है, रो-रो कर बुरा हाल है और परिजनों को संभलाना मुश्किल हो रहा है। उनके तीन वर्षीय बेटे और एक वर्ष की बेटी, अपने पिता से हमेशा के लिए बिछड़ गए। भागीरथ छह वर्ष पूर्व सीआरपीएफ की 45 बटालियन में भर्ती हुए थे।

जल्दी लौटने के लिए कहा था, लेकिन ऐसे लौटेगा....

राजसमंद के बिनोल गांव निवासी नारायण गुर्जर दो दिन पूर्व ड्यूटी पर लौटे थे और पत्नी-बच्चों से कहा था कि जल्दी लौटूंगा। परिजनों ने सुबकते हुए कहा है कि वह ऐसे लौटेगा, ये पता नहीं था।  नारायण सीआरपीएफ की 118 बटालियन में तैनात थे। नारायण की 11 वर्ष की बेटी और 9 वर्ष के बेटे को अपने पिता की शहादत के बारे में स्कूल से लौटकर पता चला। परिजनों और ग्रामीणों में बहुत रोष है, उनका कहना है कि प्रधानमंत्री को पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए और आतंकवाद को लेकर कठोर निर्णय करने चाहिए।

युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे जीतराम

भरतपुर के नगर स्थित संदरावली गांव निवासी जीतराम गुर्जर अपने क्षेत्र के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे। उनके शहीद होने पर उनके युवा साथी उनकी बातें याद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे देश की सेवा करने के लिए सेना में भर्ती होने के लिए कहते रहते थे। जीतराम 2010 में सीआरपीएफ में शामिल हुए थे और फिलहाल 92वीं बटालियन में तैनात थे। जीतराम अपने परिवार में इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी शादी पांच वर्ष पूर्व हुई थी। उनकी दो मासूम बच्चियां हैं।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए राजस्थान के सपूत नारायण लाल गुर्जर ने हाल ही एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया था। उनके एक-एक बोल से लगा कि हम देशवासी दिल से अपनी सुरक्षा एजेंसियों का साथ दें, तो आतंक और आतंकियों को समूल नष्ट किया जा सकता है। वे 12 फरवरी को ही ड्यूटी पर लौटे थे। उन्होंने शहीद होने से पहले अपने देशवासियों से ये अपील की थी....

‘साथियों, मैं कुछ दिनों से परेशान चल रहा हूं। उसका कारण है कि कुछ लोग मेरा सुख-चैन छीनने की कोशिश कर रहे हैं। मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि जिस तरह से हम उग्रवादियों से जूझ रहे हैं और खास करके पिछले तीन सालों से आप देख रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में हम कितने अपने साथियों को खोकर, कितने साथियों को शहीद करके, एक-एक उग्रवादी को दिन-रात कड़ी मेहनत करके मौत के घाट उतार रहे हैं। कुछ लोग मेरा सुख चैन छीनने की कोशिश कर रहे हैं, क्या साथियों आप लोग चाहोगे कि वे लोग मेरा सुख-चैन छीनें। अगर नहीं, तो आप लोग उठिए, जागिए और जिस तरह से हम उग्रवादियों को खोज रहे हैं आप भी उन लोगों को खोजिए। उनको एक-एक करके जो आप उन्हें सजा देना चाहें, दीजिए। जो उचित लगे कीजिए। मेरे सुख चैन छीनने वालों को आप जो चाहे सजा दे सकते हैं। और कुछ नहीं तो कम से कम उन्हें बता सकते हैं कि जो आप कर रहे हो वो गलत है, आपको यह नहीं करना चाहिए। जो लोग दिन रात मेहनत करके हमारे लिए जी रहे हैं, हमें उन लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए। 

क्या साथियों ये सब हम पैसे के लिए कर रहे हैं? खैर, इसका उत्तर आप खुद ही खोजें। हम आप लोगों के लिए क्या कर रहे हैं, नहीं कर रहे हैं, ये आप लोग मुझसे बेहतर जानते हैं। आप लोगों का भी ये कर्तव्य बनता है कि आप लोग मेरे साथ सहयोग करें, आप लोग मेरे साथ में आगे बढ़ें और जो लोग मेरा सुख चैन छीनने की कोशिश कर रहे हैं, वे चंद लोग हैं, उन्हें आप पैर में लगे कांटे की तरह निकाल फेंकिए।
जय हिंद, जय भारत
- शहीद नारायण लाल गुर्जर, बनोल, राजसमंद, राजस्थान

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