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Rajasthan: बारां के इस मंदिर में त्योहारों पर चलती है तोप, जानें 476 साल पुरानी परंपरा का इतिहास
Mon, 24 Oct 2022 07:10 AM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
Published by: उदित दीक्षित
Updated Mon, 24 Oct 2022 07:10 AM IST
सार
मंदिर के पुजारी जगदीश प्रसाद गौतम ने बताया कि यहां तोप चलाने की परंपरा 476 साल से भी ज्यादा पुरानी है। इसकी शुरुआत विक्रम संवत् 1603 से हुई थी।
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त्योहारों पर चलाई जाती है तोप।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राजस्थान में त्योहारों को लेकर एक खास उत्साह होता है। यहां के प्राचीन मंदिरों में हिंदु त्योहारों पर कई विशेष तरह की परंपराओं का निर्वहन भी किया जाता है। प्रदेश के बारां जिले में ब्रिटिशकाल से पहले बने एक मंदिर में भी एक ऐतिहासिक परंपरा निभाई जाती है।
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दरअसल, बारां की मांगरोल रोड़ पर एक प्राचीन प्यारे रामजी मंदिर है। इस मंदिर में भगवान विष्णु अनंत रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर में कुछ विशेष हिंदू त्योहार पर तोप चलायी जाती है। तोप चलाए जाने के बाद बाद ही शहर के अन्य मंदिरों पूजा-अर्चना का दौर शुरू होता है। मंदिर में तोप चलने की प्रक्रिया को देखने के लिए जिले के आसपास और पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से भी लोग आते हैं।
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मंदिर के पुजारी जगदीश प्रसाद गौतम ने बताया कि यहां तोप चलाने की परंपरा 476 साल से भी ज्यादा पुरानी है। इसकी शुरुआत विक्रम संवत् 1603 से हुई थी। उन्होंने बताया कि यह तोप कृष्णजन्माष्टमी, रामनवमी, अनंतचर्तुदर्शी और अन्नकूट पर चलती थी। मंदिर के देवस्थान विभाग के अंतर्गत आने के बाद अन्नकूट पर तोप का चलाना बंद हो गया है।
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पुजारी ने बताया कि रामनवमी रामजन्म पर दोपहर 12 बजे, कृष्ण जन्माष्टमी पर रात की 12 बजे और अनंत चतुदर्शी पर दोपहर 12 बजे तोप चलाई जाती है। जिसके बाद शहर के अन्य मंदिरों में आरती शुरू की जाती है। पुजारी जगदीश के अनुसार साल के तीन विशेष त्योहारों पर तोप चलती है। दीपावली पर यह तोप नहीं चलाई जाती है।