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CJI NV Ramana: देश की जेलों में बंद 80 फीसदी कैदी विचारधीन, सीजेआई बोले- न्यायिक पद न भरना लंबित केस का बड़ा कारण
Sat, 16 Jul 2022 05:43 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Sat, 16 Jul 2022 05:43 PM IST
सार
जयपुर में हुई अखिल भारतीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के सम्मेलन में मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना ने न्याय प्रक्रिया पर उठाए सवाल। केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना।
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सीजेआई एनवी रमना
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एन वी रमना ने कहा कि देश के जेलों में बंद 6.10 लाख कैदी बंद हैं। इनमें से 80 फीसदी विचाराधीन कैदी हैं। देश की जेले ब्लैक बॉक्स हैं। इन जेलों में बंद विचारधीन कैदी समाज के कमजोर वर्ग से आते हैं। ऐसे में हमें न्याय और प्रशासनिक प्रक्रिया को मजबूत करने की जरूरत है।
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न्याय प्रक्रिया में देरी एक तरह से सजा ही है। उन्होंने कहा, गलत तरीके से गिरफ्तारी और विचाराधीन बंदियों को लंबे समय तक जेल में रखने की समस्या में तत्काल सुधार की जरूरत है। सीजेआई रमना ने यह बातें शनिवार को जयपुर में आयोजित अखिल भारतीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के सम्मेलन में कहीं। इसमें केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू और सीएम अशोक गहलोत भी मौजूद थे।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रमना ने कहा, न्यायपालिका में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। इस प्रमुख कारण सरकार द्वारा न्यायिक पदों पर नियुक्ति नहीं करना है। उन्होंने कहा मुझसे पहले कानून मंत्री किरेन रिजिजू कुछ बातें कहीं, मेरी जिम्मेदारी है कि एक-दो चीजों पर प्रतिक्रिया दूं। उन्होंने कहा, मुझे खुशी है कि मैंने लंबित मामलों के मुद्दे को उठाया है। जब हम न्यायाधीश देश से बाहर जाते हैं, तो हमें भी इसी सवाल का सामना करना पड़ता है। हमसे पूछा जाता है कि एक ही केस कितने साल तक चलेगा? आप सभी जानते हैं कि लंबित मामलों में देरी का प्रमुख कारण न्यायिक पदों पर नियुक्तियां और न्यायिक ढांचे में सुधार नहीं होना है।
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सीजेआई ने कहा, नालसा एक्ट एक क्रांतिकारी कदम है और सभी का संयुक्त प्रयास से ही नालसा संभव हो पाया है। हमें इसकी मूल भावना को नहीं भूलना चाहिए। पिछले मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में हमने इसकी तर्ज एक न्यायिक बुनियादी ढांचा प्राधिकरण का सुझाव दिया था, लेकिन इसे नहीं लिया गया। हालांकि, मुझे विश्वास है कि इस पर एक बार फिर विचार किया जाएगा। न्यायपालिका में खाली पड़े पद भरे जाएं और एक बुनियादी ढांचा दिया जाए। यहीं सरकार से मेरा अनुरोध है।
मोबाइल एप का किया उद्घाटन
सम्मेलन में सीजेआई रमना ने नालसा की मोबाइल एप और नालसा ऑनलाइन मिडिएशन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, यह नई पहल कैदी के हितों की दिशा में बेहतर कदम है। अब क्लिक पर कैदी से जुड़ी सभी जानकारी सामने आ जाएंगी।
पढ़ें केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने सम्मेलन में क्या कहा?