{"_id":"6ac7633da7fdf21a4b05e418","slug":"district-hospital-sdp-machine-closed-dengue-cancer-patients-platelet-cost-2026-10-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजस्थान: अलवर जिला अस्पताल में सप्ताह भर से बंद पड़ी एसडीपी मशीन, मरीज परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजस्थान: अलवर जिला अस्पताल में सप्ताह भर से बंद पड़ी एसडीपी मशीन, मरीज परेशान
Thu, 08 Oct 2026 03:06 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Thu, 08 Oct 2026 03:06 PM IST
सार
अलवर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एसडीपी मशीन एक सप्ताह से बिजली बैकअप की समस्या के कारण बंद है। डेंगू, कैंसर और अन्य गंभीर मरीजों को निजी संस्थानों से करीब 11 हजार रुपये में एसडीपी खरीदनी पड़ रही है। वहीं, सेंट्रल लैब की इलेक्ट्रोलाइट जांच व्यवस्था भी तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरी के कारण प्रभावित है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल,अलवर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अलवर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) की मशीन पिछले एक सप्ताह से बंद है। बिजली जाने के बाद बैकअप न मिलने से यह प्रक्रिया रुक जाती है। इससे कैंसर, डेंगू, स्क्रब टाइफस और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। अस्पताल में सुविधा होने के बावजूद मशीन बंद रहने से जरूरतमंद मरीज निजी संस्थानों से करीब 11 हजार रुपये चुकाकर एसडीपी खरीद रहे हैं।
बिजली बैकअप और उपकरणों की समस्या
विशेषज्ञों के अनुसार एक एसडीपी मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या करीब 40 से 50 हजार तक बढ़ा सकती है। डेंगू, कैंसर और जटिल प्रसव के मामलों में डॉक्टर एसडीपी की सलाह देते हैं। मशीन बंद होने की मुख्य वजह बिजली कटौती के दौरान बैकअप न मिलना है। अस्पताल में जनरेटर उपलब्ध है, लेकिन उसका ऑटो स्टार्ट सिस्टम लगभग एक साल से खराब पड़ा है। बिजली कटते ही जनरेटर स्वयं चालू नहीं होता और ब्लड बैंक का यूपीएस भी बंद पड़ा है। एसडीपी तैयार करने वाली किट की कीमत सात से आठ हजार रुपये है, जो बिजली बाधित होने से खराब हो सकती है।
लैब जांच और मंजूरी की प्रक्रिया
अस्पताल की सेंट्रल लैब में सीरम इलेक्ट्रोलाइट जांच मशीन भी करीब छह महीने से खराब है। केटीपीएल कंपनी ने पुरानी मशीन को कंडम घोषित कर दिया है। मरीजों की निशुल्क जांच जारी रखने के लिए अस्पताल प्रशासन ने निजी संस्थान से अनुबंध किया है। लैब के लिए दो नई इलेक्ट्रोलाइट मशीनें अस्पताल में आ चुकी हैं, लेकिन खरीद आदेश में मेक और मॉडल दर्ज न होने तथा डॉक्टर की तकनीकी मंजूरी न मिलने से इनका इंस्टॉलेशन अटका हुआ है। नियमानुसार एक लाख रुपये तक के उपकरण के लिए बायोमेडिकल इंजीनियर और इससे अधिक राशि के लिए विभागाध्यक्ष की स्वीकृति आवश्यक है। वहीं 50 हजार रुपये तक के उपकरण अस्पताल तीन कोटेशन के आधार पर खरीद सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजली बैकअप और उपकरणों की समस्या
विशेषज्ञों के अनुसार एक एसडीपी मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या करीब 40 से 50 हजार तक बढ़ा सकती है। डेंगू, कैंसर और जटिल प्रसव के मामलों में डॉक्टर एसडीपी की सलाह देते हैं। मशीन बंद होने की मुख्य वजह बिजली कटौती के दौरान बैकअप न मिलना है। अस्पताल में जनरेटर उपलब्ध है, लेकिन उसका ऑटो स्टार्ट सिस्टम लगभग एक साल से खराब पड़ा है। बिजली कटते ही जनरेटर स्वयं चालू नहीं होता और ब्लड बैंक का यूपीएस भी बंद पड़ा है। एसडीपी तैयार करने वाली किट की कीमत सात से आठ हजार रुपये है, जो बिजली बाधित होने से खराब हो सकती है।
विज्ञापन
लैब जांच और मंजूरी की प्रक्रिया
अस्पताल की सेंट्रल लैब में सीरम इलेक्ट्रोलाइट जांच मशीन भी करीब छह महीने से खराब है। केटीपीएल कंपनी ने पुरानी मशीन को कंडम घोषित कर दिया है। मरीजों की निशुल्क जांच जारी रखने के लिए अस्पताल प्रशासन ने निजी संस्थान से अनुबंध किया है। लैब के लिए दो नई इलेक्ट्रोलाइट मशीनें अस्पताल में आ चुकी हैं, लेकिन खरीद आदेश में मेक और मॉडल दर्ज न होने तथा डॉक्टर की तकनीकी मंजूरी न मिलने से इनका इंस्टॉलेशन अटका हुआ है। नियमानुसार एक लाख रुपये तक के उपकरण के लिए बायोमेडिकल इंजीनियर और इससे अधिक राशि के लिए विभागाध्यक्ष की स्वीकृति आवश्यक है। वहीं 50 हजार रुपये तक के उपकरण अस्पताल तीन कोटेशन के आधार पर खरीद सकता है।
विज्ञापन