फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Brother and sister became teachers of Kharia village of Nagaur

khushkhabar: सात साल की उम्र में मां को खोया, अब गांव के पहले शिक्षक बने भाई-बहन, पढ़ें सफलता की संघर्ष भरी कहानी   

Wed, 20 Apr 2022 05:03 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर Published by: उदित दीक्षित Updated Wed, 20 Apr 2022 05:03 PM IST
सार

गंगा और ओमप्रकाश कक्षा 12वीं तक एक साथ एक ही क्लास पढ़े। दोनों ने बीएसटीसी भी एक साथ की। दो साल तक रीट की परीक्षा के लिए तैयारी भी दोनों ने मिलकर की और जब परिणाम आया तो दोनों को 143-143 अंक मिले। अब दोनों भाई बहन एक साथ ही शिक्षक भी बन गए हैं।

विज्ञापन
Brother and sister became teachers of Kharia village of Nagaur
शिक्षक बने भाई और बहन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्री बालाजी ग्राम के पास एक छोटा सा गांव है खारिया। यहां करीब 500 लोगों की आबादी है। आजादी के बाद से इस गांव का कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी नहीं कर रहा है। अगर कोई परिवार अपने बच्चों को पढ़ाते हैं तो दूसरे लोग उन्हें ताने मारते हैं। कहते हैं, पढ़ाकर कलेक्टर बना लोगे क्या? शिक्षा के प्रति ऐसी रूढ़िवादी सोच को नकार दो सगे भाई-बहन ने एक साथ सरकारी नौकरी हासिल की। पढ़िए उनके संघर्ष की कहानी...

विज्ञापन

  

खारिया गांव में रहने वाले 22 साल के ओमप्रकाश जाट और 23 साल की गंगा चोटिया सगे भाई बहन है। 6-7 साल की उम्र में उनकी दोनों की मां का निधन हो गया। घर की आर्थिक स्थित भी ज्यादा ठीक नहीं थी। पिता चंपा राम मजदूरी पर परिवार का पालन पोषण करते थे। इसके बाद भी किसी ने हिम्मत नहीं हारी। पिता ने मजदूरी से होने वाली कमाई से दोनों बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और बच्चों ने भी पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

दोनों भाई बहनों ने हनुमान नगर व श्री बालाजी के सरकारी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद नागौर कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। दोनों बहन भाई ने मन में ठान लिया था कि उन्हें सरकारी शिक्षक ही बनना है, लेकिन गरीबी यहां भी बाधा बनी। पिता की कमाई इतनी नहीं थी कि उन्हें रीट की तैयारी के लिए कोचिंग सकें। 

ऐसे में दोनों भाई-बहन ने किताबों का एक सेट खरीदा और उसी से पढ़ाई शुरू की। दोनों रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई करते थे। इसका नतीजा यह रहा कि बीते रविवार को जारी हुई रीट लेवल-वन की कटऑफ में दोनों का चयन हो गया। दोनों भाई-बहन खारिया गांव के पहले शिक्षक हैं। पढ़ाई के दौरान उनके पति को ताने मारने वाले लोग आज उन्हें बधाई दे रहे हैं। 
 

विज्ञापन

पढ़ाई से लेकर नौकरी सब साथ-साथ
गंगा और ओमप्रकाश कक्षा 12वीं तक एक साथ एक ही क्लास पढ़े। दोनों ने बीएसटीसी भी एक साथ की। दो साल तक रीट की परीक्षा के लिए तैयारी भी दोनों ने मिलकर की और जब परिणाम आया तो दोनों को 143-143 अंक मिले। अब दोनों भाई बहन एक साथ शिक्षक भी बन गए हैं।

रीट परीक्षा से दो महीने पहले दादा की हुई मौत 
पुराने दिनों को याद करते हुए ओम प्रकाश ने बताया कि मां के निधन के समय गंगा सात साल की थी। मां के जाने के बाद उसने रसोई की जिम्मेदारी उठा ली थी। वह खाना बनाती और मैं बर्तन धोता था। पिता चंपा राम घर चलाने के लिए खेतों में मजदूरी करते थे।

घर खर्च और हमें पढ़ाई के लिए उन्होंने ड्राइवर की नौकरी कर ली। कुछ दिन बाद जीप खरीदकर बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने लगे। ओम प्रकाश ने बताया कि रीट परीक्षा से दो महीने पहले दादा की मौत हो गई थी। इससे पहले दादा ने एक दिन कहा था, मेहनत करो दोनों एक दिन जरूर सफल होगे। 

स्नातक करने और शिक्षक बनने वाली गांव की पहली बेटी गंगा 
खारिया गांव में शिक्षा का स्तर ऐसा है कि यहां बेटियों को तो पढ़ाया ही नहीं जाता है। गंगा गांव की ऐसी पहली बेटी है जिसने बीए तक की पढ़ाई की है और अब शिक्षक बनकर गांव का नाम रोशन किया है। अपनी कामयाबी का श्रये गंगा अपने पिता के त्याग और संघर्ष को देती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed